Plastic Chemicals Increase The Risk Of Heart Diseases: हम सब जानते हैं कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए खतरनाक है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये हमारे दिल की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है? रोजमर्रा की जिंदगी में हम प्लास्टिक की बोतल, डब्बा, रैपर और पैकिंग से दिनभर घिरे रहते हैं। इनमें मौजूद कुछ खास तरह के केमिकल्स जिन्हें वैज्ञानिक "एंडोक्राइन डिसरप्टर" कहते हैं, हमारे शरीर के हार्मोन सिस्टम को बिगाड़ सकते हैं। हाल ही में एक रिसर्च में ये खुलासा हुआ है कि इन रसायनों की वजह से साल 2018 में दुनियाभर में लगभग 5.5 लाख लोगों की मौत हार्ट से जुड़ी बीमारियों से हुई। ये आंकड़ा चौंकाने वाला है। चलिए जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया।
प्लास्टिक में होते हैं हार्मोन बिगाड़ने वाले केमिकल
प्लास्टिक में फ्थेलेट्स (phthalates), बिसफिनॉल A (BPA) और PFAS जैसे केमिकल्स पाए जाते हैं। ये शरीर के हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर, धड़कन की गड़बड़ी और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। वैज्ञानिक इन्हें एंडोक्राइन डिसरप्टर कहते हैं, क्योंकि ये शरीर के नेचुरल हार्मोन की नकल करते हैं और गड़बड़ी पैदा करते हैं।
5.5 लाख मौतों की वजह प्लास्टिक के केमिकल
एक इंटरनेशनल स्टडी में पाया गया कि साल 2018 में करीब 5.5 लाख लोगों की मौत हार्ट डिजीज की वजह से हुई, जिसका सीधा संबंध प्लास्टिक में पाए जाने वाले इन केमिकल्स से था। यानी सिर्फ फैट, शुगर और लाइफस्टाइल ही नहीं, बल्कि ये अदृश्य ज़हर भी दिल की बीमारी की एक बड़ी वजह बन चुके हैं।
सिर्फ दिल नहीं, शरीर के कई अंग होते हैं शिकार
ये केमिकल सिर्फ हार्ट को नहीं, बल्कि लिवर, किडनी, फेफड़े और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करते हैं। खासकर PFAS को 'फॉरएवर केमिकल' कहा जाता है क्योंकि ये बहुत लंबे समय तक शरीर और पर्यावरण में टिके रहते हैं और धीरे-धीरे अंदरूनी नुकसान पहुंचाते हैं।
क्यों है ये इतना खतरनाक?
समस्या ये है कि हम दिनभर अनजाने में इन केमिकल्स के संपर्क में आते हैं - प्लास्टिक की बोतलों का पानी, फूड पैकिंग, डिब्बाबंद खाने, यहां तक कि कॉस्मेटिक्स में भी ये रसायन मिलते हैं। शरीर इन्हें आसानी से नहीं निकाल पाता, जिससे ये जमा होते जाते हैं और धीरे-धीरे दिल की सेहत पर असर डालते हैं।
इससे बचने के लिए क्या कर सकते हैं?
इसका समाधान आसान है, कोशिश करें कि प्लास्टिक की चीजों का कम इस्तेमाल करें। स्टील या कांच की बोतलों का इस्तेमाल करें, फूड को गर्म करने के लिए प्लास्टिक कंटेनर से बचें। सरकारों को चाहिए कि ऐसे खतरनाक केमिकल्स पर पॉलिसी बनाएं और पब्लिक को जागरूक करें।
निष्कर्ष
प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी खतरे की घंटी है। ये रिसर्च हमें एक बड़ा संदेश देती है अगर समय रहते हम सतर्क नहीं हुए, तो रोजमर्रा की ये चीजें हमारे जीवन को धीरे-धीरे कमजोर बना देंगी। अब वक्त है बदलाव का।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
