देहरादून के सेलाकुई इलाके में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले को उत्तराखंड सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में इस तरह की घटनाएं किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने दो टूक कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नस्लीय टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
यह घटना 9 दिसंबर की शाम की है, जब जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में MBA फाइनल ईयर का छात्र एंजेल चकमा अपने भाई माइकल चकमा के साथ सेलाकुई बाजार गया था। आरोप है कि वहां कुछ स्थानीय युवकों ने उनके चेहरे और भाषा को लेकर नस्लीय टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और बात हिंसा तक पहुंच गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अंजेल चकमा ने कहा, "हम चीनी नहीं हैं। हम भारतीय हैं। इसे साबित करने के लिए हमें कौन सा प्रमाण पत्र दिखाना चाहिए?" इसके कुछ ही मिनट बाद उन छह लोगों ने कथित तौर पर क्रूर हिंसा का सहारा लिया।
बेरहमी से हमला, 15 दिन तक मौत से जंग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपियों ने दोनों भाइयों पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया। एंजेल को गंभीर चोटें आईं और उसे नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब 15 दिनों तक चले इलाज के बावजूद वह जिंदगी की जंग हार गया।
पांच आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें दो नाबालिग शामिल हैं, जिन्हें सुधार गृह भेज दिया गया है। तीन अन्य आरोपियों को जेल भेजा गया है।
वहीं, एक आरोपी अब भी फरार है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
नेपाल भेजी गई पुलिस टीम
पुलिस जांच में सामने आया है कि फरार आरोपी नेपाल का निवासी है। उसे पकड़ने के लिए उत्तराखंड पुलिस की एक विशेष टीम नेपाल भी भेजी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सीएम धामी ने जताई चिंता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड शांति और सौहार्द का राज्य है और यहां किसी भी तरह की नस्लीय हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित की जाए।
छात्र समुदाय में गुस्सा
एंजेल चकमा की मौत के बाद छात्र समुदाय और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़े संगठनों में गहरा आक्रोश है। देहरादून में कैंडल मार्च निकालकर दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की गई। लोगों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक छात्र की हत्या का नहीं, बल्कि नस्लीय मानसिकता के खिलाफ कड़ा संदेश देने का है। यह मामला अब राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द की बड़ी परीक्षा बन गया है, जिस पर सरकार और पुलिस की अगली कार्रवाई सबकी नजरों में है।
