Trump Threats Iran: मध्य पूर्व में महीनों से जारी संघर्ष के बाद यूरेनियम भंडार, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध क्षतिपूर्ति को लेकर बातचीत ठप होने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी जारी की है। रविवार को ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, ईरान के लिए समय तेजी से बीत रहा है, और उन्हें जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए, वरना उनका कुछ भी नहीं बचेगा। समय बेहद महत्वपूर्ण है! ट्रंप की इस नई धमकी ने फिर युद्ध छिड़ने की आशंका पैदा कर दी है। दोनों देशों के बीच बातचीत अब तक नाकाम रही है और ट्रंप कई बार ईरान को धमका चुके हैं। लेकिन ट्रंप का रुख हमेशा अप्रत्याशित ही रहता है, वह अपने कदमों से लोगों को चौंकाते हैं। और अगर अमेरिका नए सिरे से ईरान को तबाह करने में जुट जाए तो इसमें हैरत नहीं होगी। तो सवाल है कि क्या इस बार अमेरिका-ईरान के बीच भयानक युद्ध होगा।
ट्रंप ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखीं?
ट्रंप की ये टिप्पणी ईरानी मीडिया द्वारा बातचीत फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका की मुख्य शर्तों का खुलासा करने के कुछ ही घंटों बाद आई। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम सौंप दे, केवल एक परमाणु संयंत्र को सक्रिय रखे, युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग छोड़ दे, यह स्वीकार करे कि ईरान की अधिकांश जब्त संपत्तियां ब्लॉक रहेंगी और बातचीत पूरी होने के बाद ही सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करे।
इसके जवाब में तेहरान ने बातचीत के लिए अपनी पांच पूर्व शर्तें रखी हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने कहा कि वह तभी बातचीत के लिए लौटेगा जब पूरे क्षेत्र में विशेष रूप से लेबनान में, सैन्य अभियान समाप्त हो जाएं, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाएं और उसकी विदेशी संपत्तियां मुक्त कर दी जाएं। ईरान ने युद्ध क्षति के मुआवजे और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की मान्यता की भी मांग की।
अमेरिका और इजराइल पर ईरान के क्या आरोप?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका और इजराइल पर संघर्ष के दौरान ईरान को अस्थिर करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका उद्देश्य आतंकवादी समूहों का समर्थन करके देश के अंदर असुरक्षा पैदा करना था। पेजेश्कियन ने ये टिप्पणियां ईरान में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ एक बैठक के दौरान कीं। ईरानी मीडिया के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि यह योजना अंततः विफल हो गई क्योंकि पड़ोसी देशों ने अपनी भूमि का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने की अनुमति नहीं दी। सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने अमेरिका या इजराइल को ईरान को निशाना बनाकर हमले करने के लिए अपनी भूमि का इस्तेमाल करने से मना कर दिया।
युद्धविराम हुआ, लेकिन समझौता नहीं
होर्मुज जलडमरूमध्य इस संकट का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ईरान ने इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जबकि अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी के जरिए ईरानी बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं, अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तानी मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बावजूद तनाव जारी है। हालांकि युद्धविराम ने दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर लड़ाई को रोक दिया, लेकिन यह दीर्घकालिक राजनीतिक समझौता कराने में विफल रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई मौकों पर स्पष्ट किया कि उन्होंने पाकिस्तान पर एहसान करते हुए ईरान के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई और ईरान पर किसी भी तरह की बमबारी से इनकार किया।
