ईरान के सुप्रीम लीडर हैं अयातुल्ला खामनेई।
Ayatollah Ali Khamenei : ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। दोनों देश एक दूसरे को निशाना बनाकर भीषण हवाई हमले कर रहे हैं। ईरान के ताजा हमलों में इजरायल में भी भारी नुकसान हुआ है और लोग मारे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान यदि बिना शर्त समर्पण कर देता है तो यह लड़ाई थम जाएगी। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का मानना है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई के मारे जाने पर ही यह संघर्ष थमेगा।
शिया देश ईरान अमेरिका और इजरायल दोनों से टकरा रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई अमेरिकी धमकियों और इजरायल के हमलों के बाद टस से मस नहीं हुए हैं। वह अपने इरादे पर कायम हैं। खामनेई ने कुछ दिनों पहले कहा कि 'ऐसे समझदार लोग जो ईरान और उसके इतिहास को जानते हैं, वे इस देश के साथ धमकी भरे लहजे में कभी बात नहीं करेंगे क्योंकि ईरान एक ऐसा देश है जो समर्पण नहीं कर सकता।'
बीते करीब साढ़े तीन दशक से खामनेई ईरान के सुप्रीम लीडर हैं। इन वर्षों में वह ईरान की तकदीर लिखते आए हैं। इन्हीं के हाथों में देश की बागडोर और शासन व्यवस्था है। खामनेई का एक फरमान आदेश बन जाता है और उसकी तामील वहां की संसद, राष्ट्रपति, न्यायपालिका सभी करते हैं। दरअसल, ईरान एक धार्मिक रीति-रिवाजों से चलने वाला एक इस्लामी देश है, जहां सुप्रीम लीडर ही सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली होता है। यह देश के राष्ट्रपति, संसद और न्यायपालिका सबसे बड़ा होता है। सुप्रीम लीडर के आदेश या बात को न तो कोई काट सकता है और न ही चुनौती दे सकता है।
सुप्रीम लीडर का कोई भी फैसला अंतिम होता है। यही नहीं सुप्रीम लीडर सशस्त्र बलों का कमांडर होता है। सेनाएं उसके अधीन रहती हैं। सुप्रीम लीडर ही न्यायपालिका, सरकारी मीडिया और सुरक्षा एजेंसियों के महत्वपूर्ण पदों पर लोगों की नियुक्तियां करता है। सुप्रीम लीडर के पास चुने गए किसी भी अधिकारी को बर्खास्त और कानून में रद्दोबदल करने का अधिकार होता है। युद्ध लड़ना है या शांति में लौटना है, इसका भी फैसला सुप्रीम लीडर ही करता है। देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और देशों के साथ संबंधों पर अंतिम निर्णय का अधिकार भी सुप्रीम लीडर के पास होता है।
खामनेई का जन्म 1939 में ईरान के उत्तरी शहर मशहद में हुआ। वह 86 साल के हो चुके हैं। यह अपने आठ भाई बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। इनके पिता मौलवी थे। खामनेई भी अपने पिता के नक्शे कदम पर चले। कोम में इन्होंने 1958 से 1964 तक इस्लाम धर्म की पढ़ाई की। इसके बाद वह शाह ऑफ ईरान के खिलाफ चलाए गए अयातुल्ला खुमैनी के आंदोलन से जुड़े गए। शाह के शासन के दौरान खामनेई को कई बार जेल में डाला गया। बार-बार जेल जाने की वजह से ईरान में खामनेई एक बड़े कद्दावर शख्सियत के रूप में उभरे। देश भर में इन्हें एक नई पहचान मिली और शाह के खिलाफ 1979 की क्रांति में इनकी प्रमुख भूमिका रही। खामनेई 1981 से लेकर 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद वह ईरान के सुप्रीम लीडर बने।
एक्सप्लेनर्स