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वर्दी में रील बनाई तो होगी कार्रवाई, सोशल मीडिया की कमाई का भी देना होगा हिसाब; MP पुलिस में सोशल मीडिया को लेकर सख्ती

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर 24 बिंदुओं की नई गाइडलाइन जारी की है। अब वर्दी में रील, सरकारी संसाधनों का निजी प्रचार, संवेदनशील जानकारी या लोकेशन साझा करने और बिना अनुमति सोशल मीडिया से कमाई करने पर कार्रवाई हो सकती है।

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मध्य प्रदेश में पुलिस ने वर्दी में बनाई रील्स तो होगी कार्रवाई। AI IMAGE

मध्य प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। डीजीपी कैलाश मकवाणा के निर्देश पर जारी 24 बिंदुओं की इस गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, सरकारी संसाधनों का निजी प्रचार के लिए इस्तेमाल करना और संवेदनशील सरकारी जानकारी को सोशल मीडिया या एआई टूल्स पर साझा करना अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है।

वर्दी में रील और फोटो डालना पड़ेगा भारी

नई गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वर्दी का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए करने पर कार्रवाई हो सकती है।

PHQ ने पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए नहीं करने के निर्देश दिए हैं। पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिसकर्मियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

सोशल मीडिया से कमाई पर भी नियम

गाइडलाइन में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। बिना शासन की अनुमति के पुलिसकर्मी सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित नहीं कर सकेंगे। पेड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप या किसी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस अथवा कारोबार का पैसे लेकर प्रचार करने पर भी रोक रहेगी।

जिन पुलिसकर्मियों ने पहले सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित की है, उन्हें निर्धारित अवधि में अपनी कमाई की जानकारी विभाग को देनी होगी। रिपोर्टों के मुताबिक इसके लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है। परिवार के किसी सदस्य के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी आय होने की स्थिति में भी इसकी जानकारी विभाग को देने का प्रावधान बताया गया है। सोशल मीडिया के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है।

इसी तरह सरकारी गोपनीय जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर भी रोक रहेगी। पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह प्रावधान खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोकेशन और संवेदनशील ड्यूटी की जानकारी भी नहीं होगी सार्वजनिक

पुलिसकर्मी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपनी लोकेशन, तैनाती स्थल और ड्यूटी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। वीआईपी-वीवीआईपी सुरक्षा, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों या संवेदनशील स्थानों पर तैनाती के दौरान फोटो या सेल्फी पोस्ट करने पर भी रोक रहेगी। हथियारों की ट्रेनिंग, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और पुलिस की अन्य संवेदनशील कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो या लाइव प्रसारण को भी सोशल मीडिया पर डालने से मना किया गया है।

पीड़ित, आरोपी और गवाह की पहचान उजागर करने पर रोक

पुलिस जांच और जनसुनवाई से जुड़े मामलों में पीड़ित, गवाह, शिकायतकर्ता और आरोपी की पहचान सार्वजनिक करने को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। किसी मामले से संबंधित फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले आवश्यक अनुमति लेने और पहचान छिपाने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर महिला और बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी साझा नहीं की जा सकेगी। जांच के दौरान ऐसी जानकारी भी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी, जिससे जांच प्रभावित होने या न्यायालय में चल रहे मामले पर असर पड़ने की आशंका हो।

संदिग्ध और आपराधिक छवि वाले लोगों से सोशल मीडिया दूरी

गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों को संदिग्ध, असामाजिक छवि या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के साथ सोशल मीडिया पर संपर्क रखने को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसे लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, उन्हें फॉलो करने या उनके साथ सोशल मीडिया पर सहयोगात्मक सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पुलिस की छवि और निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है।

सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों पर सोशल मीडिया टिप्पणी भी नहीं

नई गाइडलाइन के तहत पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, फैसलों या योजनाओं के खिलाफ टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों या साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपमानजनक या गरिमा के विपरीत टिप्पणी करने से भी बचना होगा।

सेवा से संबंधित शिकायत या असहमति को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के बजाय विभागीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिना पुष्टि की जानकारी पर प्रतिक्रिया देने से भी पुलिसकर्मियों को बचने को कहा गया है।

निजी अकाउंट के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं

पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट, वाई-फाई, IP एड्रेस या सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।इसके अलावा निजी मोबाइल फोन में विभाग के सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट को लॉगिन करने को लेकर भी प्रतिबंध तय किए गए हैं। मकसद सरकारी डिजिटल संसाधनों और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों को अलग रखना है।

उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई

PHQ की गाइडलाइन में साफ किया गया है कि सोशल मीडिया से जुड़े निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। मामले की गंभीरता के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार कार्रवाई में कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन तक की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

कुल मिलाकर नई गाइडलाइन के बाद मध्य प्रदेश पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया अब सिर्फ निजी मनोरंजन या लोकप्रियता का माध्यम नहीं रहेगा। वर्दी, सरकारी संसाधन, पुलिस की कार्रवाई, संवेदनशील जानकारी और सोशल मीडिया से होने वाली कमाई, इन सभी को लेकर विभाग ने नियम स्पष्ट कर दिए हैं।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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