Supreme Court: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस हिंसा की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (एचपीईसी) को महिला प्रदर्शनकारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने को कहा गया है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह स्पष्टीकरण उस समय दिया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिए जाने का अनुरोध किया।
प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की जांच होगी
गुप्ता ने पीठ से ऐसी व्यवस्था बनाने का भी अनुरोध किया जिसके जरिये कथित पीड़िताएं अपनी शिकायतें जांच के लिए सीधे भेज सकें। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करेगी।
उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह पारित आदेश के अनुसार 'समिति से इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और तत्काल अंतरिम रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।' न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि इसी मुद्दे पर एक अलग रिट याचिका भी दायर की गई है और उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति से इस मामले की जांच करने को कहा गया है।
नयी याचिका में 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिए जाने का अनुरोध किया गया है। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित कथित हमलों से जुड़ी खबरों और विवरणों का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने कहा कि आरोपों में एक महिला के निजी अंगों पर लाठी मारने की घटना भी शामिल है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, 'मैं अदालत से इन घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध कर रही हूं।' उन्होंने कथित यौन उत्पीड़न के मामलों की अलग से और प्राथमिकता के आधार पर जांच किए जाने का अनुरोध किया।
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा की जांच के लिए 20 अगस्त को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की थी।
