भारत में जब भरोसे, कॉरपोरेट गवर्नेंस और समाजसेवा की बात होती है, तो TATA GROUP का नाम सबसे पहले आता है। 1868 में शुरू हुआ यह समूह आज दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करता है। इसके कारोबार में आईटी, ऑटो, स्टील, होटल, एयरलाइंस, रिटेल, पावर और सेमीकंडक्टर जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
टाटा समूह 100 से ज्यादा कुल कंपनियों के साथ देश का सबसे बड़ा उद्योग घराना है। इसकी सबसे बड़ी 26 लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब 300 अरब डॉलर है। इतनी बड़ी कारोबारी ताकत की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका नियंत्रण किसी एक कारोबारी परिवार या एक व्यक्ति के पास नहीं है। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स में करीब 66% हिस्सेदारी परोपकारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है।
टाटा सन्स ही क्यों है सबसे अहम?
टाटा सन्स पूरे टाटा समूह का कोर है। यह समूह की प्रमुख निवेश और होल्डिंग कंपनी है। टाटा की सभी बड़ी कंपनियों की प्रमोटर है। TCS, TATA Motors, Tata Steel, Titan, Tata Power और दूसरे कारोबार अलग-अलग कंपनियों के रूप में काम करते हैं। इनका अपना बोर्ड और अपना प्रबंधन होता है। टाटा सन्स हर कंपनी का रोज का काम नहीं चलाती, लेकिन समूह की बड़ी रणनीति और मालिकाना ढांचे में इसकी भूमिका बेहद अहम है। यानी आसान भाषा में कहें, तो टाटा सन्स के पास समूह की चाबी है, जबकि अलग-अलग टाटा कंपनियां अपने-अपने कारोबार चलाती हैं।
टाटा सन्स कौन चलाता है?
टाटा समूह की सबसे अनोखी बात उसका मालिकाना ढांचा है। टाटा सन्स जहां पूरे टाटा समूह को चलाती है। वहीं, टाटा सन्स को कई परोपकारी ट्रस्ट चलाते हैं। इनमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट प्रमुख हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास मौजूद यह हिस्सेदारी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं है।
यही वजह है कि टाटा का बिजनेस मॉडल दूसरे बड़े कारोबारी घरानों से अलग दिखाई देता है।
पैसा टाटा से ट्रस्ट तक कैसे पहुंचता है?
टाटा समूह की कंपनियां कारोबार करती हैं और मुनाफा कमाती हैं। वे अपने शेयरधारकों को लाभांश देती हैं। टाटा सन्स को अपनी हिस्सेदारी के आधार पर इन कंपनियों से लाभांश मिलता है। टाटा सन्स की 66% हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास होने की वजह से ट्रस्ट्स को टाटा सन्स से मिलने वाले लाभांश और दूसरे रिटर्न का लाभ मिलता है। टाटा के ये ट्रस्ट टाटा मेमोरियल सेंटर, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च जैसे संस्थानों को चलाते हैं।
कैसे काम करता है टाटा ग्रुप
फिलहाल क्या है विवाद?
टाटा समूह को नियंत्रित करने वाली कंपनी टाटा सन्स के साथ ही सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट पर नियंत्रण को लेकर खींचतान चल रही है। फिलहाल, अगस्त 2026 में टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया। जबकि, कंपनी को कंट्रोल करने वाले दोनों ट्रस्ट ने चंद्रशेखन को 5 साल और चेयरमैन बने रहने की मंजूरी दी थी। लेकिन, ट्रस्ट के कुछ सदस्य इससे सहमत नहीं थे, जिसकी वजह से उन्होंने पीछे हटने का फैसला लिया है।
टाटा सन्स की लिस्टिंग पर भी बवाल
टाटा सन्स से जुड़ा एक और बड़ा मुद्दा शेयर बाजार में लिस्टिंग का है। भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा सन्स को अपर लेयर NBFC की श्रेणी में रखा था। इस वजह से उसकी संभावित लिस्टिंग लंबे समय से चर्चा में रही है। लेकिन टाटा सन्स ने अपने कर्ज चुकाने और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में अपनी स्थिति बदलने की दिशा में कदम उठाए हैं। टाटा सन्स में बड़ी हिस्सेदार और टाटा के प्रमुख ट्रस्टों में अहम भूमिका रखने वाला SP ग्रुप भी चाहता है कि टाटा सन्स को लिस्ट किया जाए, ताकि उनकी हिस्सेदारी के वैल्यूएशन को अनलॉक किया जा सके। लेकिन, टाटा समूह खासतौर पर नोएल टाटा चाहते हैं कि टाटा सन्स एक प्राइवेट कंपनी बनी रहे।
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