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'हम जहां ठहरे थे, वो गांव बह गया', कैलाश यात्रा पर निकले 43 श्रद्धालु बोले- नेपाल की तबाही से कुछ घंटे पहले पार किया था 'फ्रेंडशिप ब्रिज'

कच्छ, अहमदाबाद और मुंबई के 43 श्रद्धालुओं के लिए कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दौरान महाकाल की कृपा रक्षा कवच साबित हुई। नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी बॉर्डर पर आए भीषण जलप्रलय से मात्र 14 घंटे पहले इस दल ने सीमा पार कर चीन के क्यिरॉन्ग में प्रवेश किया था। बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी के भयावह उफान ने ऐतिहासिक 'फ्रेंडशिप ब्रिज' और इमिग्रेशन केंद्र को पूरी तरह तबाह कर दिया।

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महाकाल का चमत्कार

Photo : Times Now Digital

पवित्र सावन महीने में कैलाश-मानसरोवर दर्शन की अभिलाषा लेकर निकले गुजरात के कच्छ, अहमदाबाद और मुंबई के 43 श्रद्धालुओं के लिए एक चमत्कार जैसा वाकया सामने आया है। नेपाल और चीन (तिब्बत) सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी-केरुंग बॉर्डर पर आई भीषण बाढ़ से महज 14 घंटे पहले यह पूरा जत्था सीमा पार कर चुका था। भोटेकोशी नदी के भयावह उफान ने जिस 'फ्रेंडशिप ब्रिज' और सीमा सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया, वहां से यह दल वक्त रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया था।

गुजरात के कच्छ-भुज, अहमदाबाद और मुंबई के इन शिवभक्तों का जत्था कैलाश यात्रा के तय मार्ग से आगे बढ़ रहा था। मंगलवार शाम लगभग 6 बजे सभी 43 यात्रियों ने नेपाल की सीमा से निकलकर चीन के क्यिरॉन्ग पोर्ट पर अपना इमिग्रेशन पूरा कराया। यात्रा की खुशी में सभी सदस्यों ने बॉर्डर पॉइंट पर मुस्कुराते हुए एक यादगार ग्रुप फोटो भी क्लिक कराई थी।

सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी ने धारण किया विकराल रूप

इसके ठीक 14 घंटे बाद, बुधवार सुबह लगभग 8:45 बजे तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। नदी का बहाव इतना खौफनाक था कि ऐतिहासिक 'फ्रेंडशिप ब्रिज' और आसपास का पूरा इमिग्रेशन इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ ही पलों में पानी में बह गया।

भगवान शिव की असीम कृपा से पूरा दल सुरक्षित-भुज टूर ऑपरेटर

भुज के टूर ऑपरेटर शैलेशभाई माहेश्वरी ने बताया कि भगवान शिव की असीम कृपा से ही पूरा दल सुरक्षित बच सका है। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम को इमिग्रेशन कराने के बाद उन्होंने ग्रुप फोटो ली थी और अगले ही दिन वह पूरा बॉर्डर एरिया बाढ़ में समा गया। इतना ही नहीं, एक रात पहले यात्री नेपाल के जिस स्याब्रुबेसी गांव में रुके थे, वह गांव भी जलप्रलय में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। फिलहाल सभी 43 श्रद्धालु चीन के सुरक्षित इलाके में मौजूद हैं और अपनी आगे की कैलाश यात्रा पर बढ़ रहे हैं।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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