नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई अचानक और बेहद तेज फ्लैश फ्लड ने कुछ ही मिनटों में भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी का ऐसा सैलाब आया कि सड़कें, पुल, बस्तियां और हाइड्रोपावर परियोजनाएं इसकी चपेट में आ गईं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका नेपाल-चीन सीमा के पास है। इस आपदा के कारण अब तक 55 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,वहीं 400 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिनमें 105 भारतीय हैं। अचानक आई इस तबाही की को लेकर जो शुरुआती आकलन सामने आ रहा है उसमें इसकी वजह सामान्य भारी बारिश नहीं,बल्कि पहाड़ों के ऊपर हुई एक ऐसी प्राकृतिक घटना को माना जा रहा है,जिसने अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी पहुंचा दिया।
आखिर अचानक इतना पानी आया कहां से?
वैज्ञानिकों और नेपाली अधिकारियों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस आपदा की कड़ी ल्हेंदे नदी से जुड़ी हुई है। ल्हेंदे नदी नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में बहती है और आगे चलकर भोटेकोशी नदी प्रणाली से जुड़ती है। काठमांडू पोस्ट से बात करते हुए काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ ने कई अहम जानकारियां दीं। उनके मुताबिक, शुरुआती जानकारी यह संकेत देती है कि ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिमस्खलन यानी आइस-रॉक एवलॉन्च ल्हेंदे नदी में आ गिरा। जिससे नदी का रास्ता अस्थायी रूप से बंद हो गया और पानी उसके पीछे जमा होने लगा। और फिर बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बती क्षेत्र में आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने हिमस्खलन को ट्रिगर किया, जिससे आइस-रॉक एवलॉन्च के कारण बना प्राकृतिक बांध अचानक बांध टूट गया और पानी तेजी से नीचे की ओर बह निकला।भूकंप ने हिमस्खलन को ट्रिगर किया?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसका केंद्र गोसाईंकुंड से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया है। इसी समय के आसपास हिमालयी क्षेत्र में एवलॉन्च की जानकारी सामने आई।
इस वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि भूकंप के झटके ने पहले से अस्थिर बर्फ और चट्टानों को हिला दिया हो और इससे एवलॉन्च हुआ हो। लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों ने यह आधिकारिक तौर पर साबित नहीं किया है कि 4.4 तीव्रता के इसी भूकंप ने एवलॉन्च को ट्रिगर किया था।
एवलॉन्च के बाद क्या हुआ?
काठमांडू यूनिवर्सिटी के जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ बताते हैं कि एवलॉन्च के बाद कुछ ही समय में जमा हुआ पानी बेहद तेज गति से नीचे आया होगा। उन्होंने बताया कि वैसे भी पहाड़ी इलाकों में नदी का ढाल बहुत ज्यादा होने के कारण पानी की रफ्तार और उसकी विनाशकारी ताकत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में जब भारी मात्रा में पानी अचानक फ्लैश फ्लड के रूप में नीचे आया तो उसने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई।
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की भी बात आ रही सामने
दरअसल, हिमालय में ग्लेशियरों के पिघलने से उनके सामने या आसपास बड़ी-बड़ी झीलें बनती हैं। इन्हें ग्लेशियल लेक कहा जाता है। इन झीलों को अक्सर बर्फ,चट्टान और मलबे से बने प्राकृतिक बांध रोककर रखते हैं।अगर किसी कारण से यह प्राकृतिक बांध टूट जाए,तो झील का पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है। इस घटना को Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF कहा जाता है।
रसुवा और इसके आसपास के क्षेत्र में ऐसी कई ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस क्षेत्र में पहले भी नदी के ब्लॉक होने और ग्लेशियल झील से अचानक बाढ़ आने की घटनाएं हो चुकी हैं। इसलिए इस बार भी यह जांच की जा रही है कि कहीं किसी ग्लेशियल झील का पानी तो अचानक बाहर नहीं निकला।
पिछले साल भी इसी इलाके में आई थी ऐसी बाढ़
बता दें कि बीते साल 8 जुलाई 2025 को भी इसी क्षेत्र में ल्हेंदे नदी से अचानक बाढ़ आई थी। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के आकलन में उस समय ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट को बाढ़ की वजह माना गया था। तब सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से भी ग्लेशियर झील के फटने के संकेत मिले थे।
क्या भारी बारिश इसकी वजह थी?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी बारिश इस फ्लैश फ्लड की मुख्य वजह नहीं थी।नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि रसुवा इलाके में मंगलवार और बुधवार को ऐसी भारी बारिश नहीं हुई थी,जो इस स्तर की अचानक बाढ़ को समझा सके। विभाग के अनुसार बारिश वाले बादल और महत्वपूर्ण वर्षा की संभावना बाद में बनने की उम्मीद थी।
हिमालय में ऐसी घटनाओं का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
हिमालय दुनिया के सबसे संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में से एक है। यहां ग्लेशियर तेजी से बदल रहे हैं,कई जगह ग्लेशियर झीलों का आकार बढ़ रहा है और ऊंचे पहाड़ों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता भी मौसम और तापमान में बदलाव से प्रभावित होती है।
अभी अंतिम वजह सामने नहीं आई
फिलहाल वैज्ञानिक इसे शुरुआती आकलन मान रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी को भी ICIMOD के जरिए ऐसी जानकारी मिली है कि एक Ice Avalanche ने नदी को ब्लॉक किया हो सकता है। यह जानकारी चीन की तरफ से मिली प्रारंभिक सूचनाओं पर आधारित है।अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ का कारण पूरी तरह स्पष्ट होने में कुछ दिन लग सकते हैं।