क्या सोच में सकारात्मक बदलाव आपकी उम्र बढ़ा सकता है? चिकित्सा विज्ञान लंबे समय से दिल और दिमाग के बीच के गहरे संबंध का अध्ययन करता रहा है। अमेरिका के प्रसिद्ध कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने बताया है कि किस तरह आपकी सोच, दृष्टिकोण और जीवन के प्रति नजरिया आपक सेहत को सीधे प्रभावित करता है।
सकारात्मक सोच का सेहत से संबंध
डॉ. जेरेमी लंदन का कहना है कि हमारी मानसिक स्थिति का सीधा असर हमारे शरीर के अंगों, खासकर दिल पर पड़ता है। जब कोई लगातार तनाव, चिंता या नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है, तो उसका शरीर 'फाइट या फ्लाइट' मोड में रहता है। इससे शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल बढ़ जाता है। बीतते समय के साथ यह हाई ब्लड प्रेशर, क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन और दिल की बीमारियों का कारण बनता है।
इसके उलट, आशावादी लोगों में स्ट्रेस लेवल काफी कम होता है, जिससे उनका ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट कंट्रोल में रहता है।
सकारात्मकता से कैसे सुधरती है सेहत
डॉ. जेरेमी लंदन ने 4 दावों के साथ बताया है कि सकारात्मक सोच और आशावादी नजरिया हमारी सेहत के लिए वरदान क्यों है:
तनाव में तेजी से सुधार
आशावादी लोग जीवन में आने वाली चुनौतियों से जल्दी उबर जाते हैं। जब भी कोई प्रतिकूल परिस्थिति आती है, वे पैनिक करने के बजाय समाधान तलाशते हैं। इससे उनके हार्ट और वस्कुलर सिस्टम पर कम प्रेशर पड़ता है।
हेल्दी लाइफस्टाइल का चुनाव
रिसर्च बताते हैं कि सकारात्मक सोच रखने वाले लोग अपनी सेहत का बेहतर ख्याल रखते हैं। वे रेगुलर एक्सरसाइज करते हैं, बैलेंस्ड डाइट लेते हैं, समय पर सोते हैं और धूम्रपान या शराब जैसी नुकसानदेह चीजों से दूर रहने की कोशिश करते हैं।
मजबूत इम्यून सिस्टम
डॉ. लंदन के अनुसार, खुश रहने और उम्मीद से भरे रहने से शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कम स्ट्रेस लेने वाले लोगों का शरीर इंफेक्शंस और पुरानी बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कम जोखिम
कई कार्डियोलॉजी स्टडीज यह साबित कर चुकी हैं कि निराशावादी लोगों की तुलना में आशावादी लोगों को दिल का दौरा या स्ट्रोक आने का खतरा काफी कम होता है।
जीवन में आशावाद कैसे बढ़ाएं?
डॉ. जेरेमी लंदन का मानना है कि आशावाद कोई जन्मजात गुण नहीं है जिसे बदला न जा सके; इसे अभ्यास से विकसित किया जा सकता है। मेडिटेशन करना, अपनी सोच को नकारात्मक से सकारात्मक दिशा में मोड़ना और सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना इसमें मदद कर सकता है।
