हेल्थ

बढ़ती उम्र के असर को थाम लेती हैं ये एक्सरसाइज, कही जाती हैं सेहत की संजीवनी

ढलती उम्र कई समस्याओं को न्योता देती है। कमजोर हड्डियां, जोड़ों में दर्द, झड़ते बाल या शरीर में दर्द ये आम सी बातें हैं। धीरे-धीरे कमजोर होते शरीर के सामने छोटी सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है। हालांकि आज हम आपको कुछ ऐसे योगासन बताएंगे जो आपको उम्र के कारण होने वाली समस्याओं से निजात दिला सकते हैं।

Image

yoga for anti aging

Anti Aging Exercise : बढ़ती उम्र का सहारा लाठी नहीं, बल्कि योग बन जाए तो समस्याएं साथ छोड़कर हमेशा के लिए भाग जाती हैं। बढ़ती उम्र के साथ हमारे जोड़ों की मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे जोड़ों में दर्द समेत अन्य समस्याएं आम बात बन जाती हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे आसन बताएंगे जिन्हें करने से आपको जोड़ों, एंकल जॉइंट्स और फ्लेक्सिबिलिटी को बेहतर करने में मदद मिलेगी। बढ़ती उम्र में समस्याओं को दूर करने के लिए कौन-कौन से योग करने चाहिए, इसकी सलाह देती हैं 'योग फॉर लाइफ' की ट्रेनर और को-फाउंडर कविता अरोड़ा। उन्होंने पांच ऐसे योगासनों के विषय में बताया, जो बुढ़ापे के लक्षण को कम करने के साथ ही संजीवनी की तरह हैं।

उन्होंने बताया, “बुढ़ापे या बढ़ती उम्र के साथ हमारे प्राइमरी जॉइंट्स कमजोर होने लगते हैं। हड्डियों के साथ ही मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं। जोड़ों में लचीलापन भी कम हो जाता है, जिससे रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी मुश्किल भरे हो जाते हैं। यहां तक कि झुकना-उठना, हल्का वजन उठाना भी भारी काम लगता है।”

उन्होंने आगे बताया, “शारीरिक मजबूती बनाए रखने के लिए हमें ऐसे आसन करने चाहिए जो हमारे जोड़, खासकर टखने और कूल्हे के जोड़ों की मोबिलिटी और कमर की फ्लेक्सिबिलिटी पर काम करें।”

पांच आसन, जिनमें वायु निष्कासन, वीरभद्रासन, फलकासन, उष्ट्रासन, छिपकली मुद्रा मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करने के साथ मोबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी पर काम करते हैं। ये आसन शरीर के वजन को संतुलित कर मजबूती देने में भी मददगार होते हैं।

  1. वायु निष्कासन या पवनमुक्तासन शरीर से वायु को बाहर निकालने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट कर अपने पैरों को घुटनों की ओर खींच सकते हैं। फिर, अपने सिर को घुटनों की ओर झुका सकते हैं। यह आसन गैस, एसिडिटी और कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है।
  2. वॉरियर 2 या वीरभद्रासन, यह आसन शरीर को मजबूत करने के साथ ही वजन को भी संतुलन बनाता है और मन को शांत करता है।
  3. छिपकली मुद्रा, यह कूल्हों को खोलती है और मांसपेशियों में खिंचाव लाती है। इस योगासन को उत्थान पृष्ठासन के नाम से भी जाना जाता है।
  4. प्लैंक पोज या फलकासन, यह शरीर को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसमें सिर से लेकर एड़ी तक शरीर को एक सीधी रेखा में रखना होता है।
  5. कैमल पोज या उष्ट्रासन को ऊंट की मुद्रा भी कहा जाता है। यह आसन छाती, पीठ और जांघों को स्ट्रेच करता है, रीढ़ को लचीला बनाता है और शरीर के सभी अलाइनमेंट में सुधार करता है।

इनपुट : भाषा

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article