रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षाओं के जरिए नियुक्त उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त करने पर लगी रोक को शुक्रवार को आगे बढ़ा दिया। अदालत ने साथ ही JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CID जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया है।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि CID की विशेष जांच टीम (SIT) की ओर से पूछताछ के लिए बुलाए गए किसी उम्मीदवार को यदि जांच के दौरान उत्पीड़न की शिकायत है, तो वह जस्टिस गौतम कुमार चौधरी (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष अपनी शिकायत रख सकता है।
2,700 कर्मचारियों की नौकरी पर पड़ा था असर
राज्य सरकार ने 18 अगस्त को एक अधिसूचना जारी कर JPSC और JSSC परीक्षाओं से संबंधित नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। इस फैसले का असर सरकारी सेवाओं में काम कर रहे कई सफल उम्मीदवारों पर पड़ा था। अधिसूचना के बाद करीब 2,700 सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो गई थीं।
हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि JPSC और JSSC की नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना हो सकती है और कुछ लोगों ने गलत तरीके से सरकारी नौकरी हासिल की हो सकती है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि सभी नियुक्तियां अवैध नहीं मानी जा सकतीं और एक ही आदेश के जरिए सभी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करना उचित नहीं है।
राज्य सरकार ने शुक्रवार को मामले में अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल किया, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर ले लिया। अब मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
20 अगस्त को लगी थी नियुक्तियां रद्द करने पर रोक
हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को सरकार की उन अधिसूचनाओं के अमल पर रोक लगा दी थी, जिनके जरिए 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियां रद्द की गई थीं। अदालत ने फूड सेफ्टी अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर भी रोक लगाई थी।
अंतरिम आदेश के बाद प्रभावित उम्मीदवारों को अपने-अपने पदों पर काम जारी रखने की अनुमति मिल गई थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया था कि जांच में यदि कोई उम्मीदवार गलत तरीके से नियुक्ति पाने का दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने और मामले की कार्यवाही के परिणाम के आधार पर उसकी सेवा समाप्त भी की जा सकती है।
सरकार से मांगा गया था जवाब
15 सितंबर को हाईकोर्ट ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर राज्य सरकार को 18 सितंबर तक काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा था कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े इस मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जानी जरूरी है।
रमेश उरांव और अन्य ने नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले कई अभ्यर्थियों का रोजगार इस फैसले से प्रभावित हो रहा है। राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की चल रही जांच के आधार पर 18 अगस्त को नियुक्तियां रद्द करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की थीं। इस मामले की जांच CID की विशेष जांच टीम कर रही है।
