Bihar Flood: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और तिब्बत सीमा के पास अचानक ग्लेशियर फटने (Nepal Glacier Burst Flood) से बिहार के मैदानी इलाकों में जलप्रलय का खतरा मंडराने लगा है। ग्लेशियर पिघलने और भारी बारिश के कारण नेपाल की त्रिशूली नदी और फिर देवघाट के रास्ते नारायणी (गंडक) नदी में पानी का प्रवाह काफी तेज हो गया है। इस संभावित खतरे को देखते हुए बिहार सरकार ने राज्य के संवेदनशील उत्तर बिहार के जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी (Vijay Choudhary Statement) ने स्थिति की पूरी जानकारी देते हुए आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार से मिले आंकड़ों के अनुसार देवघाट पर जलस्तर लगभग तीन मीटर तक बढ़ सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी गंडक नदी का मूल जलस्तर काफी कम है। फिलहाल बराज से महज 80 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज हो रहा है। नेपाल से करीब डेढ़ लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी आने के बाद भी कुल डिस्चार्ज 2.5 से 2.75 लाख क्यूसेक के आसपास रहेगा, जो कि खतरे के निशान से नीचे है।
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अगले 5 से 6 घंटे प्रशासन के लिए बेहद संवेदनशील-विजय चौधरी
मंत्री विजय चौधरी (Bihar Flood Vijay Choudhary Video) ने स्पष्ट किया कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि नेपाल के देवघाट से वाल्मीकिनगर बराज तक पानी पहुंचने में 3 से 4 घंटे का समय लगता है। इसलिए प्रशासन के लिए अगले 5 से 6 घंटे और पूरी रात बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं। सरकार की ओर से विशेषज्ञ अधिकारियों और आपदा प्रबंधन की अतिरिक्त टीमों को मौके पर रवाना कर दिया गया है। राहत सामग्री और बचाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में प्रशासन की विशेष चौकसी
उधर, संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। नेपाल सीमा से सटे सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में विशेष चौकसी बरती जा रही है। सीतामढ़ी के जिलाधिकारी तनय सुलतानिया ने संवेदनशील इलाकों का दौरा कर तटबंधों और नदियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने, ऊंचे स्थानों और सामुदायिक रसोई के लिए उपयुक्त जगहें चिन्हित करने के आदेश दिए हैं। सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री खुद हर पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बिहार प्रशासन तैयार है।
