Traffic Noise Health Effects: अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हैं, तो सुबह घर से निकलते ही हॉर्न, गाड़ियों की आवाज, ट्रैफिक जाम और आसपास का शोर सुनना आम बात है। इतना ही नहीं, कई लोगों के लिए यह शोर दिनभर और रात तक उनका पीछा करता रहता है। धीरे-धीरे हम इसकी आदत बना लेते हैं और सोचते हैं कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन क्या सच में ऐसा है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रैफिक का लगातार शोर सिर्फ कानों को परेशान नहीं करता, बल्कि यह हमारी सेहत पर भी असर डाल सकता है। यह हमारी नींद खराब कर सकता है, तनाव बढ़ा सकता है और लंबे समय में दिल की सेहत पर भी असर डाल सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसका नुकसान धीरे-धीरे होता है, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचान नहीं पाते। यही वजह है कि डॉक्टर अब नॉइज पॉल्यूशन यानी शोर प्रदूषण को एक 'साइलेंट किलर' के रूप में देखने लगे हैं।
लगातार शोर में दिमाग को नहीं मिलता आराम
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद की सीनियर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. गायत्री भाटिया बताती हैं कि हमारा दिमाग अचानक आने वाली तेज आवाजों को खतरे की तरह महसूस करता है। यही कारण है कि अचानक हॉर्न बजने या तेज आवाज सुनने पर हम चौंक जाते हैं।
समस्या तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति रोज कई घंटों तक ट्रैफिक के शोर में रहता है। ऐसे में दिमाग को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता और शरीर लगातार सतर्क रहने की स्थिति में बना रहता है। समय के साथ इसका असर चिड़चिड़ापन, तनाव, बेचैनी और ध्यान लगाने में परेशानी के रूप में दिख सकता है। कई लोगों को लगता है कि वे सामान्य हैं, लेकिन लगातार शोर उनके मूड और मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा होता है।

लगातार ट्रैफिक का शोर और दिमाग पर असर
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: डाइटिंग से सिर्फ कम नहीं होता वजन, हार्मोनल हेल्थ पर भी पड़ सकते हैं ये 6 बुरे असर
नींद खराब होना सबसे बड़ा नुकसान
ट्रैफिक के शोर का सबसे ज्यादा असर हमारी नींद पर पड़ता है। कई लोग कहते हैं कि उन्हें शोर की आदत हो गई है और अब इससे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सोते समय भी हमारा दिमाग आवाजों को सुनता और उन पर प्रतिक्रिया देता रहता है।
यही वजह है कि शोर वाले माहौल में सोने वाले लोगों की नींद बार-बार टूट सकती है या फिर उन्हें गहरी नींद नहीं मिल पाती। सुबह उठने पर थकान महसूस होना, पूरे दिन सुस्ती रहना, काम में मन न लगना और बार-बार मूड खराब होना इसके सामान्य संकेत हो सकते हैं। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर भी पड़ सकता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: हर बार चक्कर आने की वजह नहीं बनता सर्वाइकल, डॉक्टर ने कान की इस समस्या को बताया बड़ी वजह
दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है असर
अक्सर लोग सोचते हैं कि शोर का असर सिर्फ कानों या दिमाग तक ही सीमित होगा, लेकिन वास्तव ऐसा नहीं है। कई शोध बताते हैं कि लंबे समय तक ट्रैफिक के शोर में रहने वाले लोगों में दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
जब शरीर लगातार तनाव महसूस करता है, तो उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। डॉक्टरों का मानना है कि बार-बार तनाव की स्थिति में रहने से दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यही कारण है कि आज दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ नॉइज पॉल्यूशन (Noise Pollution) को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या मान रहे हैं।

ट्रैफिक का शोर करता है दिल पर वार
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: विटिलिगो के सफेद दाग छूने से नहीं फैलते, फिर भी क्यों डरते हैं लोग
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
शोर प्रदूषण का असर हर उम्र के लोगों पर पड़ सकता है, लेकिन बच्चे और बुजुर्ग इससे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। बच्चों के लिए शांत माहौल बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यही समय उनके सीखने और समझने का होता है। अगर उनके आसपास लगातार शोर बना रहे, तो पढ़ाई में ध्यान लगाने और चीजों को याद रखने में परेशानी हो सकती है।
वहीं बुजुर्गों के लिए भी लगातार शोर परेशानी बढ़ा सकता है। उन्हें पहले से ही नींद, तनाव या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिन पर शोर का असर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

साइलेंट किलर क्यों माना जा रहा ट्रैफिक का शोर
क्यों कहा जा रहा है इसे साइलेंट किलर
डॉ. गायत्री भाटिया कहती हैं कि नॉइज पॉल्यूशन की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है। यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो एक दिन में हो जाए। कई बार व्यक्ति सालों तक शोर में रहता है और उसे पता भी नहीं चलता कि उसकी नींद, मानसिक शांति और सेहत पर इसका असर पड़ रहा है।
ठीक उसी तरह जैसे हम खराब हवा से बचने की कोशिश करते हैं, वैसे ही जरूरत से ज्यादा शोर से बचना भी जरूरी है। अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचना, घर में सोने की जगह को शांत रखना और बहुत ज्यादा शोर वाले माहौल में कम समय बिताना कुछ छोटे कदम हैं जो बड़ा फर्क ला सकते हैं।
डॉक्टर की क्या है सलाह
डॉ. भाटिया कहती हैं कि शहरों का शोर अब सिर्फ परेशानी या झुंझलाहट की बात नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे लोगों की सेहत को प्रभावित करने वाली एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। ट्रैफिक का लगातार शोर हमारी नींद खराब कर सकता है, तनाव बढ़ा सकता है और लंबे समय में शरीर पर भी असर डाल सकता है।
इसलिए अगली बार जब सड़क पर बिना वजह हॉर्न बजाने का मन करे, तो याद रखिए कि यह सिर्फ आवाज नहीं है। यह किसी की मानसिक शांति, नींद और सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। साफ हवा के साथ-साथ शांत माहौल भी अच्छी सेहत के लिए उतना ही जरूरी है।
