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Valley Fever से गई 37 साल के भारतीय Techie की जान, जानिए क्या रही वजह, और क्यों नहीं हो सका इलाज

Valley Fever Explained In Hindi: हाल ही में कैलिफोर्निया में रहने वाले 37 साल के भारतीय टेकी की वैली फीवर (Valley Fever) नाम के दुर्लभ फंगल इंफेक्शन से मौत हो गई। शुरुआत सिर्फ खांसी और फ्लू जैसे लक्षणों से हुई थी, लेकिन बाद में बीमारी फेफड़ों तक पहुंच गई। जानिए क्या है वैली फीवर, इसके लक्षण, खतरे और इलाज में देरी क्यों पड़ जाती है।

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क्या है वैली फीवर, जिसने ले ली 37 वर्षीय भारतीय टेकी की जान

Valley Fever Explained In Hindi: कभी-कभी शरीर में दिखने वाले छोटे-छोटे लक्षण भी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले 37 साल के भारतीय टेकी चिरंजीवी कोल्ला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। शुरुआत सिर्फ लगातार खांसी और फ्लू जैसे लक्षणों से हुई थी। परिवार को लगा कि शायद मौसम का असर है या कोई सामान्य वायरल इंफेक्शन। लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने पहले इसे गंभीर निमोनिया माना। बाद में जांच में पता चला कि वह वैली फीवर (Valley Fever Hindi) नाम की दुर्लभ फंगल बीमारी से संक्रमित थे। करीब एक महीने तक ICU में इलाज चलने के बाद 5 मई को उनकी मौत हो गई। यह मामला इसलिए भी चिंता बढ़ाता है क्योंकि इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल फ्लू या निमोनिया जैसे लगते हैं, जिससे सही बीमारी पकड़ने में देर हो जाती है।

मामूली खांसी समझकर टाल दी गई परेशानी

परिवार के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में चिरंजीवी को लगातार खांसी आ रही थी। साथ में हल्का बुखार और कमजोरी भी महसूस हो रही थी। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह एक गंभीर फंगल इंफेक्शन हो सकता है। आमतौर पर लोग ऐसे लक्षणों को वायरल या मौसम बदलने का असर मान लेते हैं। लेकिन धीरे-धीरे उनकी सांस लेने में परेशानी बढ़ने लगी और तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

क्या होता है वैली फीवर

वैली फीवर (Valley Fever) एक तरह का फंगल इंफेक्शन है, जो कोक्सीडिओइड्स (Coccidioides) नाम के फंगस की वजह से होता है। यह फंगस सूखी मिट्टी में पाया जाता है, खासकर कैलिफोर्निया और अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में। जब मिट्टी से उड़ने वाले इसके बेहद छोटे कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, तब संक्रमण हो सकता है। कई लोगों में इसके हल्के लक्षण दिखते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह बीमारी फेफड़ों को बुरी तरह नुकसान पहुंचा देती है। अमेरिका में हर साल करीब 20 हजार वैली फीवर के मामले सामने आते हैं, लेकिन ज्यादातर मामले पकड़ में नहीं आते हैं।

फ्लू और निमोनिया जैसे दिखते हैं इसके लक्षण

इस बीमारी की सबसे मुश्किल बात यही है कि इसके शुरुआती लक्षण बिल्कुल आम फ्लू या निमोनिया जैसे होते हैं। ऐसे में,

  • लगातार खांसी
  • बुखार
  • सीने में दर्द
  • थकान और सांस फूलना जैसे लक्षण दिखते हैं।

इन्हें देखकर लोग अक्सर इसे सामान्य संक्रमण समझ लेते हैं। यही वजह है कि कई बार सही बीमारी का पता काफी देर से चलता है। चिरंजीवी के मामले में भी पहले डॉक्टरों को गंभीर निमोनिया का शक हुआ था।

फेफड़ों पर पड़ा गहरा असर

जांच में बाद में पता चला कि उन्हें वैली फीवर था और संक्रमण तेजी से उनके फेफड़ों तक फैल चुका था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीमारी की वजह से उनके फेफड़े गंभीर रूप से प्रभावित हुए और हालत श्वसन विफलता (Respiratory Failure) तक पहुंच गई, यह एक गंभीर, जानलेवा स्थिति है जहां फेफड़े खून में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाते या कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर नहीं निकाल पाते। इसका मतलब है कि फेफड़े शरीर को ठीक तरीके से ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे थे। इसके बाद उन्हें ICU में भर्ती किया गया, लेकिन लंबे इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी।

क्यों जरूरी है समय पर पहचान

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गंभीर मामलों में इस बीमारी का इलाज एंटीफंगल दवाओं दवाओं से किया जाता है। लेकिन अगर बीमारी देर से पकड़ में आए तो इलाज मुश्किल हो सकता है और रिकवरी में कई महीने लग सकते हैं। अमेरिका में हर साल करीब 20 हजार वैली फीवर के मामले सामने आते हैं, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई मामलों की पहचान ही नहीं हो पाती। यही वजह है कि लंबे समय तक रहने वाली खांसी और सांस की दिक्कत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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