एक्सप्लेनर्स

AAP-GFP गठबंधन से बदलेगा गोवा का गणित, 2 सीटों से आगे बढ़ पाएगी केजरीवाल की पार्टी? समझिए पूरा समीकरण

GFP के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने इस गठबंधन को विश्वसनीय एवं ईमानदार बताया। सरदेसाई ने कहा कि यह गठबंधन गोवा के लोगों के प्रति निष्ठावान रहेगा। सरदेसाई अपने राजनीतिक करियर में अलग-अलग समय पर BJP, कांग्रेस और AAP को समर्थन दे चुके हैं।

Image

गोवा में जीएफपी के साथ AAP का गठबंधन।

AAP-GFP alliance: अगले साल यानी 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन सभी राज्यों में चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन भी हो रहा है। गोवा में एक ऐसा ही गठबंधन आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड ब्लॉक (GFP) के बीच हुआ है। चुनाव पूर्व हुए इस गठबंधन को दोनों दलों ने इसे 'गोवा फर्स्ट' नाम दिया है। गठबंधन की घोषणा करते हुए AAP और GFP ने लोगों से एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस विकल्प देने का वादा किया है। इस मौके पर AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि आगामी चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिलेगा और राज्य में अगली सरकार 'गोवा फर्स्ट' की बनेगी। AAP नेता ने कहा कि उनके सात सांसद भाजपा में शामिल हो गए। इस घटना के बाद वह उम्मीदवारों के चयन में विशेष सावधानी बरतेंगे।

गठबंधन में कोई बड़ा या छोटा नहीं-केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि इस गठबंधन में शामिल दोनों दल बराबर हैं, कोई बड़ा या छोटा नहीं है। वहीं, GFP के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने इस गठबंधन को विश्वसनीय एवं ईमानदार बताया। सरदेसाई ने कहा कि यह गठबंधन गोवा के लोगों के प्रति निष्ठावान रहेगा। सरदेसाई अपने राजनीतिक करियर में अलग-अलग समय पर BJP, कांग्रेस और AAP को समर्थन दे चुके हैं और गोवा की राजनीति में एक प्रमुख क्षेत्रीय चेहरा बने हुए हैं। सरदेसाई का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ फतोर्दा तक सीमित नहीं है। उन्होंने छात्र राजनीति से अपना करियर शुरू किया और बाद में गोवा प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। वह मडगांव नगर परिषद के सह-नामित पार्षद भी बने।

क्यों महत्वपूर्ण हैं सरदेसाई?

कांग्रेस से फतोर्दा का टिकट नहीं मिलने के बाद सरदेसाई ने 2012 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा और जीत हासिल की।

2016 में उन्होंने गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) बनाई। 2017 के विधानसभा चुनाव में GFP ने चार सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन सीटें जीतीं। पार्टी को पूरे राज्य में 3.48 प्रतिशत वोट मिले। उस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। BJP को 13 और कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 21 था। ऐसे में सरदेसाई किंगमेकर बनकर उभरे। GFP के तीनों विधायकों ने मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में BJP सरकार बनाने का समर्थन किया। तीनों GFP विधायकों को मंत्री बनाया गया और सरदेसाई को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा कृषि जैसे विभाग मिले। पर्रिकर के निधन के बाद वह उपमुख्यमंत्री भी बने।

goa

goa

सरदेसाई के पास है व्यापक अनुभव

2019 में GFP ने BJP सरकार से समर्थन वापस ले लिया और विपक्ष में चली गई। सरदेसाई ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में फतोर्दा सीट बरकरार रखी। हालांकि GFP की चुनावी ताकत में गिरावट आई है। 2022 में पार्टी ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ फतोर्दा सीट जीती। उसे राज्यभर में 1.84 प्रतिशत वोट मिले। इसके बावजूद सरदेसाई का राजनीतिक नेटवर्क और सरकार तथा विपक्ष, दोनों में काम करने का अनुभव उन्हें गोवा की राजनीति में महत्वपूर्ण बनाए हुए है। गोवा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राहुल त्रिपाठी ने द प्रिंट से कहा कि GFP के पास भले ही ज्यादा सीटें न हों, लेकिन मजबूत क्षेत्रीय जुड़ाव और सरदेसाई की स्थानीय मुद्दों को उठाने की क्षमता के कारण पार्टी का राजनीतिक प्रभाव काफी है।

GFP के सहारे आगे बढ़ना चाहती है AAP?

उनके मुताबिक, AAP जानती है कि वह अकेले पूरे गोवा में GFP और सरदेसाई जैसी पहुंच शायद नहीं बना पाएगी। इसलिए यह गठबंधन उसे उन इलाकों तक पहुंच देता है, जहां GFP और सरदेसाई का पहले से प्रभाव है। त्रिपाठी ने कहा कि 2017 के त्रिशंकु विधानसभा चुनाव में सरदेसाई ने दिखाया था कि सीमित सीटों के बावजूद वह किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। उनके अनुसार, गठबंधन AAP को एक क्षेत्रीय चेहरा और राजनीतिक नेटवर्क देता है, लेकिन इससे विपक्षी एकता की संभावना भी प्रभावित होती है, खासकर इसलिए क्योंकि कांग्रेस और GFP के बीच हाल तक बातचीत चल रही थी।

AAP को क्या मिलेगा?

2022 के विधानसभा चुनाव में AAP का राज्यव्यापी वोट शेयर GFP से काफी ज्यादा था। AAP ने 40 में से 39 सीटों पर चुनाव लड़ा और बेनाउलिम तथा वेलिम सीटें जीतीं। पार्टी को 6.77 प्रतिशत वोट मिले। 2017 में AAP को 6.27 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन वह एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। 2022 में BJP ने 40 में से 20 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 11 सीटें मिलीं। AAP को दो और GFP को एक सीट मिली। अब दोनों पार्टियां अपनी ताकत को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। AAP के पास राज्यभर में अपेक्षाकृत बड़ा वोट आधार और दो मौजूदा विधायक हैं, जबकि GFP के पास क्षेत्रीय पकड़ और सरदेसाई का राजनीतिक अनुभव है। रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों दलों ने गठबंधन का ऐलान किया और इसे BJP-कांग्रेस की राजनीति के विकल्प के तौर पर पेश किया। उन्होंने गठबंधन को ‘गोवा फर्स्ट’ नाम दिया है।

goa

goa

गोवा में नई राजनीति की शुरुआत-केजरीवाल

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने X पर लिखा कि गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर गोवा की राजनीति में नई शुरुआत हो रही है। उन्होंने BJP और कांग्रेस पर राज्य को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए AAP-GFP गठबंधन को विकल्प बताया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि BJP और कांग्रेस चुनाव के दौरान एक-दूसरे से लड़ते हैं, लेकिन बाद में सरकार बनाने के लिए आपस में समझौता करते हैं। इस गठबंधन के साथ GFP और कांग्रेस की राहें भी अलग हो गई हैं। दोनों दलों ने 2022 का गोवा विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था। गठबंधन की घोषणा से कुछ दिन पहले ही गोवा कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने कहा था कि GFP के साथ बातचीत जारी है। कांग्रेस ने भी इस गठबंधन पर हमला बोला। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने AAP को 'इंग्लिश-मीडियम BJP' बताया और कहा कि केजरीवाल के बयान से BJP और AAP के बीच अंतर नहीं होने की बात सामने आती है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

और पढ़ें
End of Article