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क्या प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में इंफेक्शन से बढ़ सकता है बच्चे में ऑटिज्म का खतरा? जानें क्या है एक्सपर्ट की राय

World Autism Awareness Day: प्रेगनेंसी के दौरान जरा सी लापरवाही भी बच्चे की सेहत के लिए भारी मुसीबत खड़ी कर सकती है। इसमें ही शामिल ऑटिज्म एक गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या है। जो प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में मां को हुए इंफेक्शन के कारण हो सकता है। आइए विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

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विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस

World Autism Awareness Day: गर्भावस्था का शुरुआती दौर यानी पहला और दूसरा ट्राइमेस्टर, शिशु के मस्तिष्क विकास के लिए बेहद संवेदनशील समय होता है। इस दौरान अगर मां को किसी तरह का संक्रमण (इंफेक्शन) हो जाए, तो उसका असर न सिर्फ मां के स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि यह भ्रूण के विकास को भी प्रभावित कर सकता है। हाल ही के कुछ वर्षों में कई हेल्थ शोधों ने यह साथ संकेत दिए हैं कि शुरुआती गर्भावस्था में होने वाले कुछ संक्रमण बच्चों में ऑटिज्म के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

हर साल विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2 अप्रैल का दिन हमें यह समझने का अवसर देता है कि ऑटिज्म सिर्फ जन्म के बाद की स्थिति नहीं, बल्कि इसकी जड़ें गर्भावस्था के दौरान भी जुड़ी हो सकती हैं। बच्चों से जुड़ी इस गंभीर समस्या को लेकर हमने बात की यशोदा हॉस्पिटल्स की बाल रोग विशेषज्ञ और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एन. वर्षा मोनिका रेड्डी से।

गर्भावस्था का संक्रमण कैसे करता है गर्भ में पल रहे बच्चे को प्रभावित?

जब गर्भवती महिला को किसी तरह का संक्रमण होता है, तो उसका शरीर उसे खत्म करने के लिए एक इम्यून प्रतिक्रिया देता है। इस प्रक्रिया को Maternal Immune Activation कहा जाता है। इसमें शरीर सूजन पैदा करने वाले तत्व (inflammatory molecules) रिलीज करता है, जो प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक असर डाल सकते हैं।

डॉ. एन. वर्षा मोनिका रेड्डी कहती हैं, कि यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि खतरा केवल संक्रमण से नहीं, बल्कि शरीर की इस इम्यून प्रतिक्रिया से ज्यादा जुड़ा होता है। यही शरीर को ठीक करने के लिए पैदा की गई सूजन भ्रूण के मस्तिष्क के विकास, न्यूरॉन बनने की प्रक्रिया और उनके आपसी कनेक्शन को प्रभावित कर सकती है।

कौन से संक्रमण हैं ज्यादा खतरनाक?

डॉ. रेड्डी के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह का संक्रमण मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी प्रभाव डालता है, लेकिन कुछ विशेष प्रकार के संक्रमण हैं, जो गर्भावस्था में होने पर बच्चे के लिए ऑटिज्म का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसमें रूबेला, फ्लू, हर्पीस, यूरिनरी ट्रैक्ट और जेनिटो-यूरिनरी बैक्टीरियल संक्रमण, टॉक्सोप्लाज्मोसिस जैसे संक्रमण शामिल हैं।

यदि इन इन्फेक्शन में से कोई भी इन्फेक्शन आपको गर्भावस्था की शुरुआत यानी पहले ट्राइमेस्टर में होता है, तो बच्चे को ऑटिज्म का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि इस दौरान बच्चे के दिमाग की संरचना का विकास हो रहा होता है।

कैसे करें बचाव

गर्भावस्था के दौरान कुछ आसान सावधानियां बरतकर आप बच्चे के लिए आने वाले जोखिम को कम कर सकती हैं।

  • समय पर वैक्सीनेशन कराएं।
  • साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखना।
  • अच्छी तरह पका हुआ और सुरक्षित भोजन करना।
  • नियमित एंटीनेटल चेकअप कराना।
  • किसी भी संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना।

क्या हर संक्रमण खतरनाक है?

डॉ. रेड्डी के अनुसार, यह जानना बेहद जरूरी है कि हर संक्रमण ऑटिज्म का कारण नहीं बनता है। और संक्रमण के अधिकांश मामलों में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जन्म लेते हैं। इसलिए घबराने की बजाय आपके लिए जागरूक रहना ज्यादा जरूरी है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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