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अब मुंबई में बुरका पहनी छात्राओं को प्रवेश से रोका, प्रिंसिपल बोलीं- जिसको आपत्ति वो छोड़ दे कॉलेज

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 3, 2023, 10:09 AM IST

Mumbai college Burqa Controversy: कॉलेज की प्रिंसिपल विद्या गौरी लेले ने बताया, कॉलेज ने इस साल एक ड्रेस कोड लागू किया है और नियमों के बारे में अभिभावकों को पहले ही बता दिया गया था। उन्होंने कहा कि जो भी छात्रा ड्रेस कोड पर आपत्ति जताती है, वह कॉलेज छोड़ने के लिए स्वतंत्र है।

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Mumbai college Burqa Controversy

Photo : BCCL

Mumbai college Burqa Controversy: कर्नाटक में पिछले साल हिजाब विवाद के बाद नया मामला मुंबई से सामने आया है। यहां बुरका पहनीं छात्राओं को एक कॉलेज में प्रवेश देने से रोक दिया गया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। कॉलेज के गेट के सामने छात्राओं और अभिभावकों के प्रदर्शन के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति संभाली।

मामला मुंबई कें चेंबूर स्थित एनजी आचार्य और डीके मराठी कॉलेज का है। यहां बुधवार को कॉलेज के सुरक्षाकर्मियों ने बुरका पहनीं छात्राओं को प्रवेश से रोक दिया। सुरक्षाकर्मियों ने छात्राओं से बुरका उतारकर प्रवेश की बात कही, जिसका उन्होंने विरोध जताया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और छात्राओं के माता-पिता भी मौके पर पहुंच गए और प्रदर्शन करने लगे।

पुलिस ने सुलझाया मुद्दा

मामला बढ़ता देख पुलिस मौके पर पहुंची और उसने मामले को शांत कराया। पुलिस अधिकारी ने बताया, स्कूल में नए ड्रेस कोड को लेकर विवाद हुआ था। कुछ छात्राओं को बुरका पहनकर स्कूल में प्रवेश देने से रोका गया था। उन्होंने बताया, मुस्लिम छात्राओं ने कहा कि वे बुरका हटाने को तैयार हैं लेकिन कक्षाओं में वे स्कार्फ पहनेंगी। कॉलेज प्रबंधन के इस शर्त पर सहमति जताने के बाद स्थिति शांत हुई।

अभिभावकों को पहले ही बता दिया गया था ड्रेस कोड

कॉलेज की प्रिंसिपल विद्या गौरी लेले ने बताया, कॉलेज ने इस साल एक ड्रेस कोड लागू किया है और नियमों के बारे में अभिभावकों को पहले ही बता दिया गया था। 1 मई को, हमने इस नई ड्रेस कोड नीति पर चर्चा करने के लिए माता-पिता के साथ एक बैठक की। हमने बुर्का, हिजाब, स्कार्फ और स्टिकर पर प्रतिबंध सहित हर चीज के बारे में सूचित किया था। उस वक्त ड्रेस कोड पर सभी ने सहमति जताई थी। लेकिन वे अब विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी छात्रा ड्रेस कोड पर आपत्ति जताती है, वह कॉलेज छोड़ने के लिए स्वतंत्र है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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