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World Sickle Cell Day: सिकल सेल और एनीमिया में क्या फर्क है, कौन सी बीमारी ज्यादा खतरनाक हो सकती है

Sickle cell vs anemia: जैसा कि हम सभी जानते हैं सिकल सेल रोग और एनीमिया दोनों ही बीमारियां खून से जुड़ी हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कौन सी स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है? चलिए जानते हैं..

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आज जान लीजिए सिकल सेल और एनीमिया के बीच बड़ा फर्क

Sickle cell vs anemia: जब भी किसी को कमजोरी, चक्कर या जल्दी थकान महसूस होती है, लोग अक्सर कह देते हैं कि खून की कमी होगी। लेकिन खून से जुड़ी हर समस्या सिर्फ एनीमिया नहीं होती। एक बीमारी सिकल सेल भी है, जिसके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। यही वजह है कि हर साल 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस (World Sickle Cell Day) मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके।

यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की डॉ. परिनीता रेड्डी गुथा, क्लिनिकल डायरेक्टर और HOD (पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी और हेमेटोलॉजी) बताती हैं कि पहली नजर में सिकल सेल और एनीमिया दोनों एक जैसी लग सकती हैं, क्योंकि दोनों का संबंध खून से है। लेकिन असल में दोनों की वजह, असर और गंभीरता अलग होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क है और किस स्थिति में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

एनीमिया आखिर होता क्या है

डॉ. परिनीता के अनुसार एनीमिया का मतलब है शरीर में खून की कमी होना। यह कमी अक्सर सही पोषण न मिलने, आयरन की कमी, ज्यादा ब्लीडिंग या किसी दूसरी बीमारी की वजह से हो सकती है।

जब शरीर में पर्याप्त खून नहीं बनता तो व्यक्ति को हर समय थकान महसूस हो सकती है। सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना इसके आम लक्षण हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में सही खानपान और इलाज से एनीमिया को ठीक किया जा सकता है।

सिकल सेल बीमारी क्यों अलग है

सिकल सेल कोई सामान्य खून की कमी नहीं है। यह एक ऐसी बीमारी है जो परिवार से बच्चों तक पहुंच सकती है। इसमें खून की कुछ कोशिकाएं अपना सामान्य आकार छोड़कर टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं।

इनकी वजह से शरीर में खून का बहाव ठीक तरह से नहीं हो पाता। कई बार मरीज को अचानक तेज दर्द, बार-बार कमजोरी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

दोनों में सबसे बड़ा फर्क क्या है

एनीमिया में शरीर में खून कम हो जाता है, जबकि सिकल सेल में खून की कुछ कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं। यही वजह है कि एनीमिया और सिकल सेल को एक जैसी बीमारी नहीं माना जाता। सरल शब्दों में कहें तो हर सिकल सेल मरीज में खून की कमी हो सकती है, लेकिन हर एनीमिया मरीज को सिकल सेल नहीं होता।

कौन सी स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है

डॉ. परिनीता के अनुसार, सामान्य एनीमिया का इलाज अक्सर संभव होता है और मरीज सही देखभाल से पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। वहीं सिकल सेल एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। अगर समय पर इलाज और निगरानी न हो तो यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए गंभीर मामलों में सिकल सेल, सामान्य एनीमिया की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण और खतरनाक साबित हो सकती है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमजोरी, बार-बार चक्कर, जल्दी थकान या शरीर में बिना वजह दर्द की शिकायत रहती है, तो जांच करवाना जरूरी है। परिवार में पहले किसी को सिकल सेल की बीमारी रही हो तो भी जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।

निष्कर्ष

सिकल सेल और एनीमिया दोनों खून से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन दोनों एक जैसी नहीं हैं। एनीमिया अक्सर खानपान और इलाज से ठीक हो सकता है, जबकि सिकल सेल एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए लंबे समय तक देखभाल की जरूरत पड़ती है। इसलिए लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाय समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह लेना सबसे समझदारी भरा कदम है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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