Goa Revolution Day 2026: 18 जून 1946 के दिन ही डॉ. राम मनोहर लोहिया और डॉ. जूलियाओ मेनेजेस ने पुर्तगाली शासन के खिलाफ एक जन आंदोलन की शुरुआत की थी, जिसने गोवा की आजादी और स्वशासन की नींव रखी। इस खास मौके पर उन सभी शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनके साहस से गोवा को मुक्ति मिली। कार्यक्रम में 18 जून की क्रांति के महत्व को याद करते हुए, 1946 के आंदोलन से लेकर 'विकसित गोवा 2037' के सपने तक के सफर पर चर्चा की गई।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने 18 जून को गोवा (Goa Kranti Diwas) के इतिहास में एक निर्णायक क्षण बताया और पुर्तगाली शासन के खिलाफ लोगों को एकजुट करने में डॉ. राम मनोहर लोहिया और डॉ. जूलियाओ मेनेजेस द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व ने ही लोगों के भीतर आजादी की अलख जगाई थी।
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शहीदों के बलिदान के कारण गोवा एक प्रगतिशील राज्य-सीएम सावंत
मुख्यमंत्री सावंत ने कहा कि शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की वजह से ही गोवा एक समृद्ध और प्रगतिशील राज्य के रूप में उभर पाया है। उन्होंने बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), शिक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और जन कल्याण के क्षेत्र में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार अंत्योदय, सर्वोदय और ग्रामोदय के सिद्धांतों पर काम कर रही है।
'विकसित गोवा 2037'
सीएम डॉ प्रमोद सावंत ने 'विकसित भारत 2047' की तर्ज पर 'विकसित गोवा 2037' के सपने को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर प्रयास करने की अपील की। इस कार्यक्रम में गोवा के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े व्यक्तियों और संस्थानों को सम्मानित भी किया गया। महाराष्ट्र के चंद्रपुर के शहीद बाबूराव थोरात के पुत्र विजय थोरात को उनके पिता के बलिदान के सम्मान में ₹10 लाख का चेक और एक प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के 27 वंशजों को नियुक्ति पत्र भी वितरित किए गए।
