हवाई जहाज जब बहुत ऊंचाई पर उड़ता है, तब उसके इंजन से गर्म गैसें बाहर निकलती हैं। इन गैसों में पानी की भाप भी मौजूद होती है। अब यहां से शुरू होता है पूरा खेल। आसमान में बहुत ऊंचाई पर तापमान जमीन के मुकाबले काफी कम होता है। कई बार वहां का तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस या उससे भी कम हो सकता है।
जब प्लेन के इंजन से निकलने वाली गर्म और नमी वाली गैस अचानक इतनी ठंडी हवा के संपर्क में आती है, तो उसमें मौजूद पानी की भाप तेजी से ठंडी हो जाती है। इसके बाद पानी की बेहद छोटी बूंदें या बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं। यही छोटे-छोटे बर्फ के कण हमें दूर से सफेद लाइन या सफेद लकीर के रूप में दिखाई देते हैं।
प्लेन के पीछे बनने वाली इस सफेद लकीर को कॉन्ट्रेयल (Contrail) कहा जाता है। यह शब्द संघनन निशान (Condensation Trail) से बना है, यानी इसका मतलब होता है संघनन से बनने वाली लकीर। सीधे शब्दों में कहें तो यह आसमान में प्लेन द्वारा छोड़ा गया धुआं नहीं, बल्कि मुख्य रूप से बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टल की एक लाइन होती है।
इसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं जैसे सर्दियों में हमारे मुंह से सांस छोड़ने पर सफेद धुंध जैसी दिखाई देती है। हमारे मुंह से निकलने वाली गर्म और नमी वाली हवा बाहर की ठंडी हवा से मिलती है और छोटी बूंदें बनाती है। प्लेन के पीछे बनने वाली कॉन्ट्रेयल (Contrail) भी कुछ इसी तरह बनती है, बस वहां तापमान बेहद कम होता है।
अब यहां एक और दिलचस्प सवाल आता है। अगर हर प्लेन के इंजन से गर्म गैस और पानी की भाप निकलती है, तो हर विमान के पीछे हमेशा सफेद लाइन क्यों नहीं दिखाई देती? इसका कारण है ऊंचाई और मौसम की स्थिति। अगर विमान जिस ऊंचाई पर उड़ रहा है वहां हवा बहुत ठंडी और पर्याप्त नमी वाली है, तो कॉन्ट्रेयल (Contrail) बनने की संभावना ज्यादा होती है।
वहीं अगर हवा अपेक्षाकृत सूखी है, तो सफेद लकीर जल्दी गायब हो सकती है या बिल्कुल दिखाई नहीं दे सकती। इसी वजह से कभी किसी विमान के पीछे बहुत लंबी सफेद लकीर दिखाई देती है, तो कभी छोटी और कुछ ही देर में गायब हो जाती है।
आपने कई बार देखा होगा कि प्लेन के गुजर जाने के बाद भी उसकी सफेद लकीर आसमान में काफी देर तक बनी रहती है। इसका कारण भी वातावरण में मौजूद नमी है। अगर ऊंचाई पर हवा में नमी ज्यादा हो, तो बने हुए बर्फ के छोटे क्रिस्टल जल्दी खत्म नहीं होते। हवा उन्हें फैलाती रहती है और कॉन्ट्रेयल (Contrail) धीरे-धीरे चौड़ी होती हुई दिखाई दे सकती है। इसके उलट अगर हवा सूखी हो, तो ये क्रिस्टल जल्दी गायब हो जाते हैं और सफेद लाइन कुछ समय बाद नजर नहीं आती।
अगली बार जब आप आसमान में किसी हवाई जहाज के पीछे लंबी सफेद लकीर देखें तो उसे धुआं समझने की जरूरत नहीं है। दरअसल, वह प्लेन के इंजन से निकलने वाली गर्म और नमी वाली गैस के बेहद ठंडी ऊंचाई वाली हवा से मिलने के कारण बनने वाली कॉन्ट्रेयल (Contrail) है। यानी आसमान में दिखने वाली यह सफेद लकीर कोई रहस्यमयी धुआं नहीं, बल्कि पानी की भाप और बेहद ठंडे वातावरण के बीच होने वाली एक शानदार वैज्ञानिक प्रक्रिया है।