Tarun Tejpal News: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से तरुण तेजपाल को बड़ा झटका लगा है। तरुण तेजपाल को गोवा रेप केस में दो हफ्तों के अंदर सरेंडर करने का सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। तरुण तेजपाल को बंबई हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई है। जिसके बाद तरुण तेजपाल राहत की उम्मीद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां उन्हें अब सरेंडर करने का आदेश मिला है।
तेजपाल के वकील की दलील
अदालत ने कहा कि अगर तेजपाल 22 सितंबर तक अपना सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल कर देते हैं तो मामले को 22 सितंबर को कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा। तेजपाल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि सरेंडर से छूट के लिए आवेदन दाखिल किया गया है। उन्होंने दलील दी कि मामला 2013 का है और 2026 तक तेजपाल शुरुआती करीब छह महीने की अवधि को छोड़कर लगातार जमानत पर रहे हैं।
सिब्बल ने कहा कि हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश पर रोक दी है और सरेंडर से छूट की मांग के कारणों का जिक्र किया है। उन्होंने अदालत से कहा कि अपील को सीधे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। सिब्बल ने तर्क दिया कि संबंधित कानून में सरेंडर को लेकर कोई बाध्यता नहीं है और ऐसे में अपील सुनवाई योग्य है। उन्होंने कहा कि अपील की सुनवाई से कुछ दिन पहले तेजपाल को जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं है।
गोवा सरकार ने क्या कहा?
गोवा सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरेंडर से छूट की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट में राहत के लिए आवेदन करने का अवसर देने के मकसद से लगाई है। मेहता ने कहा कि यह 10 साल की सजा का मामला है और कोर्ट को सरेंडर से छूट देने के सवाल पर मामले की प्रकृति और फैसले में दर्ज निष्कर्षों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस के अनुसार मामला गंभीर प्रकृति के अपराध से जुड़ा है।
इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि वह फिलहाल मामले की मेरिट पर बहस नहीं कर रहे हैं और दूसरी तरफ से भी इस स्तर पर मेरिट पर दलील नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बरी किए जाने के फैसले को पलटने वाले मामले में अपील का अधिकार महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरेंडर से छूट के सवाल पर अपराध की प्रकृति और सजा की अवधि पर विचार करेगा। इस दौरान तेजपाल की ओर से सरेंडर के लिए दो हफ्ते का समय मांगा गया। अंत में कोर्ट ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करेगा और इसका सर्टिफिकेट दाखिल करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या मुद्दा था?
जिस व्यक्ति को जेल की सजा हो चुकी है और वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करता है, उसे सामान्यतः पहले सरेंडर करना होता है। सरेंडर करने के बाद उसे सुप्रीम कोर्ट में उसका प्रमाण (Surrender Certificate) दाखिल करना होता है। यदि वह सरेंडर नहीं करना चाहता, तो उसे सुप्रीम कोर्ट से “exemption from surrender” यानी सरेंडर से छूट मांगनी होती है।
