Guru Ashlesha Nakshatra 3rd Pada Gochar 2026: देवगुरु बृहस्पति 20 सितंबर 2026 की सुबह 8 बजकर 53 मिनट पर अश्लेषा नक्षत्र के तृतीय पद में गोचर कर चुके हैं। गुरु इस दौरान कर्क राशि में ही मौजूद हैं और 8 अक्टूबर 2026 की शाम 7 बजकर 3 मिनट तक अश्लेषा के तीसरे पद में रहेंगे। इसके बाद वे अश्लेषा के चौथे पद में प्रवेश करेंगे।
इस गोचर को सिर्फ नक्षत्र परिवर्तन मानना सही नहीं होगा। गुरु इस समय कर्क राशि में उच्च के हैं। जिस नक्षत्र में वे पहुंचे हैं, उसका स्वामी बुध है और 20 सितंबर को बुध भी कन्या राशि में मजबूत स्थिति में मौजूद हैं। दूसरी तरफ अश्लेषा का तीसरा पद कुंभ नवांश से जुड़ा है, जिसका स्वामी शनि है। इस तरह गुरु के फल में गुरु की उच्च राशि, बुध की विश्लेषणात्मक शक्ति और शनि की अनुशासन वाली ऊर्जा एक साथ जुड़ रही है।
अश्लेषा का स्वभाव गहराई में जाकर किसी विषय को समझने, छिपे हुए पहलुओं को पकड़ने और रणनीति के साथ आगे बढ़ने वाला माना जाता है। तीसरे पद में कुंभ नवांश आने के कारण यह ऊर्जा रिसर्च, तकनीक, नेटवर्क, सिस्टम और लंबे समय की योजना की तरफ झुकती है। गुरु का यह चरण केवल अचानक धन या भाग्य का नहीं, बल्कि किसी काम की मजबूत रणनीति तैयार करके उसका लाभ लेने का समय ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि किन राशि वालों के लिए यह गोचर सबसे ज्यादा शुभ रहने वाला है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि से कर्क दूसरा भाव है। ज्योतिष में दूसरा भाव धन, बचत, परिवार, वाणी और कुटुंब से जुड़ा माना जाता है। गुरु का यहां उच्च स्थिति में होना आर्थिक मामलों के लिए इस गोचर को महत्वपूर्ण बना देता है। नौकरी करने वाले लोगों की आय बढ़ाने से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ सकती है। सैलरी, इंसेंटिव, अतिरिक्त कमाई या आय के दूसरे स्रोत पर काम शुरू हो सकता है। बिजनेस करने वालों को पुराने ग्राहकों, परिवार के संपर्कों या अपने नेटवर्क के जरिए नया काम मिल सकता है।
गुरु जिस अश्लेषा नक्षत्र में हैं उसके स्वामी बुध हैं और बुध स्वयं कन्या में मजबूत हैं। यही वजह है कि मिथुन राशि वालों के लिए कम्युनिकेशन, अकाउंटिंग, ट्रेडिंग, डेटा, मीडिया, सेल्स और डिजिटल काम से जुड़े आर्थिक अवसर ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। बातचीत में भी असर बढ़ेगा। सही समय पर कही गई बात कोई अटका हुआ काम आगे बढ़ा सकती है।
कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर सीधा उनकी राशि पर पड़ रहा है। गुरु कर्क में उच्च के हैं और अश्लेषा के तीसरे पद में प्रवेश कर चुके हैं। इससे आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और जीवन की दिशा से जुड़े विषय सक्रिय हो सकते हैं। करियर में किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का मौका मिल सकता है। जो लोग लंबे समय से किसी निर्णय को लेकर असमंजस में थे, उन्हें रास्ता साफ दिखाई देने लगेगा। बिजनेस में भी विस्तार की योजना बन सकती है। परिवार, घर, प्रॉपर्टी और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है। हालांकि यहां एक सावधानी भी है। गुरु की शक्ति बढ़ने के साथ व्यक्ति अपनी सोच को लेकर जरूरत से ज्यादा आश्वस्त हो सकता है। महत्वपूर्ण निर्णयों में सलाह लेना और तथ्यों को जांचना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि से कर्क 11वां भाव है। 11वां भाव आय, लाभ, बड़े नेटवर्क, उपलब्धि और इच्छापूर्ति का प्रमुख भाव माना जाता है। गुरु का यहां होना और खुद नक्षत्र स्वामी बुध का कन्या में मजबूत होना इस गोचर की सबसे खास संरचनाओं में से एक है। नौकरी में प्रमोशन, सैलरी बढ़ने या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बन सकती है। बिजनेस में नए क्लाइंट और बड़े नेटवर्क से फायदा मिल सकता है।
पुराना निवेश, रुकी हुई पेमेंट या लंबे समय से प्रयास किया जा रहा कोई आर्थिक लक्ष्य आगे बढ़ सकता है। खास बात यह है कि इस दौरान फायदा केवल मेहनत से नहीं बल्कि सही लोगों से जुड़ने और सही समय पर सही निर्णय लेने से भी मिल सकता है। आईटी, बैंकिंग, अकाउंटिंग, मीडिया, कम्युनिकेशन, रिसर्च और कंसल्टिंग से जुड़े जातकों के लिए यह अवधि विशेष रूप से उपयोगी रह सकती है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए यह गुरु गोचर सबसे मजबूत स्थितियों में शामिल है। कर्क राशि आपके नवम भाव में आती है। नवम भाव भाग्य, उच्च शिक्षा, गुरु, धर्म, लंबी यात्रा और बड़े अवसरों का भाव है। इतना ही नहीं, कर्क में स्थित गुरु अपनी पंचम दृष्टि वृश्चिक राशि पर डालते हैं। यानी वृश्चिक राशि को नवम भाव में उच्च गुरु का गोचर और गुरु की सीधी पंचम दृष्टि दोनों का प्रभाव मिल रहा है।
यह स्थिति करियर में किसी बड़े अवसर का रास्ता खोल सकती है। वरिष्ठ व्यक्ति, गुरु या किसी अनुभवी अधिकारी की मदद मिल सकती है। उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, विदेश यात्रा या दूसरे शहर से जुड़े अवसर सामने आ सकते हैं। बिजनेस करने वाले लोगों के लिए भी किसी दूर के बाजार या बड़े संपर्क से फायदा मिलने की संभावना है। इस दौरान अचानक मिले किसी अवसर को केवल फायदे के नजरिए से नहीं बल्कि उसके भविष्य के प्रभाव को देखकर स्वीकार करना बेहतर रहेगा।
मकर राशि
मकर राशि से कर्क सातवां भाव है। सातवां भाव विवाह, बिजनेस पार्टनरशिप, पब्लिक डीलिंग, ग्राहक और बाजार से संबंधित होता है।
गुरु यहां उच्च स्थिति में हैं और कर्क से गुरु की सातवीं दृष्टि सीधे मकर राशि पर पड़ती है। मकर राशि के लिए यह स्थिति काफी प्रभावशाली है। कारोबार में नया पार्टनर, बड़ा क्लाइंट या कोई महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट सामने आ सकता है। जो लोग किसी कंपनी के साथ साझेदारी करना चाहते हैं, उन्हें भी फायदा मिल सकता है।
नौकरी करने वालों के लिए भी पब्लिक डीलिंग और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क बढ़ सकता है। विवाह योग्य जातकों के लिए रिश्ता आगे बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं। हालांकि अश्लेषा की प्रकृति को देखते हुए किसी भी पार्टनरशिप में शर्तों और डॉक्यूमेंट्स को अच्छी तरह पढ़ना जरूरी होगा। भरोसा रखें, लेकिन कागजी प्रक्रिया को नजरअंदाज न करें।
मीन राशि
मीन राशि से कर्क पांचवां भाव है। पंचम भाव शिक्षा, बुद्धि, प्रेम, संतान, क्रिएटिविटी और रणनीतिक सोच का प्रतिनिधित्व करता है।
गुरु खुद मीन राशि के स्वामी हैं और कर्क से अपनी नवम दृष्टि मीन राशि पर डाल रहे हैं। यानी पांचवें भाव में गुरु का गोचर और गुरु की सीधी दृष्टि—दोनों का संबंध बनता है। यह इस गोचर को मीन राशि के लिए विशेष बनाता है। छात्रों को पढ़ाई में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा, उच्च शिक्षा, रिसर्च और प्रोफेशनल कोर्स में सफलता के रास्ते खुल सकते हैं।
क्रिएटिव फील्ड में काम करने वालों को भी फायदा मिलेगा। लेखन, मीडिया, शिक्षा, डिजाइन, कंटेंट और सलाह देने वाले प्रोफेशन में कोई नया अवसर मिल सकता है। प्रेम संबंधों में भी भविष्य को लेकर गंभीर बातचीत शुरू हो सकती है। विवाह की दिशा में बढ़ रहे रिश्तों को परिवार का समर्थन मिलने के संकेत बन सकते हैं।
क्या मिलेगा फल
अगर गुरु सिर्फ कर्क राशि में होते तो हम मुख्य रूप से उनकी उच्च स्थिति को देखते हैं, लेकिन अब गुरु अश्लेषा नक्षत्र में हैं, जिसका स्वामी बुध है। 20 सितंबर को ग्रहों की स्थिति में बुध करीब 21° कन्या पर हैं और हस्त नक्षत्र में स्थित हैं। यानी गुरु के नक्षत्र स्वामी बुध स्वयं अपनी राशि में मजबूत हैं। इसका परिणाम यह है कि गुरु के फल में केवल विस्तार और ज्ञान नहीं, बल्कि गणना, कम्युनिकेशन, रिसर्च, विश्लेषण और व्यावहारिक निर्णय भी जुड़ जाते हैं। यानी आने वाला समय उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी होगा जो अवसर को सिर्फ पहचानते नहीं, बल्कि उसके पीछे का पूरा सिस्टम समझकर आगे बढ़ते हैं।
बदलेंगे गुरु के रिजल्ट्स
अश्लेषा का तीसरा पद कर्क 23°20′ से 26°40′ तक फैला है और इसका नवांश कुंभ है। कुंभ नवांश का स्वामी शनि है। इस वजह से गुरु के इस चरण में शनि का अनुशासन और सिस्टम वाला प्रभाव जुड़ता है। यही कारण है कि 20 सितंबर से 8 अक्टूबर तक का चरण सिर्फ नए अवसरों के पीछे भागने का नहीं है। पुराने सिस्टम को मजबूत करना, काम को व्यवस्थित करना, तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और लंबे समय का प्लान बनाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। रिसर्च, साइंस, टेक्नोलॉजी, साइबर, मेडिकल, मनोविज्ञान, डेटा और ऐसी फील्ड जहां किसी विषय की गहराई में जाना पड़ता है, वहां इस ज्योतिषीय ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
नक्षत्र स्वामी की स्थिति भी है अहम
नक्षत्र फल में नक्षत्र स्वामी की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यहां गुरु अश्लेषा में हैं और उसका स्वामी बुध है। उसी समय बुध कन्या में अपनी राशि में मजबूत हैं। इससे गुरु के नक्षत्रगत परिणामों को बुध का स्पष्ट और प्रैक्टिकल चरित्र मिल रहा है। यही वजह है कि इस अवधि में डॉक्यूमेंटेशन, अकाउंटिंग, बैंकिंग, लेखन, मीडिया, आईटी, रिसर्च, ट्रेडिंग और कंसल्टिंग से जुड़े काम तेजी पकड़ सकते हैं। जो व्यक्ति किसी नए काम की योजना बना रहा है, उसके लिए रिसर्च और डेटा जुटाने का काम बहुत महत्वपूर्ण रहेगा।
नौकरी करने वालों के लिए कैसा रहेगा समय
नौकरी में गुरु का यह चरण धीरे-धीरे लेकिन स्थायी बदलाव की तरफ ले जा सकता है। अचानक पद बदलने के बजाय नई जिम्मेदारी, नया प्रोजेक्ट या काम के स्वरूप में विस्तार दिखाई दे सकता है। कन्या और वृश्चिक राशि वालों के लिए प्रोफेशनल ग्रोथ के संकेत ज्यादा मजबूत हैं। मकर राशि वालों को नए क्लाइंट और पार्टनरशिप से फायदा मिल सकता है। कर्क राशि वालों के लिए खुद की प्रोफेशनल पहचान को मजबूत करने का समय है। मीन राशि वालों को अपनी शिक्षा या विशेषज्ञता का इस्तेमाल करियर में करने का अवसर मिल सकता है।
बिजनेस वालों के लिए क्या हैं संकेत
बिजनेस में यह गोचर स्मार्ट एक्सपेंशन का है। सिर्फ बिक्री बढ़ाने के बजाय अपने बिजनेस के सिस्टम को मजबूत करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। क्लाइंट डेटा, अकाउंट, पेमेंट सिस्टम, कॉन्ट्रैक्ट और मार्केटिंग स्ट्रेटजी को व्यवस्थित करने से भविष्य में फायदा मिलेगा। अश्लेषा के कारण किसी भी पार्टनरशिप, निवेश या डील के छिपे हुए पहलुओं को समझना जरूरी रहेगा। बड़ी डील को जल्दबाजी में अंतिम रूप देने के बजाय उसकी शर्तों की जांच करना बेहतर होगा।
स्टूडेंट्स के लिए खुलेंगे सफलता के रास्ते
मीन और वृश्चिक राशि के छात्रों के लिए यह समय विशेष रूप से उपयोगी रह सकता है। उच्च शिक्षा, रिसर्च, प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रोफेशनल कोर्स में प्रगति के संकेत हैं। कर्क राशि के छात्रों को भी अपनी दिशा तय करने में मदद मिल सकती है। कन्या राशि के विद्यार्थियों के लिए गुरु का 11वें भाव से गोचर परिणाम और उपलब्धि का संकेत देता है। इस समय सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ना जरूरी नहीं है। सही विषय, सही रणनीति और नियमित रिवीजन पर काम करने से ज्यादा फायदा होगा।
लव और मैरिज लाइफ के लिए क्या रहेगा असर
मीन राशि में गुरु की पंचम दृष्टि प्रेम संबंधों को सकारात्मक दिशा दे सकती है। मकर राशि में सातवें भाव का प्रभाव विवाह और पार्टनरशिप के मामलों को सक्रिय करेगा। कर्क राशि वालों के लिए गुरु अपनी राशि में होने से व्यक्तिगत जीवन में स्थिरता की इच्छा बढ़ सकती है। विवाह योग्य लोगों के लिए रिश्ते की बातचीत आगे बढ़ सकती है। अश्लेषा का प्रभाव रिश्तों में गहराई तो लाता है, लेकिन साथ में शक और जरूरत से ज्यादा सोचने की प्रवृत्ति भी बढ़ा सकता है। रिश्ते में अनुमान लगाने के बजाय सीधी बातचीत ज्यादा बेहतर रहेगी।
धन के मामले में किन राशियों को फायदा
आर्थिक दृष्टि से मिथुन और कन्या सबसे स्पष्ट रूप से लाभ की स्थिति में दिखाई देते हैं। मिथुन को दूसरे भाव से धन और बचत का, जबकि कन्या को 11वें भाव से आय और लाभ का समर्थन मिलता है। वृश्चिक को भाग्य और बड़े अवसरों से आर्थिक फायदा मिल सकता है। मकर को बिजनेस और पार्टनरशिप के जरिए लाभ मिलने की संभावना है। मीन को शिक्षा, प्रतिभा और क्रिएटिव काम से कमाई का रास्ता मिल सकता है। कर्क राशि को आर्थिक निर्णयों में अवसर तो मिलेंगे, लेकिन बड़ी राशि लगाने से पहले पूरी जांच करना ज्यादा जरूरी रहेगा।
किन राशियों को सावधानी रखनी होगी
मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन परिणाम मिश्रित रह सकते हैं। धनु राशि के लिए गुरु आठवें भाव में हैं, इसलिए अचानक परिस्थितियों, साझा धन और निवेश के मामलों में सावधानी जरूरी होगी। सिंह राशि वालों को खर्च और भविष्य की योजनाओं के बीच संतुलन रखना होगा। तुला राशि वालों को करियर और घर-परिवार के बीच तालमेल बैठाना पड़ेगा। कुंभ राशि वालों के लिए प्रतिस्पर्धा और काम का दबाव बढ़ सकता है। वृषभ को प्रयासों में धैर्य रखना होगा और मेष राशि वालों को घर-परिवार तथा भावनात्मक निर्णयों में संतुलन रखना चाहिए। इन राशियों के लिए इसका अर्थ कोई निश्चित नकारात्मक घटना नहीं है। जन्मकुंडली में गुरु की स्थिति और वर्तमान दशा परिणाम को काफी बदल सकती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
