World Sickle Cell Day: हर साल 19 जून को वर्ल्ड सिकल सेल डे मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को सिकल सेल से जुड़ी बीमारी के बारे में जागरूक करना है। अक्सर जब किसी की रिपोर्ट में सिकल सेल ट्रेट या सिकल सेल डिजीज लिखा आता है, तो लोग घबरा जाते हैं। उन्हें लगता है कि दोनों एक ही चीज हैं और दोनों ही खतरनाक हैं। लेकिन सच यह है कि सिकल सेल ट्रेट और सिकल सेल डिजीज में काफी फर्क होता है।
फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में रक्त संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉ. प्रावस चंद्र मिश्रा के मुताबिक, सिकल सेल ट्रेट कोई बीमारी नहीं है, जबकि सिकल सेल डिजीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। इसलिए दोनों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है।
सिकल सेल ट्रेट क्या होता है
सिकल सेल ट्रेट तब होता है जब बच्चे को माता-पिता में से किसी एक से सिकल सेल वाला जीन मिलता है। ऐसे लोगों में आमतौर पर बीमारी के लक्षण नहीं दिखाई देते और वे सामान्य जीवन जीते हैं।
डॉ. प्रावस बताते हैं कि कई लोगों को पूरी जिंदगी यह पता भी नहीं चलता कि उन्हें सिकल सेल ट्रेट है। यह स्थिति ज्यादातर मामलों में किसी परेशानी का कारण नहीं बनती, लेकिन यह जीन आगे बच्चों में जा सकता है।
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सिकल सेल डिजीज क्या होती है
सिकल सेल डिजीज तब होती है जब माता और पिता दोनों से सिकल सेल वाला जीन बच्चे को मिलता है। इस स्थिति में खून की कोशिकाएं ठीक तरह से काम नहीं कर पातीं, जिससे शरीर में कई तरह की दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।
ऐसे लोगों को बार-बार दर्द होना, कमजोरी महसूस होना, जल्दी थक जाना और संक्रमण का खतरा बढ़ जाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मरीजों को नियमित इलाज और डॉक्टर की निगरानी की जरूरत पड़ती है।
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दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है
सरल भाषा में कहें तो सिकल सेल ट्रेट केवल जीन से जुड़ी एक स्थिति है, जबकि सिकल सेल डिजीज एक वास्तविक बीमारी है। सिकल सेल ट्रेट वाले लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं और उन्हें अक्सर किसी विशेष इलाज की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं सिकल सेल डिजीज वाले लोगों को जीवनभर स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कौन सी स्थिति ज्यादा गंभीर है
डॉक्टरों के अनुसार सिकल सेल डिजीज ज्यादा गंभीर स्थिति है। इसमें शरीर के कई हिस्सों पर असर पड़ सकता है और समय-समय पर इलाज की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर, सिकल सेल ट्रेट वाले ज्यादातर लोगों को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं होती। इसलिए ट्रेट और डिजीज को एक जैसा समझना सही नहीं है।
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं
डॉ. प्रावस का कहना है कि जिन परिवारों में सिकल सेल का इतिहास रहा है, उन्हें शादी या परिवार बढ़ाने से पहले जांच कराने पर विचार करना चाहिए। इससे यह पता चल सकता है कि व्यक्ति सिकल सेल ट्रेट का वाहक है या नहीं।व समय पर जांच और सही जानकारी से भविष्य में होने वाली परेशानियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात
सिकल सेल ट्रेट और सिकल सेल डिजीज सुनने में भले ही एक जैसी लगें, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। सिकल सेल ट्रेट आमतौर पर कोई गंभीर समस्या नहीं बनता, जबकि सिकल सेल डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें लगातार देखभाल और इलाज की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए घबराने की बजाय सही जानकारी लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।
