वेब सीरीज

Exclusive: 'मैं हैरान रह गया' Satluj के बैन पर राइटर निरेन भट्ट का रिएक्शन, फिल्म की स्टोरी पर कही ये बात

  • Authored by: अभय
  • Updated Jul 8, 2026, 06:42 AM IST

Niren Bhatt on Satluj Ban: एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज के बैन होने के बाद मूवी के को-राइटर निरेन भट्ट ने Zoom से बात की। इस दौरान उन्होंने फिल्म को बैन करने पर हैरानी जताई।

Image

निरेन भट्ट ने फिल्म के बैन पर कही ये बात (Image Source: IMDb/ Zee5)

Niren Bhatt on Satluj Ban: सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) इन दिनों अपनी फिल्म सतलुज (Satluj) को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म सतलुज की रिलीज को लेकर विवाद मचा हुआ है। फिल्म सतलुज अभी हाल ही में 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज की गई थी। लेकिन फिल्म सतलुज को रिलीज के दो दिन बाद ही ओटीटी से हटा लिया गया। फिल्म सतलुज ओटीटी से हटने के बाद इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। अब फिल्म के को-राइटर निरेन भट्ट (Niren Bhatt) Zoom को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने पूरे मामले पर अपनी बात रखी है। तो चलिए जानते हैं निरेन भट्ट ने इस मुद्दे पर क्या कहा।

निरेन भट्ट ने विवाद पर तोड़ी चुप्पी

निरेन भट्ट ने Zoom से बातचीत में कहा, 'जब मुझे पता चला कि फिल्म को OTT से हटा दिया गया है, तो मैं खुद भी हैरान रह गया था। अब थोड़ी राहत इस बात से है कि फिल्म को देखने के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई गई है। मुझे पूरा भरोसा है कि फिल्म में जो कुछ भी दिखाया गया है, वो पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही रखा गया है। हमने इस पर बहुत मेहनत की, सैकड़ों लोगों से बात की और हर जानकारी को अच्छे से परखा। फिल्म में जो भी दिखाया गया है, वो हमारे देश के कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा है और सुप्रीम कोर्ट भी उसे सही मान चुका है।'

'सब कुछ लोगों के सामने है'

निरेन भट्ट ने आगे कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने बताया कि खालड़ा का अपना परिवार था, दो बच्चे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उन लोगों के लिए लड़ाई लड़ी जिनके अपने लोग गायब हो गए थे। उन्होंने कहा, 'वो उन गरीब परिवारों के लिए लड़ रहे थे, जिनके मां-बाप को डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिल रहे थे। किसी महिला का पति लापता था, तो उसे बैंक का पैसा नहीं मिल पा रहा था। किसी बेटे को अपने पिता की संपत्ति नहीं मिल रही थी, क्योंकि ये साबित करने वाला कोई रिकॉर्ड ही नहीं था कि उस शख्स के साथ क्या हुआ। जसवंत सिंह खालड़ा इन्हीं लोगों के लिए लड़ रहे थे और इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई। बाद में जिन लोगों ने उनकी हत्या की थी, उन्हें सजा भी मिली।' निरेन भट्ट ने कहा कि इस मामले की सारी जानकारी पहले से मीडिया में मौजूद है और कोर्ट का फैसला भी सबके सामने है। जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सजा दी थी। उन्होंने साफ कहा, 'फिल्म में सिर्फ वही बातें दिखाई गई हैं, जो कोर्ट में साबित हो चुकी हैं।'

स्टोरी पर दिया ये रिएक्शन

बातचीत के आखिर में निरेन भट्ट ने बताया कि उनके लिए 'सतलुज' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि इंसानियत और शांति की कहानी है। उन्होंने कहा, 'फिल्म में अर्जुन रामपाल का किरदार जिस हिंसा के दौर की बात करता है, वो 1995 में खत्म हो जाती है। इसके बाद पंजाब में शांति लौटती है, सिस्टम दोबारा पटरी पर आता है और राज्य फिर से आगे बढ़ने लगता है। आज लोग जिस पंजाब को सरसों के खेतों और खूबसूरत तस्वीरों से जोड़कर देखते हैं, वो सब उसी दौर के बाद संभव हो पाया। ये फिल्म इंसानियत और शांति की कहानी है। मुझे उम्मीद है कि कमेटी भी इसे उसी नजर से देखेगी और फिल्म फिर से स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी।'

Abhay
अभयauthor

अभय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एंटरटेनमेंट डेस्क पर चीफ कॉपी एडिटर हैं। टीवी पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल करने वाले अभय मनोरंजन जगत की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। वे फिल्म, टीवी, ओटीटी और सेलिब्रिटी अपडेट्स को सरल भाषा में और सटीक जानकारी के साथ पेश करने के लिए जाने जाते हैं। अभय अबतक 9,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं। तेजी से बदलती एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में खबरों को पकड़ने, रिसर्च करने और समय पर प्रकाशित करने में उनकी खास दक्षता है।

और पढ़ें
End of Article