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ब्लड क्लॉट क्या होते हैं, क्या है प्रतीक यादव की मौत से कनेक्शन, शरीर में खून के थक्के बनने पर क्या होता है

Blood Clots Explained : हाल ही में अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की 38 साल की उम्र में शरीर में ब्लड क्लोट की वजह से अचानक मौत हो गई। लेकिन आखिर ये ब्लड क्लॉट, इसके लक्षण क्या हैं और यह समस्या क्यों होती है। आइए डॉक्टर से ही जानते हैं किन लोगों को ज्यादा रहता है खतरा।

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आखिर ब्लड क्लॉट्स होते क्या हैं?

Blood Clots Explained: कई बार शरीर बड़ी बीमारी आने से पहले छोटे-छोटे संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय अचानक सांस फूलना, सीने में हल्का दबाव महसूस होना, दिल की धड़कन तेज चलना या बिना वजह थकान महसूस होना ऐसी ही कुछ बातें हैं, जिन्हें लोग अक्सर कमजोरी, गैस या तनाव समझ लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक कई बार यही संकेत शरीर के अंदर बन रहे खतरनाक ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के के हो सकते हैं।

हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भाई और मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की 38 साल की उम्र में ब्लड क्लोटिंग की वजह से अचानक मौत (prateek yadav death reason) हो गई। इस मामले के बाद खून में थक्के बनने की बीमारी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) फिर चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें सांस लेने में परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर और पैरों की नसों में खून जमने की समस्या थी। डॉक्टरों का कहना है कि जब शरीर में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तब कुछ ही मिनटों में हालत गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि अचानक सांस फूलने जैसी परेशानी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। चलिए डॉक्टर से ही समझते हैं आखिर ब्लड क्लॉट क्या होता है और यह समस्या क्यों होती है।

अचानक कैसे बिगड़ी प्रतीक यादव तबीयत

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के बेटे थे। वह राजनीति से दूर रहते थे और अपनी फिटनेस और बिजनेस लाइफ को लेकर चर्चा में रहते थे। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। रिपोर्ट्स में पैरों की नसों में खून जमने यानी ब्लड क्लॉट की समस्या का भी जिक्र सामने आया।

डॉक्टरों के अनुसार शरीर में बना खून का थक्का बाद में फेफड़ों तक पहुंच गया। इससे शरीर में ऑक्सीजन का बहाव प्रभावित हुआ और उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को बहुत गंभीर माना जाता है, क्योंकि इसमें मरीज की जान कुछ ही मिनटों में खतरे में पड़ सकती है।

इस घटना के बाद अब लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर ब्लड क्लॉट क्या होता है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है।

How Blood Clots Are Formed

शरीर में खून के थक्के कैसे बनना शुरू होते हैं

आखिर ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का क्या होता है

ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। जब शरीर में कहीं चोट लगती है, तब खून जमकर बहाव रोकने का काम करता है। इससे ज्यादा खून बहने से बचाव होता है। लेकिन कई बार बिना चोट के भी नसों के अंदर खून जमने लगता है। यह एक गंभीर बीमारी है। अगर रक्त का थक्का बड़ा हो जाए या टूटकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच जाए, तो यह खून के बहाव को रोक सकता है। यही स्थिति खतरनाक बन जाती है, इसे मेडिकल भाषा में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहते हैं। जब खून का नस में बना थक्का टूटकर फेफड़ों की धमनी में फंस जाता है, तो इसे पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म (Pulmonary Thromboembolism - PTE) कहा जाता है। यह फेफड़ों में खून का थक्का जमने की एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है।

अमृता अस्पताल फरीदाबाद के पल्मोनोलॉजिस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ पहूजा बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में यह थक्का पैरों की गहरी नसों में बनता है। अगर यह टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है। शरीर में खून का बहाव धीमा पड़ना या लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतें भी ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ा सकती हैं।

ब्लड क्लॉट बनने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं

सीके बिरला हॉस्पिटल के इंटरलन मेडिसिन एक्सपर्ट कंसल्टेंट डॉ. अमित प्रकाश सिंह का कहना है कि आजकल की खराब लाइफस्टाइल भी इस समस्या की बड़ी वजह बन रही है।

  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहना
  • घंटों तक यात्रा करना
  • कम चलना-फिरना और मोटापा

यह शरीर में खून के बहाव को धीमा कर देता है। इससे नसों में खून जमने का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा,

  • धूम्रपान
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • डायबिटीज
  • हाल में हुई सर्जरी
  • कैंसर और कुछ दवाइयां भी इस जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

कुछ लोगों में यह समस्या परिवार से भी जुड़ी हो सकती है, यानी उनके शरीर में खून जल्दी जमने की प्रवृत्ति होती है। डॉक्टरों का कहना है कि जो लोग लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहते हैं या घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है।

Blood Clot Causes

खून में थक्के किस वजह से बन जाते हैं?

ब्लड क्लॉटिंग शरीर पहले कौन-कौन से संकेत देता है

ब्लड क्लॉट की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं। कई लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। अचानक सांस फूलना इसका सबसे बड़ा संकेत माना जाता है। इसके अलावा,

  • सीने में दर्द या भारीपन महसूस होना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • ज्यादा पसीना आना
  • बेचैनी होना और चलते समय जल्दी थक जाना

भी इसके कुछ आम लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों को चक्कर या कमजोरी भी महसूस होती है। अगर थक्का पैरों की नसों में बना हो, तो वहां सूजन, दर्द या गर्माहट महसूस हो सकती है।

कई बार लोग इसे सामान्य मांसपेशियों का दर्द समझ लेते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। डॉ. अमित प्रकाश सिंह के मुताबिक, अचानक सांस लेने में दिक्कत होना शरीर का बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत जांच करवाना जरूरी है।

Blood Clot Symptoms

खून का थक्का जमने के लक्षण अनदेखा नहीं करने चाहिए

फेफड़ों तक पहुंचते ही क्यों बढ़ जाता है खतरा

डॉक्टर के अनुसार सबसे ज्यादा खतरा तब होता है, जब खून का थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इससे शरीर को सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। दिल पर अचानक बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है और मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।

डॉ. सौरभ पहूजा बताते हैं कि कई मरीज शुरुआत में सिर्फ हल्की सांस की परेशानी महसूस करते हैं, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि डॉक्टर अचानक सांस फूलने को कभी नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। गंभीर मामलों में मरीज बेहोश भी हो सकता है या दिल की धड़कन अचानक रुक सकती है।

किन लोगों को ब्लड क्लोटिंग का ज्यादा खतरा रहता है

डॉक्टरों के मुताबिक जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनमें ब्लड क्लॉट बनने का खतरा ज्यादा होता है। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना, लगातार यात्रा करना और कम शारीरिक गतिविधि इसकी बड़ी वजह बन सकती है।

मोटापा, धूम्रपान, बढ़ता तनाव और खराब खानपान भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले कभी ब्लड क्लॉट की समस्या रह चुकी हो, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।

आजकल कम उम्र के लोगों में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टर कहते हैं कि शरीर की छोटी-छोटी परेशानियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

समय रहते पहचान और इलाज क्यों जरूरी है

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बीमारी का समय पर पता चल जाए, तो इलाज संभव है। जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि शरीर में कहीं खून का थक्का तो नहीं बना। इलाज में ऐसी दवाइयां दी जाती हैं, जिससे खून का थक्का और बड़ा न हो। गंभीर मामलों में तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

डॉक्टरों की सलाह है कि अगर अचानक सांस फूलने लगे, सीने में दबाव महसूस हो या पैरों में सूजन और दर्द दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार शरीर पहले ही खतरे का संकेत दे देता है, जरूरत सिर्फ उसे समय रहते समझने की होती है।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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