जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने लद्दाख के नेताओं को सलाह दी है कि वे भूमि और नौकरियों के संबंध में संवैधानिक सुरक्षा उपायों की लड़ाई को लेकर केंद्र के मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले केंद्र के मौखिक आश्वासनों से अब तक कुछ प्राप्त नहीं हो सका है।
पुलवामा जिले में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, 'लद्दाख के अपने मुद्दे हैं, हमारे मुद्दे अलग हैं। हालांकि, एक दोस्त और शुभचिंतक के रूप में, मैं लद्दाख के नेताओं को केवल यही सलाह दे सकता हूं कि वे केंद्र सरकार के किसी भी मौखिक आश्वासन पर तब तक भरोसा न करें जब तक कि वे उन्हें लिखित रूप में और आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर करके न दें।'
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'हम खुद इसके शिकार रहे हैं'
मुख्यमंत्री दक्षिण कश्मीर जिले में विकास परियोजनाओं की समीक्षा करने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा, 'हम खुद इसके शिकार रहे हैं। हमें भी मौखिक आश्वासन दिए गए थे कि (विधानसभा) चुनाव के तुरंत बाद राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा। इसे लगभग दो साल बीत चुके हैं और वह वादा पूरा नहीं हुआ है।'
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'जिले के हर निर्वाचन क्षेत्र में विकास संबंधी गतिविधियां सुचारू रूप से जारी'
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन और आवंटित धन के खर्च के मामले में, जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में पुलवामा के शीर्ष पांच जिलों में शामिल होने की संभावना है। अब्दुल्ला ने कहा कि जिले के हर निर्वाचन क्षेत्र में विकास संबंधी गतिविधियां सुचारू रूप से चल रही हैं।
