संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और मानवाधिकारों के हनन पर गहरा ध्यान आकर्षित किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर हुई हिंसक कार्रवाई की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
महासचिव के प्रवक्ता का बयान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 'पीटीआई' (PTI) के सवाल का जवाब देते हुए पीओके के हालिया घटनाक्रम पर संयुक्त राष्ट्र का रुख साफ किया। रहान हक ने कहा, "महासचिव अपने मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के काम का पूरी तरह समर्थन करते हैं। हमें उम्मीद है कि तुर्क की अपीलों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति दें। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है या उनकी जान गई है, तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।"
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने उठाए गंभीर सवाल
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पिछले महीने जिनेवा से जारी अपने बयान में पीओके में हो रही हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई थी। उन्होंने जून से लेकर 27 जुलाई को हुए क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई मौतों की तत्काल, गहन और निष्पक्ष जांच का की मांग की। साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने, सार्वजनिक सभाओं पर रोक और पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को बाधित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने स्थानीय लोगों की मूलभूत समस्याओं और शिकायतों का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद शुरू करने का आग्रह किया था
'संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति' पर बैन
पीओके में बिजली की दरों, आटे पर सब्सिडी और अन्य बुनियादी अधिकारों को लेकर चल रहे इन जनांदोलनों की अगुवाई संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (JAAC) कर रही है। इस समिति में स्थानीय नागरिक, छात्र, वकील, ट्रांसपोर्टर और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। हालांकि, जनआंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने समिति को 'सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा' बताते हुए उस पर आतंकवाद-रोधी कड़े कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया है और कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर घिरी पाकिस्तानी नीतियां
संयुक्त राष्ट्र की इस कड़ी टिप्पणी और मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पीओके में बुनियादी मानवाधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जवाबदेही तय करने और इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की मांग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है।
