TMC Symbol Row: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई है और उसे फिलहाल के लिए फ्रीज कर दिया है।
EC के फैसले को चुनौती
ममता बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग के नाम-निशान को फ्रीज करने वाले फैसले को चुनौती दी। याचिका को 21 सितंबर, सोमवार को तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन किए जाने की संभावना है।
उपचुनाव से पहले ममता को लगा डबल झटका
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले ममता बनर्जी को डबल झटका लगा है। एक तो चुनाव आयोग ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया। वहीं, दूसरी तरफ ममता खेमे की नंदीग्राम से उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार दोपहर सुवेंदु अधिकारी से अचानक मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। हालांकि, बाद में ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर कांग्रेस को अपना समर्थन दिया।
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दोनों गुट को मिले अलग नाम-निशान
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट और अरूप रॉय/ऋतब्रत बनर्जी गुट दोनों को ही अलग-अलग नाम और चुनावी चिह्न आवंटित किया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम आवंटित किया गया। इस गुट को 'फुटबॉल प्लेयर' चुनाव चिह्न दिया गया, जबकि अरूप रॉय/ऋतब्रत बनर्जी वाले गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।
