Malaria vs Viral Fever: बारिश शुरू होते ही एक चीज लगभग हर घर में कॉमन हो जाती है- किसी न किसी को बुखार। दो-तीन दिन से तेज बुखार है तो घर वाले तुरंत बोल देते हैं कि वायरल होगा, मौसम का असर है। लेकिन कई बार यही सोच सबसे बड़ी गलती साबित हो जाती है।
असल में मलेरिया की शुरुआत भी बिल्कुल वायरल फीवर जैसी ही होती है। तेज बुखार, सिर दर्द, बदन टूटना, कमजोरी... शुरुआती दिनों में दोनों के लक्षण इतने मिलते-जुलते हैं कि बिना जांच के फर्क समझना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कई लोग इलाज शुरू करने में देर कर देते हैं।
सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. अमित प्रकाश सिंह कहते हैं कि सिर्फ लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल होता है कि मरीज को वायरल फीवर है या मलेरिया। वहीं मधुकर रेनबो चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के कंसल्टेंट जनरल पीडियाट्रिक्स डॉ. नरेश लाल का कहना है कि सही समय पर ब्लड टेस्ट कराने से बड़ी परेशानी टाली जा सकती है।
मलेरिया और वायरल फीवर में अंतर किन बातों से समझा जा सकता है
1. बुखार किस तरह आता है, सबसे पहले इस पर ध्यान दें
हर बुखार एक जैसा नहीं होता। वायरल फीवर में आमतौर पर बुखार लगातार बना रहता है। कभी थोड़ा कम तो कभी ज्यादा, लेकिन रहता लगातार है।
मलेरिया में कहानी थोड़ी अलग होती है। डॉ. अमित प्रकाश सिंह बताते हैं कि इसमें बुखार अक्सर एक पैटर्न में आता है। पहले तेज ठंड लगती है, फिर अचानक बुखार चढ़ जाता है और कुछ देर बाद खूब पसीना निकलता है। फिर मरीज कुछ समय के लिए सामान्य महसूस करता है और बाद में दोबारा यही सिलसिला शुरू हो सकता है।
यानी अगर बुखार बार-बार लौट रहा है तो इसे सिर्फ वायरल मानकर नजरअंदाज न करें।
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2. ठंड लगना और पसीना आना... ये संकेत हल्के में न लें
बारिश के मौसम में ठंड लगना आम बात है, लेकिन मलेरिया में इसकी तीव्रता अलग होती है।
डॉ. नरेश लाल बताते हैं कि मलेरिया में कई मरीजों को इतनी तेज कंपकंपी लगती है कि रजाई ओढ़ने के बाद भी राहत नहीं मिलती। इसके बाद शरीर तेज गर्म हो जाता है और फिर बहुत ज्यादा पसीना निकलता है।
वायरल फीवर में ऐसा तय पैटर्न हर मरीज में देखने को नहीं मिलता।

मलेरिया और वायरल फीवर में अंतर
3. डॉक्टर सबसे पहले कहीं बाहर गए थे का सवाल क्यों करते हैं
कई लोगों को लगता है कि डॉक्टर ट्रैवल हिस्ट्री क्यों पूछते हैं। लेकिन इसके पीछे वजह होती है।
डॉ. अमित प्रकाश सिंह कहते हैं कि अगर मरीज हाल ही में ऐसे इलाके से लौटा है जहां मलेरिया के मामले ज्यादा हैं या मच्छरों के संपर्क में ज्यादा रहा है, तो डॉक्टर की पहली शंका मलेरिया की तरफ जाती है।
यानी सिर्फ दवा ही नहीं, आपकी छोटी-सी जानकारी भी सही बीमारी पकड़ने में मदद करती है।
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4. मलेरिया सिर्फ बुखार नहीं, शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी असर डाल सकता है
यहीं सबसे बड़ा फर्क है। वायरल फीवर में ज्यादातर लोग कुछ दिनों में ठीक होने लगते हैं। लेकिन मलेरिया का इलाज समय पर न मिले तो मामला सिर्फ बुखार तक सीमित नहीं रहता।
डॉ. नरेश लाल बताते हैं कि मलेरिया में लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती हैं। इससे खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। कई मरीजों में तिल्ली बढ़ जाती है।
डॉ. अमित प्रकाश सिंह जोड़ते हैं कि कुछ मामलों में आंखों या त्वचा में पीलापन भी दिखाई देने लगता है। गंभीर स्थिति में बीमारी दिमाग, किडनी और फेफड़ों तक को प्रभावित कर सकती है।
5. वायरल फीवर अपने आप ठीक होने लगता है, मलेरिया नहीं
यह सबसे अहम अंतर है। वायरल फीवर में आमतौर पर तीसरे, चौथे या पांचवें दिन तक मरीज पहले से बेहतर महसूस करने लगता है।
लेकिन डॉ. नरेश लाल कहते हैं कि मलेरिया में कई बार मरीज को लगता है कि अब वह ठीक हो गया है, लेकिन कुछ घंटों या अगले दिन फिर से तेज बुखार आ जाता है। इसलिए बीच में राहत मिलने का मतलब यह नहीं कि बीमारी खत्म हो गई।
अगर इलाज में देरी हो जाए तो मलेरिया तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।
मलेरिया और वायरल फीवर की पहचान कैसे होगी
यही वह सवाल है जो सबसे ज्यादा पूछा जाता है। दोनों डॉक्टर एक बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि सिर्फ लक्षण देखकर मलेरिया और वायरल फीवर में फर्क करना मुश्किल है।
डॉ. अमित प्रकाश सिंह कहते हैं कि अगर बुखार है और मलेरिया की आशंका है तो खुद से वायरल मानकर दवा लेना ठीक नहीं है। डॉक्टर की सलाह लें और जरूरत हो तो खून की जांच जरूर कराएं।
वहीं डॉ. नरेश लाल कहते हैं कि मलेरिया की पुष्टि ब्लड टेस्ट से ही होती है। ब्लड स्मीयर या रैपिड एंटीजन टेस्ट के बिना इलाज शुरू करना सही तरीका नहीं माना जाता।
मानसून में बस ये छोटी-सी सावधानी रखें
बारिश के मौसम में घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचाव करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें और रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
सबसे जरूरी बात, अगर बुखार दो-तीन दिन से बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है या ठंड और पसीने के साथ आ रहा है, तो इसे सिर्फ वायरल समझकर घर पर इलाज करने की गलती न करें। एक छोटा-सा ब्लड टेस्ट कई बार बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
