Sonam Wangchuk Ladakh Agitation: केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधि मंडलों के बीच नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हुई इस बातचीत के बाद जलवायु कार्यकर्ता और 'लेह एपेक्स बॉडी' (LAB) के प्रमुख सदस्य सोनम वांगचुक ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि लद्दाख में एक चुनी हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम होने से पहले केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला लागू करती है, तो लद्दाख के लोग एक बार फिर सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) का प्रतिनिधिमंडल इस उम्मीद के साथ दिल्ली आया था कि गृह मंत्रालय प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय चुनी हुई संस्था (विधानसभा मॉडल) का पूरा ढांचा और शक्तियों का खाका पेश करेगा। हालांकि, सोनम वांगचुक ने बताया कि 4 महीने के लंबे इंतजार के बाद भी कोई मसौदा (Draft) सामने नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें अगली बैठक के लिए सवालों की एक सूची थमा दी गई, जिसे उन्होंने एक 'मजाक' करार दिया।
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कारगिल के प्रतिनिधि सज्जाद कारगिली भी हुए निराश
कारगिल के प्रतिनिधि सज्जाद कारगिली ने भी इस पर निराशा जताते हुए कहा कि वे जमीन, रोजगार, संस्कृति और भाषा के संवैधानिक संरक्षण (आर्टिकल 371 के तहत) के वादे से तभी संतुष्ट होंगे, जब इसका ड्राफ्ट जमीनी स्तर पर सामने आएगा। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष शासन मॉडल पर चर्चा आगे बढ़ रही है।
इस बात पर नहीं बनी सहमति
बैठक में पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के पीड़ितों को जल्द मुआवजा देने पर तो सहमति बनी, लेकिन दर्ज मामलों को एक साथ वापस लेने की मांग पर केंद्र ने अभी समय मांगा है। लद्दाख के समूहों ने स्पष्ट मांग रखी है कि संसद के आगामी सत्र में ही लद्दाख के लिए कानून बनाकर चुनाव कराए जाएं और तब तक वहां कोई बड़ा शासन संबंधी या जमीन से जुड़ा बदलाव न किया जाए। अब सभी की निगाहें अक्टूबर के पहले हफ्ते में कारगिल में होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं।
