Uttar Pradesh Split 4 States: उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और SBSP प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने एक रैली में कहा कि उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग राज्यों में बांटना तय है और यह देशव्यापी जाति जनगणना पूरी होने के बाद होगा। क्या यह कानूनी रूप से संभव है? इसमें क्या-क्या शामिल होगा? राजभर ने क्या कहा? आइए जानते हैं
ओम प्रकाश राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने बताया कि उन्होंने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से बात की थी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि एक बार जाति जनगणना पूरी हो जाने के बाद, राज्य को बांटने में कोई बाधा नहीं आएगी।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि चूंकि पूर्वी इलाके में राजभर समुदाय का वोट शेयर सबसे ज्यादा है, इसलिए प्रस्तावित 'पूर्वांचल' राज्य का पहला मुख्यमंत्री एक राजभर ही होगा। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में किसी भी चुनावी गठबंधन के लिए यह एक ऐसी शर्त होगी जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
राज्य के बंटवारे के साथ-साथ, राजभर ने इस मंच का इस्तेमाल 27% अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कोटे के भीतर उप-वर्गीकरण की मांग करने के लिए भी किया, ताकि आबादी के आकार के आधार पर अलग-अलग समुदायों को आनुपातिक आरक्षण मिल सके।
क्या पहले भी ऐसी कोई योजना बनी थी?
सबसे ठोस प्रशासनिक कदम नवंबर 2011 में उठाया गया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विधानसभा ने राज्य को चार छोटे क्षेत्रों- पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में बांटने के लिए ध्वनि मत से एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, यह प्रस्ताव केंद्र स्तर पर अटक गया और इसे कभी भी केंद्र सरकार की मंजूरी या संसदीय कार्रवाई नहीं मिली।
क्या UP को 4 राज्यों में बांटा जा सकता है?
उत्तर प्रदेश को कानूनी और प्रशासनिक रूप से चार राज्यों में बांटा जा सकता है, लेकिन इसके लिए भारत की संसद के माध्यम से एक औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया की जरूरत होती है, और अभी तक इस पर कोई अंतिम निर्णय या केंद्रीय मंजूरी नहीं मिली है।
देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य को बांटने का विचार एक ऐसी राजनीतिक चर्चा है जो बार-बार उठती रहती है, न कि कोई लागू की गई नीति।
कौनसे चार राज्य हो सकते हैं?
प्रस्तावित चार क्षेत्र कौन से हैं?
क्षेत्रीय नेताओं द्वारा आगे बढ़ाई गई ऐतिहासिक रूपरेखा UP के 75 जिलों को इस तरह बांटती है:
पूर्वांचल: पूर्वी जिले (जैसे गोरखपुर और वाराणसी)।
पश्चिम प्रदेश (हरित प्रदेश): पश्चिमी औद्योगिक और कृषि जिले।
बुंदेलखंड: मध्य प्रदेश की सीमा से लगे दक्षिणी अर्ध-शुष्क जिले।
अवध प्रदेश: राजधानी लखनऊ के आस-पास के केंद्रीय जिले।
संवैधानिक रूप से बंटवारा कैसे होता है?
भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत, मौजूदा राज्य से नया राज्य बनाने के लिए किसी औपचारिक संवैधानिक संशोधन की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसके लिए कुछ खास कदम उठाने पड़ते हैं:
-भारत के राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में एक बिल या सिफारिश पेश की जानी चाहिए।
-राष्ट्रपति को यह बिल भारत की संसद और यूपी की राज्य विधानसभा को भेजना होता है ताकि वे तय समय के भीतर अपनी राय दे सकें।
-हालांकि राज्य विधानसभा की राय पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन संसद उस राय को मानने के लिए बाध्य नहीं है और साधारण बहुमत से पुनर्गठन बिल पास कर सकती है।
