तुर्की में भूकंप के जोरदार झटकों के बाद मची तबाही को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। मंगलवार (सात फरवरी, 2023) को वह इस मसले पर जज्बाती हो गए और उन्हें साल 2001 में गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद के भयावह हालात की याद आ गई। सुबह बीजेपी की संसदीय बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि वह समझ सकते हैं कि तुर्की फिलहाल इस समय किस स्थिति से जूझ रहा है।
दरअसल, साल 2001 में गुजरात के कच्छ जिला में भुज में भूकंप के भीषण झटके आए थे, जिसमें 20 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी और लगभग डेढ़ लाख लोग जख्मी हुए थे। हजारों लोग उस भूकंप की घटना के चलते बेघर हो गए थे।
तुर्की समेत चार मुल्कों में झटकों से कांपी धरती, 4600 की मौत
तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद के झटकों के कारण मंगलवार दोपहर तक 4600 लोगों की मौत हो चुकी थी। अधिकारियों को आशंका है कि सोमवार भोर से पहले आए भूकंप और बाद के झटकों से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि बचावकर्मी मंगलवार को भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे।आपदा के लिहाज से क्यों कहा जाता है कि न यूज करें फोन?
दरअसल, तुर्की के इंटीरियर डिसास्टर एंड इमरजेंसी मैनेजमेंट प्रेसिडेंसी एएफएडी की ओर से अपील की गई थी कि वह जटिल परिस्थितियों को छोड़कर सामान्यतः फोन कॉल करने से बचें। अगर कॉल करें भी तो वे उन्हें छोटा रखें, जबकि इस दौरान एसएमएस और इंटरनेट आधारित मैसेज का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। आइए, जानते हैं कि ऐसा क्यों किया गयाः- टेक्स्ट मैसेज बेहद प्रैक्टिकल विकल्प हैं
- पब्लिक सेफ्टी को बढ़ावा मिलता है
- कॉलिंग टेक्स्ट मैसेज के मुकाबले अधिक बैट्री खाती है।
