समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि राम मंदिर चंदा चोरी की जांच में 'बड़े नामों को छोड़ दिया गया' और आम कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया। यादव के ये आरोप राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के नाम से जारी 9 पन्नों के उस पत्र के बाद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र पर निशाना साधा था। इस पत्र में अयोध्या राम मंदिर निर्माण के दौरान प्रशासनिक नियंत्रण और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर गहरे आंतरिक मतभेदों का जिक्र किया गया था।
पत्र में राय ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि मिश्र का 'मंदिर निर्माण पर पूरा नियंत्रण' था। पत्र में कहा गया है कि मिश्र 'खुद को सभी फैसलों के लिए मुख्य अधिकारी मानते थे' और उनकी मंजूरी के बिना कोई काम आगे नहीं बढ़ता था।
मंदिर बोर्ड के भीतर पक्षपात के गंभीर आरोप भी लगे। राय ने निर्माण समिति में मिश्र की पसंद के लोगों को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई और दावा किया कि चुने गए कुछ सदस्य शायद ही कभी अयोध्या आते थे और उन्होंने परियोजना में कोई खास योगदान नहीं दिया।
'BJP के दिमाग पर लालच हावी है, गरीबों की ज़मीन हड़प ली गई है'
अखिलेश यादव ने अपने बयान में पूछा, 'जब नई चीज़ें होती हैं, तो क्या हम अतीत की घटनाओं को भूल जाते हैं?' उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी के लिए जिम्मेदार बड़े नामों को बचाने के लिए आम कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि 'BJP के दिमाग पर लालच हावी है, गरीबों की ज़मीन हड़प ली गई है।'
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसी चोरी दोबारा नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट ने संगठन के नए CEO का चयन किया है। तीन नामों की शॉर्टलिस्ट में से पूर्व IAF अधिकारी जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर का CEO चुना गया।
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आरोपी अपनी जेबों, जूतों और कपड़ों में नकद पैसे छिपाते हुए पकड़े गए
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में 5,585 आवेदनों पर विचार करने के बाद दो पैनल सदस्यों और महासचिव के नामों को भी अंतिम रूप दिया गया। यह बैठक चढ़ावे की कथित चोरी और मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के इस्तीफे से जुड़े विवाद के बीच हुई। बैठक राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास, मणिरामदास छावनी में हुई। इस साल की शुरुआत में राम मंदिर में मिले नकद चढ़ावे और दान की हेराफेरी को लेकर 'चंदा चोरी' का विवाद खड़ा हुआ था। मंदिर के सुरक्षित दान-गिनती वाले कमरों के CCTV फुटेज से इस चोरी का पता चला। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में सामने आया कि नकद दान की गिनती के लिए अधिकृत लोग सुनियोजित तरीके से पैसे की हेराफेरी कर रहे थे। गिनती के दौरान आरोपी अपनी जेबों, जूतों और कपड़ों में नकद पैसे छिपाते हुए पकड़े गए।
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चंपत राय को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा
शुरुआती खुलासों के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने तुरंत बड़ी कार्रवाई की; कई जगहों पर हाई-प्रोफाइल छापे मारे गए और 8 मुख्य आरोपियों के घरों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी मात्रा में नकद बरामद हुआ। इस जांच के कारण बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल भी हुआ। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के हाई-प्रोफाइल महासचिव चंपत राय को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा और जांच के दौरान उन्होंने शुरुआत में अपना पद छोड़ दिया था।
