दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए शरजील इमाम को अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने इमाम को 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम जमानत दी है। शरजील इमाम पर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए धरना और प्रदर्शनों की आड़ में फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की साजिश रचने का आरोप है।
दिल्ली में हुए दंगे से जुड़े मामले शरजील इमाम जेल में बंद है। इस मामले में उसे अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया। उस पर आतंकवादी निरोधी कानून यूएपीए की धाराओं में केस दर्ज है। कोर्ट ने यह फैसला शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका पर 30 सितंबर को होने वाली सुनवाई से कुछ दिन पहले ही दिया है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने खालिद और इमाम की नई जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा था कि ये कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिकाओं पर दोबारा विचार करने के लिए तय किए गए चरण से पहले ही शुरू कर दी गई है।
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हाई कोर्ट में अपने जवाब में, राज्य ने इस कार्यवाही को 'गलत और गैर-कानूनी' बताया था और तर्क दिया है कि आरोपी 'गुलफिशा फातिमा बनाम दिल्ली राज्य (NCT)' मामले में 5 जनवरी, 2026 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों की अनदेखी करके अपनी ज़मानत याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई की मांग नहीं कर सकते।
राज्य के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम को अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद, या 5 जनवरी, 2026 से एक साल बाद-जो भी पहले हो-अपनी जमानत याचिकाओं पर दोबारा विचार करने की अनुमति दी थी।अभियोजन पक्ष का तर्क है कि मौजूदा कार्यवाही शुरू होने के समय ऐसी कोई भी स्थिति नहीं बनी थी।
खालिद और इमाम की कथित भूमिकाओं के बारे में SC की टिप्पणियों का भी हवाला
राज्य ने फरवरी 2020 की उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़ी बड़ी साजिश में खालिद और इमाम की कथित भूमिकाओं के बारे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला दिया था। अभियोजन पक्ष ने कथित बरामदगी, डिजिटल कम्युनिकेशन ट्रेल्स और बयानों सहित अन्य सबूतों का हवाला दिया है, और कथित योजना बनाने, लोगों को जुटाने और रणनीतिक दिशा देने में दोनों आरोपियों की कथित 'केंद्रीय और अहम भूमिका' के बारे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का ज़िक्र किया था।
