India US Relation: दक्षिण एशिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, कभी जिस ट्रंप के शासन काल में अमेरिका, पाकिस्तान-पाकिस्तान कर रहा था, अब वो सीधे तौर पर भारत के साथ बिगड़ चुके रिश्ते को सुधारने की कोशिश कर रहा है। जिस कश्मीर के मामले पर अमेरिका हमेशा पाकिस्तान के साथ रहा है, हर जंग पर पाकिस्तान की सहायता के लिए खड़ा रहा है, जो ट्रंप सऊदी-पाक-तुर्की के 'इस्लामिक नाटो' बनाने पर खुश हो रहे थे, अब वो सीधे तौर पर भारत के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि सालों बाद कोई अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) न केवल कश्मीर पहुंचते हैं, बल्कि उसे भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बताते हैं। इसे बाद गोर लद्दाख भी पहुंचते। अमेरिकी सरकार के अंदर आए इस अप्रत्याशित बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं और सवाल न सिर्फ भारत-अमेरिका में है, बल्कि चीन और पाकिस्तान में भी है। सवाल ये है कि क्या ट्रंप प्रशासन को भारत ही अहमियत समझ आने लगी है और दक्षिण एशिया का समीकरण बदल रहा है?
सर्जियो गोर की कश्मीर और लद्दाख यात्रा के मायने
सर्जियो गोर की कश्मीर और लद्दाख यात्रा का प्रभाव सिर्फ भारत-अमेरिका तक सीमित नहीं रहने वाला है, इसका असर इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक सीधे तौर पर देखने को मिलेगा। पाकिस्तान में तो इसका असर देखने को मिल भी चुका है, वो नाराजगी जाहिर कर चुका है। अमेरिका राजनयिक को तलब कर चुका है, हालांकि चीन अभी चुप है। लेकिन इतना तय है कि गोर अपनी इस यात्रा से जहां भारत के साथ बिगड़े रिश्ते सुधारने की कोशिश में हैं तो वहीं चीन और पाकिस्तान को भी सख्त संदेश दे रहे हैं।
जम्मू कश्मीर में क्या बोले सर्जियो गोर?
गोर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर बुधवार (19 अगस्त 2026) को श्रीनगर पहुंचे। उन्होंने सीएम उमर अब्दुल्ला के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अहम हिस्सा और एक बेहद खूबसूरत जगह है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर की यात्रा को लेकर अमेरिका ने जो परामर्श जारी किया है, उसपर भी विचार होगा। गोर ने कहा, "अमेरिका यात्रा से जुड़ी चेतावनियां जारी करता है और हम समय-समय पर इनकी समीक्षा भी करते हैं। मैं आज यहां कोई बड़ी घोषणा तो नहीं कर सकता, लेकिन हम इस मुद्दे पर विचार जरूर करेंगे। हमारा मानना है कि नयी दिल्ली, यहां के मुख्यमंत्री और यहां के प्रशासन ने इस क्षेत्र को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कुछ बेहतरीन कदम उठाए हैं।इसलिए हम इस बात पर विचार करेंगे कि क्या अमेरिका की ओर से जारी यात्रा चेतावनी के स्तर को कम किया जाना चाहिए, क्योंकि जैसा कि मैंने पहले कहा, यह एक खूबसूरत जगह है। मुझे लगता है कि बहुत से अमेरिकी जम्मू-कश्मीर आकर इसकी खूबसूरती का दीदार करना और यहां मौजूद अवसरों के बारे में जानना पसंद करेंगे।"
उमर अब्दुल्ला के साथ सर्जियो गोर (फोटो- @OmarAbdullah)
चीन-पाकिस्तान को क्या संदेश?
ट्रंप के वर्तमान शासन में भारत के साथ अमेरिका के संबंध खराब हुए हैं, ये हर कोई जानता है। जिससे चीन दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने में जुटा है, लेकिन सर्जियो गोर की लद्दाख यात्रा, जिसके एक हिस्से पर चीन अपना दावा ठोकता है, साफ संदेश देता है कि अमेरिका इस मामले पर भारत के साथ है। वहीं पाकिस्तान, जिसके साथ अमेरिका हमेशा खड़ा रहा है। हालांकि बाइडन और ओबामा के दौर में पाकिस्तान के साथ रिश्ते आतंकवाद के मामले पर थोड़े बिगड़े थे, भारत के दवाब में पाकिस्तान अलग-थलग हुआ था। ट्रंप जब आए तो पाकिस्तान पर जमकर मेहरबान हुए, जिससे पाकिस्तान का हौसला लगातार बढ़ते रहा, लेकिन सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा और उनका ये कहना कि कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दे रहा है कि कश्मीर पर भारत का दावा मजबूत है।
सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा से भारत को क्या फायदा?
सर्जियो गोर की कश्मीर यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि गोर भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत भी हैं। गोर का जम्मू-कश्मीर पहुंचना यह संकेत देता है कि अमेरिका क्षेत्र की स्थिति को जमीनी स्तर पर समझने में रुचि रखता है। उनकी यात्रा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कश्मीर को लेकर भारत का पक्ष अमेरिकी नीति-निर्माताओं के सामने और मजबूती से पहुंचेगा। गोर का जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भी भारत के लिए सकारात्मक संदेश है। इसके अलावा, अगर अमेरिका अपनी ट्रैवल एडवाइजरी में नरमी करता है, तो कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है। अमेरिकी पर्यटकों और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी से कारोबार के नए अवसर भी बन सकते हैं। वहीं, आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका सहयोग को मजबूत करने और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बेहतर रणनीतिक समझ विकसित करने में भी यह यात्रा मददगार होगी।
जम्मू कश्मीर में सर्जियो गोर (फोटो- @USAmbIndia)
ट्रंप को आई भारत की अहमियत की समझ?
चीन से अमेरिका का प्रतिस्पर्धा हर क्षेत्र में जारी है। चीन को रोकने के लिए अमेरिका को भारत की हर हाल में जरूरत है। जो ट्रंप के पहले के राष्ट्रपतियों ने समझा था। और यही कारण था कि ओबामा से लेकर बाइडन तक और यहां तक कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर दिया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप क्वाड बना था। लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह एक तरह से निष्क्रिय होता दिखा। ट्रंप भारत के खिलाफ कई बार गए, टैरिफ से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक। अब ऐसा लग रहा है कि ट्रंप को भारत की अहमियत समझ आ चुकी है, यही कारण है कि वो सर्जियो गोर के जरिए भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश में है। यही कारण है कि सर्जियों गोर के कश्मीर वाले बयान के बाद जब पाकिस्तान भड़का, अमेरिकी राजनयिक को तलब किया तब भी गोर की यात्रा बीच में खत्म नहीं हुई, बल्कि को कश्मीर में भी जारी और उसके बाद लद्दाख में भी।
