महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी पर महिला अधिकारों के मुद्दे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन संसद में महिला आरक्षण से जुड़े बिल का विरोध करते हैं। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा पहुंचे और इसमें किसी तरह की गाड़ी या बस की व्यवस्था नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और महाराष्ट्र की परंपरा के अनुरूप ढोल बजाकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया गया।
सीएम फडणवीस ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
फडणवीस ने कहा, “जहां तक राहुल गांधी का सवाल है, वह पुणे में आकर महिला अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन महिलाओं को आरक्षण देने वाले महिला आरक्षण बिल का सदन में विरोध कर रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी महिलाओं को वास्तविक अधिकार नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा, “मेरा ऐसा मानना है कि उनके खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के दांत अलग हैं।”
फडणवीस के इस बयान को राहुल गांधी पर सीधा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। उन्होंने महिला अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस की कथित दोहरी नीति को लेकर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी के बयानों और संसद में उनके रुख के बीच अंतर का आरोप लगाया।
पुणे में राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में किया शिरकत
बता दें कि राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे के एआईएसएसएमएस (AISSMS) कॉलेज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इसके बाद राहुल गांधी ने युवाओं और महिलाओं को संबोधित करते हुए महिलाओं की स्थिति, सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर अपनी बात रखी। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘ब्रेक द केज’ यानी ‘पिंजरा तोड़ो’ रखा गया था। राहुल गांधी ने महिलाओं से सामाजिक दायरों से बाहर निकलकर अपनी अलग पहचान बनाने और अपने फैसले खुद लेने की अपील की।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए उसमें महिलाओं को लेकर कही गई बातों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में महिलाओं को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद बेटों के अधीन रहने की बात कही गई है। राहुल गांधी ने इस विचार की आलोचना करते हुए इसे बेहद शर्मनाक बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को कभी भी इस तरह सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, समाज में महिलाओं को अक्सर सिर्फ बेटी, पत्नी या मां के रूप में देखा जाता है, जबकि आज महिलाएं खेल, प्रोफेशन और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत में महिलाएं अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में उन्हें किसी तय सामाजिक दायरे में बांधकर देखना उचित नहीं है। राहुल गांधी का यह संबोधन महिलाओं की स्वतंत्रता, समान अधिकार और व्यक्तिगत पहचान के मुद्दे पर केंद्रित रहा।
