Mithun Chakraborty Life Story: बॉलीवुड में कुछ सितारे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी सिर्फ हिट फिल्मों और बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से नहीं समझी जा सकती। उनकी कहानी में संघर्ष भी होता है, जुनून भी और ऐसा स्टारडम भी, जिसकी मिसाल सालों बाद भी दी जाती है। मिथुन चक्रवर्ती भी ऐसे ही कलाकार हैं। एक वक्त था जब अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) का बॉलीवुड पर पूरा दबदबा था। बड़े बैनर, बड़े बजट और बड़ी फिल्मों के साथ अमिताभ बच्चन का नाम ही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत माना जाता था। लेकिन इसी दौर में एक ऐसा लड़का भी तेजी से आगे बढ़ रहा था, जिसके पास न तो बड़े प्रोडक्शन हाउस का सहारा था और न ही फिल्मों के लिए करोड़ों का बजट। इसके बावजूद उसकी फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही थीं और कमाई भी कर रही थीं। यही लड़का आगे चलकर ‘डिस्को डांसर’ बनकर ऐसा छाया कि रूस तक में उसके नाम का डंका बजने लगा। लोग उसके डांस स्टेप्स कॉपी करते थे, उसके जैसे बाल बनाते थे और उसके पोस्टर घरों में लगाते थे। इंडिया में उसे ‘गरीबों का अमिताभ बच्चन’ कहा गया, लेकिन मिथुन ने इस नाम को कभी अपने लिए छोटा नहीं माना। उल्टा, उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी तारीफों में से एक बताया था।

mithun chakraborty career (Image Source: IMDb)
‘गरीबों का अमिताभ बच्चन’ क्यों कहा गया?
ये नाम सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। 1980 के दशक में अमिताभ बच्चन बड़े बैनर और बड़े बजट की फिल्मों के सबसे बड़े सितारे थे। दूसरी तरफ मिथुन चक्रवर्ती ज्यादातर कम बजट की फिल्मों में काम कर रहे थे। फिर भी उनकी फिल्मों का बिजनेस अच्छा होता था। यानी फिल्म का बजट छोटा था, लेकिन कमाई करने की ताकत मिथुन के स्टारडम में थी। इसी वजह से लोग उनकी तुलना अमिताभ बच्चन से करने लगे। खुद मिथुन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोग कहते थे कि अमिताभ भी स्टार हैं और मिथुन भी, बस फर्क इतना है कि अमिताभ बड़े बैनर के स्टार हैं और वो छोटे बजट की फिल्मों के। उन्होंने अमिताभ बच्चन को ‘सदी का सबसे बड़ा स्टार’ बताते हुए इस तुलना को अपने लिए बहुत बड़ी तारीफ माना था। इतना ही नहीं, उस दौर में दोनों को इंडस्ट्री के दो बड़े पिलर तक कहा जाने लगा था।
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mithun chakraborty career (Image Source Reddit)
1986 में मिथुन ने मचा दिया था तहलका
मिथुन का स्टारडम किस लेवल पर पहुंच चुका था, इसका अंदाजा 1986 के उनके काम से लगाया जा सकता है। उस साल उनकी कई फिल्में आईं और उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। ‘स्वर्ग से सुंदर’, ‘दिलवाला’, ‘जाल’ और ‘मुद्दत’ जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। उस दौर में अमिताभ बच्चन भी बड़े स्टार थे, लेकिन मिथुन लगातार कई फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच अपनी जगह मजबूत कर रहे थे। मिथुन की खासियत ये थी कि वह एक ही तरह के किरदार में बंधकर नहीं रहे। कभी एक्शन हीरो बने, कभी रोमांटिक हीरो और फिर डांसिंग स्टार के रूप में ऐसी पहचान बनाई कि लोग उन्हें ‘डिस्को किंग’ कहने लगे।
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mithun chakraborty career (Image Source IMDb)
‘डिस्को डांसर’ ने बदल दी पूरी कहानी
मिथुन की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ साल 1982 में आया, जब ‘डिस्को डांसर’ रिलीज हुई। फिल्म में उनका ‘जिमी’ वाला किरदार लोगों के दिल में उतर गया। फिल्म के गाने और मिथुन का डांस इतना लोकप्रिय हुआ कि इसका असर भारत से बाहर तक देखने को मिला। खासकर रूस और उस समय के सोवियत संघ के देशों में मिथुन की लोकप्रियता जबरदस्त थी।
रूस में क्यों थे मिथुन के दीवाने?
अब सवाल ये है कि रूस में मिथुन को लेकर इतना क्रेज आखिर क्यों था? इसकी सबसे बड़ी वजह ‘डिस्को डांसर’ बनी। फिल्म में एक गरीब डांसर की कहानी दिखाई गई थी, जो अपने हुनर और मेहनत के दम पर आगे बढ़ता है। ये कहानी रूसी युवाओं को खूब पसंद आई। भाषा की दीवार भी मिथुन की लोकप्रियता के रास्ते में नहीं आई। वहां के बहुत से लोगों को हिंदी समझ नहीं आती थी, लेकिन फिल्म की धुन, गाने और मिथुन के डांस ने उन्हें अपना दीवाना बना लिया। रूस में बच्चे और बड़े मिथुन के डांस स्टेप्स की नकल करने लगे थे। कई लोग उनके जैसा हेयरस्टाइल रखते थे और उनके पोस्टर घरों में लगाते थे। ‘जिमी जिमी आजा’ जैसे गाने वहां लोगों की जुबान पर चढ़ गए। यहां तक कि आज भी उस दौर के मिथुन के क्रेज का जिक्र होता है। 2023 में राज्यसभा में भी सोवियत संघ के देशों में ‘जिमी जिमी’ के असर का उदाहरण दिया गया था।
एक साल में 19 फिल्में, फिर भी काम की कमी नहीं
मिथुन की मेहनत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 1989 में उनकी 19 फिल्में रिलीज हुई थीं। यानी लगभग हर महीने पर्दे पर उनकी कोई न कोई फिल्म नजर आ रही थी। एक समय ऐसा भी बताया जाता है कि वो करीब 65 फिल्मों की शूटिंग एक साथ कर रहे थे। उनका ये दौर ऐसा था कि छोटे शहरों और कस्बों में भी मिथुन की जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी। उनके डांस, एक्शन और आम आदमी जैसे अंदाज ने उन्हें उन दर्शकों से जोड़ दिया, जो बड़े स्टार्स की चमक-दमक से अलग एक अपना हीरो देखना चाहते थे।
29 फिल्में बनीं, लेकिन दर्शकों तक पहुंच ही नहीं पाईं
मिथुन का करियर सिर्फ हिट और सुपरहिट फिल्मों से भरा नहीं था। उनकी करीब 29 ऐसी फिल्मों का भी जिक्र मिलता है, जिन्हें बनाया गया, कुछ की शूटिंग भी हुई, लेकिन वे कभी सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पाईं। इनमें ‘मोब्बत और मुकद्दर’, ‘रुत आए रुत जाए’, ‘रैंबो’, ‘लुच्चा लफंगा’, ‘रिश्ता’, ‘दुश्मन सुहाग का’ और कई दूसरी फिल्में शामिल थीं। यानी मिथुन के नाम पर जितनी फिल्में पर्दे पर आईं, उससे कहीं ज्यादा प्रोजेक्ट ऐसे भी रहे जो किसी न किसी वजह से रुक गए। इसके बावजूद मिथुन की रफ्तार नहीं रुकी। उन्होंने हिंदी के साथ बंगाली, भोजपुरी और उड़िया फिल्मों में भी काम किया। ‘मृगया’ से करियर शुरू करने वाले मिथुन को पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। आगे चलकर उन्हें एक्टिंग के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले और 2024 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
चर्चा में रहा था होटल
मिथुन ने 1990 के आसपास ऊटी में होटल बिजनेस शुरू किया। उनका आइडिया सिर्फ होटल चलाने का नहीं था। उन्हें ऊटी की लोकेशन इतनी पसंद थी कि उन्होंने सोचा कि यहीं होटल भी होगा और फिल्मों की शूटिंग भी हो सकती है। फिर उन्होंने निर्माताओं के सामने एक तरह का पैकेज रखा अगर मिथुन को लेकर फिल्म बनानी है, तो शूटिंग ऊटी में करो और पूरी यूनिट उनके मोनार्क होटल में ठहर सकती है। इससे प्रोड्यूसर का रहने-खाने का खर्च भी कम होता था और मिथुन का होटल भी चलता था। बाद में तो ये मॉडल इतना चल पड़ा कि मिथुन की फिल्मों की शूटिंग ऊटी में ही होने लगी। पूरी यूनिट होटल में रुकती, शूटिंग एक टाइट शेड्यूल में पूरी होती और कम बजट में फिल्म तैयार हो जाती। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिथुन की शर्त रहती थी कि फिल्म की शूटिंग ऊटी में हो और पूरी टीम उनके होटल में ठहरे।
मिथुन चक्रवर्ती अब क्या करते हैं?
मिथुन चक्रवर्ती की कहानी सिर्फ एक डांसिंग स्टार की कहानी नहीं है। ये उस कलाकार की कहानी है जिसने बड़े स्टार के सामने अपनी अलग जगह बनाई, छोटे बजट की फिल्मों को अपने स्टारडम से ताकत दी और फिर ऐसा मुकाम हासिल किया कि इंडिया से हजारों किलोमीटर दूर रूस में भी लोग उसके डांस और अंदाज के दीवाने हो गए। ‘गरीबों का अमिताभ बच्चन’ कहे जाने से लेकर ‘डिस्को डांसर’ बनकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में छा जाने तक, मिथुन ने साबित किया कि स्टार बनने के लिए हमेशा बड़े बैनर की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी एक कलाकार का अपना नाम ही सबसे बड़ा बैनर बन जाता है। आज मिथुन चक्रवर्ती पहले की तरह हर दूसरी-तीसरी फिल्म में नजर नहीं आते, लेकिन उनका फिल्मी सफर पूरी तरह रुका भी नहीं है।
