Tarun Tejpal Rape Case: रेप मामले में तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को उन्हें 2013 के दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा काटने के लिए दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तेजपाल की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2013 के दुष्कर्म मामले में आत्मसमर्पण से राहत का अनुरोध किया था।
सरेन्डर सर्टिफिकेट के बाद सुनवाई
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने की। पीठ ने तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि 62 वर्षीय तेजपाल को अपनी अपील की सुनवाई के लिए आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि तेजपाल की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर तभी सुनवाई की जाएगी, जब वह आत्मसमर्पण कर सरेन्डर सर्टिफिकेट दाखिल करेंगे।
तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने दलील दी कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 के मामले में 6 अगस्त के अपने फैसले में तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए पहले ही चार सप्ताह का समय दिया है। हालांकि, गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब तक 62 वर्षीय तेजपाल जेल में आत्मसमर्पण नहीं करते या उन्हें आत्मसमर्पण से छूट नहीं मिलती, तब तक उनकी अपील पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
अपील पर गुण-दोष के आधार पर होगा विचार
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और सरेन्डर सर्टिफिकेट दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद उनकी अपील पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा। पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'अपीलकर्ता दो सप्ताह की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करें और अपना सरेन्डर सर्टिफिकेट दाखिल करें। यदि सरेन्डर सर्टिफिकेट 22 सितंबर या उससे पहले दाखिल कर दिया जाता है, तो कार्यालय इस मामले को 22 सितंबर को अदालत के समक्ष सूचीबद्ध करे।'
