Protein and Longevity: जिम जाने वाले हों या वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग आजकल हर तरफ प्रोटीन की ही चर्चा है। हर कोई ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन खाने की सलाह देता नजर आता है। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन के मुताबिक, हर किसी के लिए जरूरत से ज्यादा प्रोटीन खाना फायदेमंद नहीं होता। कुछ मामलों में कम प्रोटीन लेना भी शरीर और बढ़ती उम्र के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
क्या कम प्रोटीन खाना सच में बढ़ा सकता है उम्र
पिछले कुछ सालों में प्रोटीन की लोकप्रियता काफी बढ़ी है। बाजार में प्रोटीन ड्रिंक, हाई-प्रोटीन दही, प्रोटीन बार और न जाने कितने प्रोडक्ट आ गए हैं। सोशल मीडिया पर भी फिटनेस इंफ्लुएंसर्स अक्सर ज्यादा प्रोटीन खाने की सलाह देते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च कहती है कि हर व्यक्ति के लिए ज्यादा प्रोटीन खाना जरूरी नहीं है। हाल ही में Nutrition Reviews जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में 350 से ज्यादा रिसर्च का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बहुत से लोग, खासकर जो ज्यादा शारीरिक मेहनत नहीं करते, वे अपनी जरूरत से ज्यादा प्रोटीन खा रहे हैं।
ज्यादा प्रोटीन क्यों बन सकता है परेशानी
प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, शरीर के टिश्यू की मरम्मत करने और कई जरूरी कामों में मदद करता है। लेकिन अगर इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाए तो शरीर पर इसका असर अलग तरह से पड़ सकता है। रिसर्च के मुताबिक, प्रोटीन में मौजूद कुछ खास अमीनो एसिड जैसे मेथिओनिन और ब्रांच्ड-चेन अमीनो एसिड (BCAAs) शरीर में mTOR नाम के एक सिस्टम को एक्टिव करते हैं। यह सिस्टम नई कोशिकाएं बनाने और मांसपेशियों की ग्रोथ में मदद करता है।
समस्या तब होती है जब यह सिस्टम लंबे समय तक लगातार सक्रिय रहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और समय के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
कम प्रोटीन लेने पर शरीर में क्या होता है
रिसर्च बताती है कि जब शरीर को थोड़ी कम मात्रा में प्रोटीन या कुछ खास अमीनो एसिड मिलते हैं, तो वह एक तरह के मेंटेनेंस मोड में चला जाता है। इस दौरान शरीर नई कोशिकाएं बनाने की बजाय पुरानी और खराब कोशिकाओं की मरम्मत पर ज्यादा ध्यान देता है। इसी प्रक्रिया को ऑटोफैजी (Autophagy) कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो यह शरीर की प्राकृतिक सफाई व्यवस्था है, जिसमें बेकार और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को हटाकर नई और स्वस्थ कोशिकाओं के लिए जगह बनाई जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है और मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बना सकती है।
क्या हर किसी को कम प्रोटीन खाना चाहिए
इस सवाल का जवाब है-बिल्कुल नहीं। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि हर इंसान की प्रोटीन की जरूरत अलग होती है। अगर आप नियमित रूप से जिम जाते हैं, खेल-कूद करते हैं, भारी शारीरिक मेहनत करते हैं या उम्रदराज हैं, तो आपके शरीर को मांसपेशियों को बनाए रखने और रिकवरी के लिए ज्यादा प्रोटीन की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, अगर आपकी लाइफस्टाइल ज्यादा एक्टिव नहीं है, तो जरूरत से ज्यादा प्रोटीन खाना शायद कोई अतिरिक्त फायदा न दे।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: मीठा खाने के बाद फिर मीठा खाने का मन क्यों करता है? डॉक्टर से जानिए इसके पीछे छिपी बड़ी वजहें
अभी और रिसर्च की जरूरत है
वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इंसानों पर इस विषय में और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है। फिलहाल ज्यादातर सबूत शुरुआती अध्ययन और जानवरों पर किए गए प्रयोगों से मिले हैं। यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सिर्फ प्रोटीन कम करके कोई व्यक्ति अपनी उम्र निश्चित रूप से बढ़ा सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि यह रिसर्च संतुलित खानपान की अहमियत को फिर से सामने लाती है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: घर से काम करने पर वजन क्यों बढ़ने लगता है, ये छिपी वजहें भी वर्क फ्रॉम होम के दौरान बना देती हैं आपका मोटा
सिर्फ प्रोटीन नहीं, पूरी डाइट है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी सेहत सिर्फ प्रोटीन पर निर्भर नहीं करती। शरीर को कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की भी उतनी ही जरूरत होती है। इसलिए सिर्फ हाई-प्रोटीन डाइट अपनाने के बजाय संतुलित भोजन करना ज्यादा समझदारी है। साथ ही अपनी उम्र, वजन, स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधियों के हिसाब से ही प्रोटीन की मात्रा तय करनी चाहिए।
