सोचिए जरा, एक ऐसी आवाज जो सुनते ही रूह कांप उठे, आंखों में आंसू भर आएं और मन में एक अजीब सी बेचैनी पैदा हो जाए। वो आवाज नुसरत फतेह अली खान की थी। आज भी जब दुनिया भर के लोग उनके कव्वाली गाते हैं तो लगता है जैसे कोई जादू हो रहा हो। पाकिस्तान के फैसलाबाद में 1948 में पैदा हुए नुसरत साहब को शहंशाह-ए-कव्वाली कहा जाता था। लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ संगीत की नहीं थी, बल्कि एक ऐसी कहानी थी जिसमें सपने टूटे, रिश्ते निभाए गए और इमोशंस की बाढ़ आ गई। बॉलीवुड के लिए उनका सफर तो ऐसा था जैसे कोई तूफान आ गया हो, जो आज भी गूंज रहा है। आइए, उनकी जिंदगी के उन पन्नों को पलटें जो आपको हंसाएंगे, रुलाएंगे और सोचने पर मजबूर कर देंगे।

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पिता डॉक्टर बनाना चाहते थे
नुसरत साहब का बचपन वैसा नहीं था जैसा हम सोचते हैं। उनके खानदान में कव्वाली की परंपरा 600 साल से चली आ रही थी। दादा-परदादा सब कव्वाल थे। उनके पिता फतेह अली खान खुद भी मशहूर कव्वाल थे, लेकिन वो नुसरत को डॉक्टर बनाना चाहते थे। क्यों? क्योंकि उस जमाने में कव्वालों को समाज में कम इज्जत मिलती थी। नुसरत के पिता सोचते थे कि बेटा इंजीनियर बने या डॉक्टर, तभी नाम रोशन होगा। नुसरत को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजा गया। लेकिन दिल तो संगीत का दीवाना था। छोटे-छोटे में ही वो अपने पिता के साथ तबला बजाते और चुपके से गाने सुनते। पिता जी को शक हो जाता तो डांट पड़ती। लेकिन महज 16 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद नुसरत साहब पर जिम्मेदारियां एकदम से बढ़ गईं। इसके बाद उन्होंने चाचा मुबारक अली खान के साथ काम करना शुरू किया और फैसला कर लिया था, अब कव्वाली ही उनकी जिंदगी होगी। वो पहले तबला बजाते, फिर धीरे-धीरे लीड सिंगर बन गए।

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इस गाने को गाते समय रो पड़े थे नुसरत साहब
अब बात करते हैं बॉलीवुड की, जहां नुसरत साहब ने कमाल कर दिया। 90 के दशक में वो भारत आए और फिल्मों के लिए कंपोज करने लगे। बॉलीवुड में उनकी काफी मांग होने लगी। नुसरत साहब के गानों को काफी पसंद किया जाता था। इसकी वजह थी कि नुसरत साहब हर गाना अपने दिल से गाया करते थे। इसी से जुड़ा एक किस्सा भी खूब वायरल होता है। नुसरत साहब फिल्म धड़कन के लिए गाना 'दुल्हे का सेहरा सुहाना लगता है' रिकॉर्ड कर रहे थे इस दौरान 'मैन तेरी बहों के झूले में पली बाबुल' लाइन गाते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए। इस लाइन के आने के पर नुसरत साहब बार-बार रो रहे थे। इसकी वजह ये थी नुसरत साहब इस लाइन को गाते समय अपनी बेटी का याद कर रहे थे, जिसकी वजह से वो इमोशलन हो गए थे।

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इस घटना से हिल गया था बॉलीवुड
इसके अलावा बॉलीवुड से जुड़ा एक और किस्सा है जो आपकी आंखों में भी आंसू ला देखा। ये बात फिल्म कच्चे धागे के दौरान की। इस फिल्म के लिए म्यूजिक देने के लिए नुसरत फतेह अली खान इंडिया आए थे। इस दौरान वो एक होटल में रह रहे थे। नुसरत साहब का वजन ज्यादा होने की वजह से वो सफर नहीं कर पाते थे। इसी के चलते उन्होंने आनंद बख्शी को मैसेज भिजवाया कि वो उनसे मिलने आए और यहीं गाने लिखेंगे। लेकिन इस बात को आनंद बख्शी ईगो पर ले गए। इसके बाद दोनों एक दूसरे के गाने और धुन को रिजेक्ट करने लगे। ऐसा कई दिनों तक चलता रहा। इसके बाद नुसरत साहब ने अपने लोगों से कहा कि उन्हें आनंद बख्शी के पास ले चले। इसके बाद जब नुसरत साहब आनंद बख्शी के सामने आए तो वो रो पड़े और हाथ जोड़ने लगे। लोग उठाकर नुसरत साहब को आनंद बख्शी के पास ले गए थे क्योंकि उनका वजन ज्यादा होने की वजह से कार में नहीं आ पाते थे।

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कम उम्र में हो गया निधन
नुसरत साहब की जिंदगी छोटी थी, 1997 में सिर्फ 48 साल की उम्र में चले गए। लंदन में इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ा और वो इस दुनिया को अलविदा कह गए। लेकिन नुसरत साहब अपनी छोटी सी लाइफ में काफी नाम कमा लिया था।
