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History: सबसे पहले भारत के ​किस शहर में आई थी ईस्ट इंडिया कंपनी, क्या था उसके जहाज का नाम

भारत के इतिहास में ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआत में यह कंपनी भारत पर शासन करने के लिए नहीं, बल्कि व्यापार करने के इरादे से आई थी। लेकिन धीरे-धीरे व्यापार के साथ उसने राजनीति और सैन्य ताकत को बढ़ाया और आखिरकार भारत के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह बेसिक बातें हम सभी को पता हैं, लेकिन कभी सोचा है कि ईस्ट इंडिया कंपनी है क्या? यह भारत कब आई, किस जहाज से आई, भारत के किस शहर में पहुंची? आइये जानें ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में

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सबसे पहले भारत के किस शहर में आई थी ईस्ट इंडिया कंपनी, क्या था उसके जहाज का नाम (Image - ChatGPT)

East India Company History in Hindi: भारत के इतिहास में ईस्ट इंडिया कंपनी का नाम बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआत में यह कंपनी भारत पर शासन करने के लिए नहीं, बल्कि व्यापार करने के इरादे से आई थी। लेकिन धीरे-धीरे व्यापार के साथ उसने राजनीति और सैन्य ताकत को बढ़ाया और आखिरकार भारत के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। यह बेसिक बातें हम सभी को पता हैं, लेकिन कभी सोचा है कि ईस्ट इंडिया कंपनी है क्या? यह भारत कब आई, किस जहाज से आई, भारत के किस शहर में पहुंची? आइये जानें ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में

ईस्ट इंडिया कंपनी क्या थी? East India Company kya thi

सबसे पहले जानें 'ईस्ट इंडिया कंपनी' क्या थी? कम लोगों को पता होगा कि ईस्ट इंडिया कंपनी इंग्लैंड की एक व्यापारिक कंपनी थी, जिसे पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के लिए बनाया गया था। इसे महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने 31 दिसंबर 1600 को रॉयल चार्टर दिया था। इस चार्टर के बाद कंपनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के विशेष अधिकार मिले। उस समय यूरोप के कई देश एशिया के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। भारत मसाले, कपड़े, रेशम, नील और दूसरी कीमती वस्तुओं के कारण यूरोपीय व्यापारियों के लिए बेहद आकर्षक था। ईस्ट इंडिया कंपनी भी इसी व्यापार में अपना हिस्सा बढ़ाना चाहती थी।

ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में कब आई? East India Company Bharat me Kab aai

ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज पहली बार 1608 में भारत आया। इनके जहाज का नाम था 'हेक्टर' और जहाज के कप्तान का नाम था 'विलियम हॉकिन्स'। हालांकि कंपनी की शुरुआत एक व्यापारिक संस्था के रूप में हुई थी, लेकिन आगे चलकर इसकी भूमिका बदल गई। व्यापारिक केंद्रों और सैनिक ताकत के सहारे कंपनी ने धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में दखल देना शुरू किया और बाद में एक बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई।

ध्यान रहे, ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत पहुंचने और भारत में स्थायी व्यापारिक फैक्ट्री स्थापित करने की तारीख अलग-अलग है। सूरत में अंग्रेजों की स्थायी फैक्ट्री बाद के वर्षों में स्थापित हुई। 1611 में कंपनी ने मसुलीपट्टनम में भी अपना व्यापारिक केंद्र बनाया और सूरत में स्थायी फैक्ट्री की स्थापना 1610 के दशक में हुई।

ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के किस शहर में आई थी? East India Company bharat ke kis shahar me aai

ईस्ट इंडिया कंपनी सबसे पहले गुजरात के सूरत शहर में पहुंची थी। उस समय सूरत भारत के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक केंद्रों में शामिल था। गुजरात के कपड़े और दूसरे सामान विदेशों में बड़े पैमाने पर भेजे जाते थे, इसलिए कंपनी के लिए सूरत व्यापार शुरू करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण जगह थी। अब चूंकि उस समय भारत में मुगलों का शासन था, इसलिए कंपनी को व्यापार करने के लिए मुगल शासक से अनुमति की जरूरत थी। सूरत पहुंचने के बाद कंपनी आगरा गई जहां मुगल दरबार में जाकर व्यापार की अनुमति लेने की कोशिश की। कंपनी की तरफ से विलियम हॉकिन्स आगरा पहुंचे और मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में गए। उनके पास इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम का पत्र भी था। हालांकि उस समय पुर्तगाली पहले से ही भारत के समुद्री व्यापार में मजबूत स्थिति में थे। उनकी वजह से अंग्रेजों को व्यापारिक अधिकार हासिल करने में तुरंत सफलता नहीं मिली। अंग्रेजों ने तरह तरह की कोशिशे कीं, फायदा दिखाया, लालच दिखाया आखिरकार उन्हें मुगल राजा जहांगीर से व्यापार की अनुमति मिल गई।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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