क्या सिर्फ Nifty और Sensex को देखकर भारतीय शेयर बाजार की दिशा समझी जा सकती है? फर्स्ट ग्लोबल की संस्थापक और दिग्गज निवेशक देविना मेहरा के मुताबिक बाजार की असली तस्वीर कई दूसरे संकेतों में छिपी है। उन्होंने निवेशकों को चार अहम फैक्टर, वैल्यूएशन, सेंटीमेंट, ग्लोबल पोजिशनिंग और मार्केट ब्रेड्थ के जरिये बाजार को देखने की सलाह दी है। इन संकेतों को साथ में देखने पर यह समझने में मदद मिलती है कि इंडेक्स के पीछे वास्तव में बाजार की स्थिति कैसी है।
वैल्यूएशन में छिपी है असली कहानी
देविना मेहरा के मुताबिक पूरे Market Valuation सिर्फ Nifty के एक आंकड़े से तय नहीं किया जा सकता। अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों की वैल्यूएशन स्थिति अलग होती है। कुछ हिस्से काफी महंगे हो सकते हैं, जबकि कुछ सेक्टर अब भी अपेक्षाकृत बेहतर वैल्यू दे सकते हैं। इसलिए निवेशकों को इंडेक्स के बजाय सेक्टर और स्टॉक लेवल पर तस्वीर समझनी चाहिए। निफ्टी का एक आंकड़ा पूरे बाजार की स्थिति का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।
सेंटीमेंट हमेशा सीधा संकेत नहीं देता
दूसरा अहम संकेत बाजार का सेंटीमेंट (India Vix) है। देविना के मुताबिक सेंटीमेंट को एक कॉन्ट्रा इंडिकेटर की तरह भी देखा जा सकता है। यानी जब बाजार में बहुत ज्यादा उत्साह हो, तब सावधानी जरूरी हो सकती है। वहीं अत्यधिक डर और निराशा कई बार बाजार में अवसर का संकेत भी बन सकती है। उनका कहना है कि सेंटीमेंट का मतलब किसी एक दिन निवेशक का मूड नहीं है, बल्कि पूरे बाजार में मौजूद सामूहिक भावना को समझना है। इतिहास में कई मौकों पर अत्यधिक उत्साह या घबराहट के बाद बाजार की दिशा ने बहुमत की उम्मीदों को उलट दिया है।
ग्लोबल पैसा भारत के बारे में क्या बता रहा?
भारतीय बाजार अब वैश्विक पूंजी से गहराई से जुड़ा हुआ है। विदेशी निवेशक और ग्लोबल फंड लगातार अलग-अलग उभरते बाजारों में पूंजी का आवंटन बदलते रहते हैं। ऐसे में केवल घरेलू खबरों को देखकर बाजार की दिशा समझना पर्याप्त नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि ग्लोबल फंड भारत को दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में किस तरह देख रहे हैं। विदेशी पूंजी का प्रवाह और देशों की इंडेक्स पोजिशनिंग भारत की रिलेटिव स्ट्रेथ के बारे में अहम संकेत दे सकती है।
निफ्टी मजबूत, लेकिन शेयरों में कमजोरी?
चौथा और शायद सबसे दिलचस्प संकेत मार्केट ब्रेड्थ है। देविना मेहरा के मुताबिक निफ्टी के स्थिर रहने के बावजूद कई शेयरों में पहले ही अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। उनके मुताबिक औसत शेयर में करीब 40 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है। यानी इंडेक्स ऊपर से जितना मजबूत दिखाई दे रहा है, अंदर से बाजार उतना मजबूत नहीं भी हो सकता। यही वजह है कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कितने शेयर तेजी में हैं और कितने लगातार नीचे जा रहे हैं। कई बार इंडेक्स और ब्रेड्थ के बीच बढ़ता अंतर बाजार में किसी बड़े मोड़ का संकेत दे सकता है।
क्या करें निवेशक?
देविना मेहरा का संदेश यही है कि निफ्टी की रोजाना चाल को देखकर बाजार पर अंतिम राय नहीं बनानी चाहिए। वैल्यूएशन, सेंटीमेंट, ग्लोबल पोजिशनिंग और मार्केट ब्रेड्थ को एक साथ देखकर ज्यादा बेहतर तस्वीर सामने आती है। हालांकि, इनमें से कोई भी संकेत भविष्य की दिशा की गारंटी नहीं देता। बाजार में संभावनाएं होती हैं, निश्चितता नहीं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे इंडेक्स के शोर से बाहर निकलकर सेक्टर और शेयर के स्तर पर बाजार की वास्तविक स्थिति को समझें।
