PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यानी PoK में पिछले करीब दो महीने से प्रदर्शनों की आग से सुलग रहा है। प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे अपने जुल्म को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए उसने अपना पूरा विदेशी लॉबी नेटवर्क मैदान में उतार दिया है। वही लोग, जिन्हें दशकों से कश्मीर मुद्दे पर भारत को बदनाम करने के लिए पाला-पोसा गया, अब उन्हीं को PoK में हो रहे अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए कहा गया है। रिपोर्टों में यह बात एक अधिकारी के हवाले से कही गई है।
पीओके में दो महीने से जारी हैं प्रदर्शन
पीओके में पिछले लगभग दो महीने से विरोध-प्रदर्शन थम नहीं रहे। यह आंदोलन मुख्य रूप से जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में चल रहा है, जिसे पाकिस्तान सरकार ने बैन भी कर दिया है। शुरुआत बिजली दरों, गेहूं सब्सिडी और स्थानीय शासन को लेकर असंतोष से हुई थी, लेकिन अब यह मांग चुनावी सुधारों और इस्लामाबाद के दबदबे को खत्म करने तक फैल चुकी है।
अधिकारी ने कहा, 'उन्हीं लोगों को अब पीओके (PoK) में हो रहे अत्याचारों पर पर्दा डालने के लिए कहा जा रहा है।'
प्रदर्शनों में लगभग 40 लोग मारे जा चुके हैं
पीओके के प्रदर्शनों में कमी आने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह कर रहे हैं। प्रदर्शन शुरू होने के बाद से लगभग 40 लोग मारे जा चुके हैं, और अज्ञात संख्या में लोगों को जबरन गायब कर दिया गया है। जबरन गायब किए जाने और हत्याओं की वास्तविक संख्या पीओके से अभी सामने आ रहे आंकड़ों की तुलना में कहीं अधिक हो सकती है। वहां मोबाइल संचार और इंटरनेट के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा हुआ है।
अधिकारी ने कहा, 'पाकिस्तानी तंत्र यह भी नहीं चाहता कि उसके अपने लोगों को यह पता चले कि उसकी सुरक्षा बलों द्वारा किस हद तक अत्याचार किए गए हैं।' इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी ने कहा कि हाल के महीनों में पाकिस्तान अपने पक्ष में माहौल (नैरेटिव) बनाने के लिए विदेशों में लोगों पर भारी निवेश कर रहा है। ये निवेश कई कारणों से किए गए हैं।
भारत-विरोधी माहौल तैयार करना पाकिस्तान की प्राथमिकता
अधिकारी के अनुसार, विदेशों में विशेष रूप से कश्मीर मुद्दे पर भारत-विरोधी माहौल तैयार करना पाकिस्तान की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। इस प्रयास में विदेशी देशों के सांसदों के बीच पाकिस्तान की अनुकूल छवि पेश करना भी शामिल है, इस उम्मीद के साथ कि इससे बेहद जरूरी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग हासिल करने में मदद मिल सकती है। अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि इन अभियानों के लिए तैनात व्यक्तियों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों से ध्यान भटकाने का काम भी सौंपा गया है।
'पीओके में हो रही घटनाओं पर भी पर्दा डालें'
अधिकारी ने कहा कि शीर्ष स्तर के पाकिस्तानी अधिकारियों और इन समूहों के सदस्यों के बीच लगातार बातचीत हो रही है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि न केवल इन गतिविधियों पर, बल्कि पीओके में हो रही घटनाओं पर भी पर्दा डाला जाए। अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान दूर रखना चाहता है, जो दोनों क्षेत्र लंबे समय से भारी अशांति के गवाह रहे हैं।
पाकिस्तान पर चीन का भी काफी दबाव
एक अधिकारी ने आगे कहा कि पाकिस्तान पर चीन का भी काफी दबाव है, जिसने देश में भारी निवेश किया है। बलूचिस्तान में चीन द्वारा निर्मित बुनियादी ढांचे पर हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा हमले हुए हैं। अधिकारी के अनुसार, इन घटनाओं पर अधिक अंतरराष्ट्रीय ध्यान जाने से पाकिस्तान की छवि को और नुकसान पहुंच सकता है। अधिकारी ने कहा, 'यदि पाकिस्तान को विदेशी निवेश की रक्षा करने में असमर्थ के रूप में देखा जाने लगता है, तो यह इस्लामाबाद के लिए एक बड़ा झटका होगा।'
