Kerala New CM: केरल में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे राहुल गांधी के करीबी के.सी. वेणुगोपाल चल रहे थे, लेकिन अंत में जिस नेता ने बाजी मारी वो वीडी सतीशन (V. D. Satheesan) निकले। 4 मई को केरल विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आया और उसी दिन से सीएम के नाम पर चर्चा शुरू हई, 10 दिनों के अंदर कांग्रेस आलाकमान के.सी.वेणुगोपाल के नाम से सतीशन पर शिफ्ट करते चला गया है। आखिर ऐसा हुआ क्या? जो कांग्रेस के सामने सिर्फ वीडी सतीशन का ही विकल्प बचा।
शुरुआत में वेणुगोपाल थे आगे, लेकिन फिर...
सात मई को केरल कांग्रेस विधायक दल की एक बैठक हुई, तय हुआ कि कांग्रेस आलाकमान ही केरल के नए सीएम पर फैसला करेगा। इसके बाद दिल्ली में मीटिंग होने लगी। शुरुआती दौर में ऐसा लग रहा था कि केसी वेणुगोपाल का नाम कभी भी घोषित हो सकता है, लेकिन जब देर होने लगी तो सतीशन पर चर्चा होने लगी। कांग्रेस नेता जोसेफ वाजक्कन ने इसे लेकर गुरुवार को कहा कि केरल के अगले मुख्यमंत्री का फैसला करने में हो रही देरी स्वाभाविक है और इससे किसी को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। वाजक्कन ने कहा कि निर्णय इस तरह लिया जाना चाहिए जिससे किसी भी नेता को दुख न हो। वाजक्कन ने कहा कि इस पद के लिए वी.डी. सतीशन, रमेश चेन्निथला और के.सी. वेणुगोपाल के नामों पर विचार किया जा रहा है और अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है।
वीडी सतीशन के पक्ष में कैसे गया कांग्रेस आलाकमान?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल के मुख्यमंत्री के चयन को लेकर बुधवार को अंतिम दौर की मंत्रणा की और खरगे के आवास ’10 राजा जी मार्ग" पर दोनों नेताओं के बीच आधे घंटे से भी अधिक समय तक चर्चा हुई। इससे पहले कांग्रेस नेतृत्व ने आठ मई को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने केरल के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में वेणुगोपाल, चेन्निथला और सतीशन के अलावा केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख सनी जोसेफ और पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी भी बैठक में शामिल हुईं थीं। इसके बाद 12 मई को राहुल गांधी ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्षों और मौजूदा तीन कार्यकारी अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बैठक कर उनकी राय ली थी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्षों की राय लेने से सतीशन के समर्थकों की उम्मीदों को बल मिला।

केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी और वीडी सतीशन (फोटो- VDSatheeshanParavur)
वीडी सतीशन कहां मजबूत और वेणुगोपाल कहां कमजोर?
ऐसा माना जा रहा है कि सतीशन को सिर्फ आईयूएमएल ही नहीं, बल्कि यूडीएफ कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग का भी मजबूत समर्थन हासिल है। उनके समर्थकों का कहना है कि अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो गठबंधन को दो उपचुनावों की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। वेणुगोपाल फिलहाल अलप्पुझा से लोकसभा सांसद हैं। मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें विधानसभा का सदस्य बनने के लिए उपचुनाव लड़ना होगा, वहीं लोकसभा सीट छोड़ने के बाद वहां भी उपचुनाव कराना पड़ेगा। सतीशन खेमे का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में इस तरह का जोखिम उठाना यूडीएफ के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
