तेजी से फैलाने वाला वेरिएंट है JN.1
वहीं नेशनल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कोविड टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष राजीव जयदेवन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि जेएन.1 वेरिएंट तेजी से फैलने और प्रतिरक्षा से बचने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि जेएन.1 एक गंभीर रूप से प्रतिरक्षा-रोधी और तेजी से फैलने वाला वेरिएंट है। साथ ही कहा कि उन लोगों को संक्रमित करने में सक्षम हैस, जिन्हें पहले भी कोविड संक्रमण हुआ था और जिन लोगों को टीका लगाया गया था।
इसी साल सितंबर महीने में अमेरिका में पहली बार पहचाने गए इस विशेष सब वेरिएंट की पुष्टि 8 दिसंबर को केरल में 79 साल की एक बुजुर्ग महिला में हुई थी। उसने पहले इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों के हल्के लक्षणों का अनुभव किया था और वह कोविड-19 से उबर गई थीं। कोरोना के JN.1 वेरिएंट को ओमिक्रॉन सबवेरिएंट BA.2.86 या पिरोला माना जाता है। हाल ही में पिरोला के स्वरूप अमेरिका, यूके, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों में फैल रहे हैं। अब तक ये भारत समेत 38 देशों में पाया गया है और माना जाता है कि हाल ही में कुछ देशों में अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में वृद्धि के लिए ये जिम्मेदार है।
मास्क पहनें और बार-बार हाथ धोएं
दिल्ली के गंगा राम अस्पताल में चेस्ट मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. उज्ज्वल प्रकाश ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि जेएन.1, विश्व स्तर पर देखे गए अन्य वेरिएंट और उप-वेरिएंट के समान, एक हल्का वेरिएंट है। इसके लक्षणों में बुखार, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द और कुछ मामलों में हल्के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण शामिल हैं। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि Sars-CoV-2 के नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे, लेकिन सांस संबंधी वायरस से बचाव बरकरार रहेगा। अगर मामलों की संख्या बढ़ रही है तो भीड़-भाड़ वाले इलाकों में विशेषकर बंद इलाकों में मास्क पहनें। संक्रमण से बचने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए बार-बार हाथ धोएं।
