Investing and History : शेयर बाजार में बेहतर निवेश के लिए सिर्फ चार्ट, वैल्यूएशन और बैलेंस शीट समझना काफी नहीं है। निवेशकों को इतिहास भी पढ़ना चाहिए, क्योंकि बाजार भले बदलते रहें, लेकिन इंसानी व्यवहार बहुत कम बदलता है। लालच, डर और घबराहट जैसी भावनाएं दशकों और सदियों से निवेश के फैसलों को प्रभावित करती रही हैं। यही वजह है कि इतिहास निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने का एक अहम नजरिया देता है।
क्यों पढ़ना चाहिए इतिहास?
ओकलैन कैपिटल के कुंतल शाह के मुताबिक, इतिहास पढ़ने से निवेशक यह समझ पाते हैं कि कोई भी संकट स्थायी नहीं होता और न उतना भयावह होता है, जितना उस समय दिखाई देता है। उन्होंने महामारियों का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले करीब एक हजार वर्षों में 18-19 वैश्विक महामारियां दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है। संकट के दौरान लोग खर्च टाल देते हैं, लेकिन संकट खत्म होने के बाद मांग फिर लौटती है। यानी कई बार खपत टलती है, पूरी तरह खत्म नहीं होती।
कोविड से भी मिली बड़ी सीख
कोरोना महामारी के दौरान दुनियाभर के बाजारों में तेज गिरावट आई थी। उस समय कई निवेशकों ने घबराकर अच्छी कंपनियों के शेयर भी बेच दिए। इतिहास की समझ होती, तो तस्वीर कुछ अलग दिख सकती थी। पिछली महामारियों का रिकॉर्ड बताता है कि अस्थायी मांग में गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि किसी कंपनी या पूरी अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो गई। यही फर्क निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। किसी संकट से कारोबार की कमाई कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है, लेकिन अगर कंपनी की बुनियादी ताकत और उसकी उत्पादक क्षमता कायम है तो लंबी अवधि में रिकवरी की गुंजाइश बनी रहती है।
इंसानी फितरत ज्यादा नहीं बदली
शाह के मुताबिक बाजार को चलाने वाले कारण समय के साथ बदल सकते हैं। कभी तकनीक बड़ा कारण बनती है, कभी ब्याज दरें, कभी सरकारी नीतियां और कभी अचानक आई वैश्विक घटनाएं। लेकिन इन घटनाओं पर निवेशकों की प्रतिक्रिया काफी हद तक एक जैसी रहती है। तेजी के दौर में लालच बढ़ता है और निवेशक ज्यादा कीमत देने को तैयार हो जाते हैं। गिरावट में डर हावी होता है और कई बार लोग अच्छी संपत्तियां भी सस्ते में बेच देते हैं। यही व्यवहार अलग-अलग दौर में बार-बार देखने को मिला है। इसलिए इतिहास निवेशकों को सिर्फ पुरानी घटनाओं की जानकारी नहीं देता, बल्कि यह समझने में मदद करता है कि बाजार में लोग कैसे व्यवहार करते हैं।
बाजार बदलता है, व्यवहार नहीं
आज निवेशकों के पास पहले से कहीं ज्यादा डेटा है। रियल टाइम कीमतें, तकनीकी संकेतक, कमाई के आंकड़े और डिजिटल प्लेटफॉर्म फैसले लेना आसान बनाते हैं। लेकिन इतनी जानकारी के बावजूद भावनात्मक गलतियां खत्म नहीं हुई हैं। यही कारण है कि इतिहास को निवेश की पढ़ाई का जरूरी हिस्सा माना जाना चाहिए। इतिहास निवेशक को धैर्य देता है, संदर्भ देता है और यह समझने में मदद करता है कि अस्थायी गिरावट और स्थायी नुकसान में फर्क क्या है।
एक्सपर्ट व्यू: यह निवेश संबंधी सामग्री ओकलैन कैपिटल के कुंतल शाह के विचारों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं और इन्हें किसी शेयर या निवेश उत्पाद को खरीदने या बेचने की सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
