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ऐसी क्या बेरुखी जनाब: तीन दिन होटल में रहे लेकिन नहीं ली भारत की मदद, खुद के प्लेन से रवाना जस्टिन ट्रूडो

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 12, 2023, 08:21 PM IST

Justin Trudeau: जस्टिन ट्रूडो को भारत सरकार की ओर से तत्काल वापसी के लिए एयर इंडिया वन की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया था। खबर है कि वह खुद के प्लेन से कनाडा के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह दिल्ली के ललित होटल में रुके रहे।

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जस्टिन ट्रूडो कनाडा के लिए रवाना

Photo : BCCL

Justin Trudeau: जी-20 समिट में हिस्सा लेने भारत पहुंचे कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो आखिरकार अपने मुल्क कनाडा के लिए रवाना हो चुके हैं। समिट खत्म होने के बाद तीन दिन तक वह दिल्ली स्थित होटल में ही रुके हुए थे। उनके साथ उनका 16 वर्षीय बेटा भी था। बता दें, ट्रूडो को रविवार की रात को ही कनाडा के लिए प्रस्थान करना था, लेकिन रुटीन जांच के दौरान उनके प्लेन में तकनीकी खराबी पाई गई थी, जिसके बाद कनाडाई सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें उड़ान भरने से रोक दिया था।

अब सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि जस्टिन ट्रूडो को भारत सरकार की ओर से तत्काल वापसी के लिए एयर इंडिया वन की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि सोमवार को भारत के आधिकारिक विमान से ट्रूडो और उनके प्रतिनिधिमंडल की वापसी की पेशकश की गई थी।

कनाडा से मंगाया गया था दूसरा प्लेन

रविवार रात को कनाडा के प्रधानमंत्री के विमान में आई तकनीकी खराबी के बाद जब अगली सुबह तक विमान सही नहीं हुआ तो कनाडा से बैकअप प्लेन को मंगाया गया। हालांकि, दूसरे विमान के भारत पहुंचने से पहले ही उनका विमान ठीक हो गया, जिसके बाद उसी विमान से जस्टिन ट्रूडो और उनका प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को कनाडा के लिए रवाना हो गया।

भारत सरकार से नहीं हुई कोई बातचीत

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ट्रूडो तीन दिनों तक होटल ललित में ही रुके रहे। इस दौरान जब उन्होंने भारत सरकार की पेशकर को ठुकरा दिया तो भारत सरकार ने भी उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। विदेश मंत्रालय के सूत्रो की ओर से भ्ज्ञी कहा गया है कि ट्रूडो की ओर से इस दौरान भारत सरकार से कोई अनुरोध नहीं किया गया था।

खालिस्तान के कारण रिश्तों में आई है कड़वाहट

दरअसल, कनाडा में खालिस्तान की भारत विरोधी गतिविधियों के कारण दोनों देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रूडो के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा देने के लिए ट्रूडो सरकार की जमकर आलोचना की थी। पीएम मोदी ने सख्त लहजे में कहा था कि वे कनाडा में अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं और भारतीय राजनयिको के खिलाफ हिंसा को हवा देने का काम कर रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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