UCC News : राजनीति में खलबली मचाने के लिए एक बयान ही काफी होता है और खलबली मचाने वाला यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया है। शाह ने रविवार को कहा कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू हो जाएगी। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस, सपा ओवैसी सहित इंडिया ब्लॉक के घटक दल भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हो गए। कांग्रेस ने कहा कि यूसीसी पर भाजपा की विचारधारा से वह सहमत नहीं है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी का मकसद देश में समानता लाना नहीं, बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाना और गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना है। सरकारी नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी होती है, वह सरकार को घेरता, उससे सवाल पूछता है। मुद्दा सीधे लोगों से जुड़ा हो तो उस पर राजनीति भी होनी तय है। जाहिर है कि विपक्ष यह सब करेगा लेकिन सरकार में शामिल दल ही किसी मुद्दे पर अपना रुख उससे अलग रखने लगें या विरोधी सुर अपना लें तो यह थोड़ा अजीब लगता है। यूसीसी पर बिहार में ऐसा ही होता दिख रहा है।
UCC पर एनडीए में दरार!
UCC पर एक तरह से NDA गठबंधन में दरार खुलकर सामने आ गई है। ये रार शुरू कैसे हुई, कौन किसके साथ है, और इसका आने वाले चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है। इसे शुरुआत से समझते हैं। गृह मंत्री शाह ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा कि 2029 तक NDA शासित सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। यूसीसी BJP के 2024 लोकसभा घोषणापत्र का एक अहम वादा भी रहा है। सवाल है कि बिहार में तो खुद BJP का सहयोगी दल JD(U) सत्ता में साझीदार है, और मुख्यमंत्री भी BJP से हैं तो फिर दरार कहां से आई? शाह के ऐलान के अगले ही दिन सोमवार को JD(U) के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने साफ कह दिया कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा।
संसद में यूसीसी बिल का जद-यू ने किया समर्थन
श्याम रजक ने कहा कि 'जब संसद में UCC बिल पेश हुआ था, तब हमने समर्थन किया था, लेकिन हमारे नेता नीतीश कुमार ने पहले ही साफ कर दिया था कि इसे बिहार में लागू नहीं किया जाएगा। हम उसी स्टैंड पर कायम हैं।' यानी ध्यान दीजिए ये कोई नई बात नहीं है। JD(U) यह कह रही है कि संसद में समर्थन और राज्य में लागू करना, ये दो अलग चीजें हैं। पार्टी संसदीय स्तर पर केंद्र के साथ है, लेकिन राज्य स्तर पर अपना अलग रुख बरकरार रखना चाहती है। और यहां एक दिलचस्प बात, जब रजक से पूछा गया कि क्या इस रुख से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की स्थिति पर असर पड़ेगा, तो उन्होंने सीधे कह दिया कि BJP के नेतृत्व वाली सरकार अपने सहयोगियों पर निर्भर है। ये एक तरह की खुली चेतावनी है यानी 'हमारे बिना सरकार नहीं चल सकती।'
NDA Bihar
पहले भी टकरा चुके हैं JD(U) और BJP
यह पहली बार नहीं है जब JD(U) और BJP का बिहार में टकराव हुआ हो। ट्रिपल तलाक, अनुच्छेद 370 और NRC जैसे मुद्दों पर भी पहले भी यही पैटर्न दोहराया गया है। केंद्र में समर्थन, राज्य में विरोध। यह JD(U) की एक जानी-पहचानी राजनीतिक रणनीति रही है, इसलिए यह घटना पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं कही जा सकती। अब सवाल उठता है कि JD(U) ऐसा क्यों कर रही है? इसका सीधा जवाब है बिहार का मुस्लिम वोट बैंक। पार्टी का एक बड़ा जनाधार मुस्लिम समुदाय में रहा है, और UCC को लेकर इस समुदाय में गहरी आशंका है कि यह व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप करेगा। नीतीश कुमार अपनी छवि को 'सामाजिक न्याय और सर्व-समावेशी' राजनीति से जोड़ते रहे हैं, और इस मुद्दे पर नरम पड़ना उस छवि को नुकसान पहुंचा सकता था।
चिराग, कुशवाहा के मन में भी हिचक
यहां सिर्फ JD(U) अकेली आवाज नहीं है , NDA के भीतर पूरा स्पेक्ट्रम दिख रहा है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, जो खुद बिहार सरकार में मंत्री भी हैं, उन्होंने बीच का रास्ता अपनाया। उनका कहना है कि UCC को लागू करने से पहले सभी सहयोगी दलों से पूरा परामर्श होना चाहिए, और मसौदा सामने आने के बाद पार्टी औपचारिक रूप से उसका मूल्यांकन करेगी। दिलचस्प बात ये कि उन्होंने ये भी कहा -चूंकि खुद अमित शाह ने इसकी घोषणा की है, तो 'इसमें कुछ अच्छा तो होगा ही।' यानी पूरी तरह विरोध नहीं, पर सतर्कता जरूर। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा ने भी अभी तक खुलकर स्टैंड नहीं लिया। उन्होंने कहा है कि केंद्र का प्रस्ताव देखने के बाद फैसला करेंगे। फिर आते हैं LJP (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान। उन्होंने कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना बेहद विविध है, इसलिए UCC पर कोई भी कदम व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही उठना चाहिए। उन्होंने मसौदा सार्वजनिक करने और सभी हितधारकों की राय लेने की मांग रखी।
चंद्रबाबू की टीडीपी ने किया समर्थन
वहीं, बिहार से बाहर, आंध्र प्रदेश की TDP ने इस ऐलान का समर्थन किया है, भले ही टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू पहले मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े होने की बात कह चुके थे। ये दिखाता है कि यह सिर्फ 'सेक्युलर बनाम BJP'जैसा सीधा मामला नहीं। हर पार्टी अपने-अपने राज्य के जातीय-धार्मिक समीकरण के हिसाब से स्टैंड ले रही है। बिहार अभी हाल ही में विधानसभा चुनाव के दौर से गुजरा है, और गठबंधन की राजनीति में मोलभाव लगातार चलता रहता है। JD(U) के लिए, चुनाव के फौरन बाद इस तरह का सख्त बयान देना एक स्पष्ट संदेश है कि हम भले सरकार में BJP के साथ हों, लेकिन हमारी अपनी वैचारिक लाइन अलग है और सहयोगी दल के तौर पर हमारा प्रभाव कम मत आंकिए।
जल्द ही गृह मंत्री से मिलेंगे संजय झा
रिपोर्टों के मुताबिक JD(U) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जल्द अमित शाह से मुलाकात करने वाले हैं, ताकि इस मसले पर पार्टी का रुख और स्पष्ट किया जा सके। अब इसे बिहार से बाहर निकालकर देखिए। अमित शाह का लक्ष्य 21 राज्यों में UCC लागू करना है। यानी सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि हर उस राज्य में जहां NDA सत्ता में है, वहां यही टकराव दोहराया जा सकता है। उत्तराखंड पहले ही UCC लागू कर चुका है, लेकिन बिहार जैसे राज्य, जहां मुस्लिम आबादी और जाति-आधारित गठबंधन राजनीति दोनों जटिल हैं, वहां यह कहीं ज्यादा मुश्किल सियासी प्रयोग साबित हो सकता है।
nitish kumar
यह विवाद असल में यह भी दिखाता है कि BJP का 'एक राष्ट्र, एक कानून' का एजेंडा हर जगह एक जैसी रफ्तार से नहीं बढ़ सकता क्योंकि गठबंधन सहयोगियों के अपने स्थानीय समीकरण, अपने वोट बैंक और अपनी सियासी मजबूरियां हैं। यह टकराव आने वाले महीनों में एक टेस्ट केस बन सकता है-यह तय करने में कि केंद्र अपने घोषणापत्र के वादे और गठबंधन धर्म के बीच संतुलन कैसे बनाता है।
तो कुल मिलाकर बिहार में जो हो रहा है, वो सिर्फ एक स्थानीय बयानबाजी नहीं, बल्कि NDA के भीतर एक गहरे वैचारिक और चुनावी तनाव की झलक है। एक तरफ केंद्र का राष्ट्रीय एजेंडा है, दूसरी तरफ राज्य स्तर की जमीनी राजनीति और दोनों के बीच JD(U) जैसे सहयोगी दल संतुलन साधने की कोशिश में हैं। यूसीसी पर आगे जद-यू का कैसा रुख रहेगा यह बहुत कुछ अमित शाह और संजय झा के बीच होने वाली मुलाकात पर निर्भर करेगा।
