Malaria Fever Symptoms: बारिश का मौसम आते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं में से एक है मलेरिया। ज्यादातर लोग मलेरिया को तेज बुखार, जोरदार कंपकपी और फिर खूब पसीना आना जैसे लक्षणों से पहचानते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि हर बार मलेरिया की शुरुआत इस तरह होना जरूरी नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार मलेरिया बिना तेज कंपकपी या हाई फीवर के भी हो सकता है। ऐसे में इसे सामान्य वायरल इंफेक्शन, मौसम बदलने की परेशानी या थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है।
हर मरीज में एक जैसे नहीं होते मलेरिया के लक्षण
सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के इंटरनल मेडिसिन विभाग की डायरेक्टर डॉ. मनीषा अरोड़ा बताती हैं कि बुखार और कंपकपी मलेरिया के सबसे आम लक्षण जरूर हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं है कि ये लक्षण हर मरीज में दिखाई दें। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से मलेरिया के मरीज रहे लोगों में यह बुखार अलग तरीके से सामने आ सकता है।
ऐसे लोगों में कई बार सिर्फ लगातार थकान महसूस होती है। किसी का सिर भारी रहता है, तो किसी को पूरे शरीर में दर्द बना रहता है। कुछ मरीजों को भूख कम लगती है, मतली आती है, उल्टी होती है या पाचन सिस्टम में गड़बड़ी महसूस होती है। कई बार व्यक्ति सिर्फ इतना कहता है कि आज बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा, लेकिन वजह समझ नहीं आती।
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ये लक्षण भी हो सकते हैं मलेरिया की ओर इशारा
अगर बारिश के मौसम में या मच्छरों के ज्यादा संपर्क में रहने के बाद आपको इनमें से एक या एक से ज्यादा लक्षण महसूस हों, तो इन्हें हल्के में न लें क्योंकि ये मलेरिया का इशारा हो सकते हैं -
- बिना वजह कमजोरी या अत्यधिक थकान
- सिरदर्द
- पूरे शरीर या मांसपेशियों में दर्द
- मतली या उल्टी
- भूख कम लगना
- पेट में दर्द या बेचैनी
- हल्का या रुक-रुककर आने वाला बुखार
- लगातार अस्वस्थ महसूस होना
बेशक ये सभी लक्षण किसी वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं, लेकिन कई मामलों में इनकी वजह मलेरिया भी हो सकता है।
क्यों हो जाती है पहचान में देरी
मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, जनरल पीडियाट्रिक्स डॉ. नरेश लाल बताते हैं कि मलेरिया का यही असामान्य रूप अक्सर लोगों को भ्रमित कर देता है। जब तेज बुखार और कंपकपी नहीं होती, तो मरीज भी इसे गंभीर नहीं मानता और डॉक्टर के पास पहुंचने में देर कर देता है।
कई बार लोग इन लक्षणों को वायरल समझकर दवा लेना शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर यह मलेरिया है, तो इलाज में हुई देरी संक्रमण को गंभीर बना सकती है और जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
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डॉक्टर कैसे करते हैं मलेरिया की पुष्टि
मलेरिया का पता सिर्फ लक्षण देखकर नहीं लगाया जाता। डॉ. मनीषा अरोड़ा बताती हैं कि डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री भी पूछते हैं। जैसे- क्या वो हाल ही में मच्छरों वाले इलाके में रहे हैं, क्या उन्होंने किसी मलेरिया प्रभावित क्षेत्र की यात्रा की है, क्या उनके आसपास मलेरिया के और भी मामले सामने आए हैं।
इसके बाद जरूरत पड़ने पर खून की जांच कराई जाती है। पेरिफेरल ब्लड स्मीयर या रैपिड मलेरिया एंटीजन टेस्ट के जरिए यह साफ हो जाता है कि मलेरिया है या नहीं। इसलिए अंदाजा लगाने के बजाय सही समय पर जांच कराना सबसे जरूरी कदम है।
किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉ. नरेश लाल का सुझाव है कि अगर कमजोरी लगातार बढ़ रही हो, सांस लेने में दिक्कत हो, व्यक्ति भ्रमित महसूस करे, आंखों या त्वचा में पीलापन दिखाई दे या पेशाब कम आने लगे तो ये गंभीर मलेरिया के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए।
बारिश के मौसम में रहें सतर्क
बारिश के दिनों में हर बुखार वायरल ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर बिना किसी साफ वजह के तबीयत खराब लग रही है, शरीर टूट रहा है, सिरदर्द या थकान लगातार बनी हुई है या बुखार बार-बार आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देर न करें। मलेरिया की समय पर पहचान और सही इलाज न सिर्फ बीमारी को जल्दी ठीक करता है, बल्कि गंभीर जटिलताओं से भी बचाने में मदद करता है।
